इन फिल्मों के ज़रिए हमेशा याद आएंगे ओम पुरी

Shefali SrivastavaShefali Srivastava   6 Jan 2017 1:04 PM GMT

इन फिल्मों के ज़रिए हमेशा याद आएंगे ओम पुरीअभिनेता ओम पुरी का आज सुबह हार्ट अटैक से निधन हो गया

लखनऊ। नए साल की शुरुआत में हिंदी सिनेमा जगत से बुरी खबर के बाद पूरा देश सदमे में है। अभिनेता ओम पुरी की अचानक मृत्यु ने सभी को शॉक्ड कर दिया। साधारण कद-काठी लेकिन दमदार आवाज़ से सिनेमा जगत में अपनी पहचान बनाने वाले ओम पुरी को आज हर कोई अपने तरीके से श्रद्धांजलि दे रहा है।

रेलवे ड्राइवर बनना चाहते थे ओम पुरी

18 अक्टूबर 1950 को हरियाणा के अंबाला में जन्मे ओम पुरी का बचपन काफी कष्टों में बीता था। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें एक ढाबे में नौकरी तक करनी पड़ी थी। बचपन में ओमपुरी जिस मकान में रहते थे उससे पीछे एक रेलवे यार्ड था।रात के समय ओमपुरी अक्सर घर से भागकर रेलवे यार्ड में जाकर किसी ट्रेन में सोने चले जाते थे। उन दिनों उन्हें ट्रेन से काफी लगाव था और वह सोचा करते कि बड़े होने पर वह रेलवे ड्राइवर बनेंगे।

फिल्म अर्धसत्य का एक दृश्य

ओमपुरी की यादगार फिल्में

अर्धसत्य (1983)

गोविंद निहलानी की अर्ध सत्य में ओम पुरी ने सब इंस्पेक्टर अनंत वेलनकर की भूमिका निभायी थी। फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।

आक्रोश (1980)

गोविंद निहलानी की आक्रोश वो पहली फिल्म थी जिससे ओम पुरी को हिन्दी फिल्म जगत में एक अलग पहचान मिली। विजय तेंदुलकर के नाटक पर आधारित फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी और अमरीश पुरी मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में पुरी ने लहन्या भीखू नाम के एक कबाली का किरदार निभाया था। फिल्म को नेशनल व फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिले थे।

जाने भी दो यारों (1983)

कुंदन शाह निर्देशित जाने भी यारों हिन्दी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ हास्य फिल्मों में शुमार की जाती है। फिल्म में ओम पुरी, नसीरुद्दीन शाह, रवि बासवानी, पंकज कपूर, सतीश शाह, सतीश कौशिक, भक्ति भार्वे और नीना गुप्ता मुख्य भूमिका में थे। फिल्म भारतीय राजनीति, भ्रष्टाचार, मीडिया, कारोबार इत्यादि पर करारा व्यंग्य माना जाता है।

फिल्म का सबसे एपिक सीन महाभारत का सीन है जिसको देखने के बाद आज भी दर्शक हंसते-हंसते लोटपोट हो जाते हैं।

नरसिम्हा (1991)

डायरेक्टर एन चंद्रा की फिल्म नरसिम्हा में ओम पुरी ने बापजी का नकारात्मक किरदार निभाया था। फिल्म में उनके अलावा सनी देयोल, डिंपल कपाड़िया, उर्मिला मांतोडकर जैसे कलाकार थे। इस फिल्म में ओम पुरी के किरदार को वाहवाही मिली थी।

द्रोहकाल (1994)

गोविंद निहलानी और ओम पुरी की जोड़ी ने आक्रोश और अर्ध सत्य की सफलता को एक बार फिर द्रोहकाल में दोहराया। आतंकवाद पर केंद्रित फिल्म में ओम पुरी ने डीसीपी अभय सिंह की भूमिका निभायी थी। फिल्म में आशीष विद्यार्थी, मीता वशिष्ठ, मिलिंद गुनाजी और नसीरूद्दीन शाह उनके साथ मुख्य भूमिका में थे।

मिर्च मसाला (1987)

फिल्म मिर्च मसाला वैसे तो नसीरुद्दीन शाह व स्मिता पाटिल की फिल्म थी लेकिन इसमें एक बहादुर वृद्ध गार्ड का किरदार निभाकर ओम पुरी ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था। एक बहादुर गार्ड जो सूबेदार को मसालों की फैक्ट्री में जाने से रोकता है जहां महिलाएं काम करती हैं।

चाची 420 (1997)

कमल हसन की चाची 420 में ओम पुरी ने एक बार फिर हास्य अभिनय के लिए अपना लोहा मनवाया। कमल हसन, अमरीश पुरी, परेश रावल जैसे पाये के अभिनेताओं के संग सहायक भूमिका में भी ओम पुरी दर्शकों पर अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहे। फिल्म में उन्होंने बनवारी लाल पंडित की भूमिका निभायी थी।

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