महीने में एक-दो बार ही खुलता है प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र

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अमानीगंज (फैज़ाबाद)। ग्रामीणों के बेहतर इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बनाने के लिए भले ही लाखों रुपए खर्च कर दिए हों, लेकिन महीनों तक स्वास्थ्य केन्द्र न खुलने से ग्रामीणों को इसका लाभ ही नहीं मिल पा रहा है।

फैज़ाबाद जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी दूर अमानीगंज ब्लॉक के गदरही बाजार में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बनाया गया है। लेकिन डाॅक्टर महीने में एक-दो बार ही आते हैं। ग्रामीण निजी अस्पतालों के भरोसे ही इलाज कराते हैं। स्वास्थ्य केन्द्र के बंद होने से गदरही बाजार, बोध का पुरवा, बाबा का पुरवा जैसे दर्जनों गाँव के हजारों लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। गदरही बाजार की रामावती (36 वर्ष) गर्भवती हैं, लेकिन उनका एक बार भी चेकअप नहीं हुआ। 

रामावती बताती हैं, “गाँव में ही प्राथमिक केंद्र है, लेकिन कोई फायदा नहीं है। कुछ भी हो अमानीगंज के प्राइवेट अस्पताल में ही जाना पड़ता है। जब भी कभी यहां जाओ बंद ही मिलता है।”

उसी गाँव की प्रीती (26) कहती हैं, “मेरे सात महीने का बच्चा है, एक बार भी टीका नहीं लगाया गया, इसके लिए भी हमें प्राइवेट अस्पताल ही जाना पड़ता है।

 5,000 डॉक्टरों की कमी

राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) की वेबसाइट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 5,000 डॉक्टरों की कमी है। गाँवों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए करीब 16,000 डॉक्टरों की आवश्यकता है, जबकि विभाग के पास सिर्फ 11,000 ही हैं। अभी प्रदेश मौजूदा स्वास्थ्य केंद्रों में ही डॉक्टरों की कमी नहीं पूरी कर पा रहा है जबकि प्रदेश में 1500 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्रों की कमी है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के अनुसार उत्तर प्रदेश में 5,172 पीएचसी की ज़रूरत है, जबकि सिर्फ 3692 ही मौजूद हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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