पड़ोसन फिल्म का एक दिलचस्प किस्सा: पुण्यतिथि विशेष मन्ना डे

Mohit AsthanaMohit Asthana   24 Oct 2017 3:03 PM GMT

पड़ोसन फिल्म का एक दिलचस्प किस्सा: पुण्यतिथि विशेष मन्ना डेमन्ना डे।

लखनऊ। मन्ना डे अपने समय के सबसे प्रतिभाशाली गायक थे। उस दौर के तीन अभिनेता थे दिलीप कुमार, देव आनंद और राजकपूर। इन तीनों में से सिर्फ राजकपूर ने ही अपनी आवाज के लिये मन्ना डे को चुना। इसका सबसे बड़ा कारण ये था उन दिनों मुकेश हीरो बनने के प्रयास में थे। तब शंकर- जय किशन ने राजकपूर के लिये मन्ना डे से गाना रिकार्ड करवाया। राजकपूर के लिये गाये हुए गाने सुपरहिट भी रहे चाहे वो फिल्म चोरी-चोरी का 'ये रात भीगी-भीगी' हो या फिर श्री 420 का 'प्यार हुआ इकरार हुआ'। मन्ना डे का निधन 24 अक्टूबर 2013 को बंगलौर में हुआ था। मन्ना डे ने लगभग 3500 से ज्यादा गाने रिकार्ड किये थे।

जब गलत राग गाने के लिये नहीं तैयार हुए मन्ना डे

एक किस्सा मशहूर है साल 1968 में फिल्म आई थी 'पड़ोसन'। फिल्म के निर्माता थे अभिनेता महमूद और निर्देशन किया था योति स्वरूप ने। इस फिल्म में संगीत दिया था आरडी बर्मन ने। इस फिल्म में एक गाना था 'एक चतुर नार करके सिंगार'। इस गाने में तीन लोगों ने अपनी आवाज दी थी। किशोर कुमार, महमूद और मन्ना डे ने। इस फिल्म में किशोर कुमार ने विद्यापति का किरदार निभाया था। फिल्म में एक सिचुएशन के तहत विद्यापति और महमूद यानी मास्टर पिल्लई यानी गुरुजी के बीच गायकी का मुकाबला होता है। सीन के मुताबिक गीत रिकॉर्ड होना था।

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बात आई रिकॉर्डिग की तो किशोर कुमार को सरगम (नोटेशन) तो आती नहीं थी, लेकिन मन्ना डे इसके मास्टर थे। उस वक्त उनसे बढि़या क्लासिकल गीत गाने वाला गायक फिल्म इंडस्ट्री में कोई नहीं था। यह बात जब मन्ना डे और किशोर कुमार से कही गई कि आपको गीत के बीच-बीच में कुछ ऐसे शब्द भी उसी अंदाज में कहने होंगे, जैसे यह गाना हो। किशोर कुमार इसके लिए तैयार हो गए, पर मन्ना डे ने ऐसा करने से एकदम मना कर दिया।

उन्होंने कहा, मैं ऐसा हरगिज नहीं करूंगा। मैं संगीत के साथ मजाक नहीं कर सकता। फिर उनकी बात मान ली गई और गीत की रिकॉर्डिग शुरू हुई, तो उन्होंने सब वैसे ही गाया, लेकिन जब किशोर कुमार ने गलत अंदाज वाला नोटेशन गायकी के अंदाज में गाया, तो वे चुप हो गए। मन्ना डे ने कहा, यह क्या है? यह कौन सा राग है? तो महमूद ने उन्हें समझाया, सर सीन में कुछ ऐसा ही करना है, इसलिए किशोर दा ने ऐसे गाया। वह इसके लिए तैयार नहीं थे। किसी तरह उन्होंने अपने हिस्से का गीत पूरा किया लेकिन वह सब नहीं गाया, जो उन्हें पसंद नहीं था।

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इस गीत में जो भी बोल महमूद ने गाया है वो सारे बोल ही मन्ना डे को बोलने थे जिसके लिये उन्होंने मना कर दिया था बाद में महमूद ने अपनी आवाज में डब किया। इस तरह यह गीत, जो सदाबहार बना, पूरा हुआ लेकिन मन्ना डे ने उन शब्दों को नहीं गाया।

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