महिला की हत्या: झूठा कौन, पुलिस या आरोपी पति?

महिला की हत्या: झूठा कौन, पुलिस या आरोपी पति?Gaon Connection

गणेश जी वर्मा 

लखनऊ गोमती नगर रेलवे स्टेशन के पास हत्या कर फेंकी गई महिला की लाश का पर्दाफाश करने के बाद पुलिस अपनी ही थ्यौरी में उलझ गई है। पुलिस और आरोपी पति में कौन झूठ बोल रहा है यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

पुलिस और आरोपी पति के मुुताबिक उसने अपनी पत्नी सुशीला को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया था। जबकि सिविल अस्पताल में सुशीला के भर्ती होने का कोई रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। 

"सुशीला वर्मा (21) नाम की कोई मरीज 29 फरवरी को अस्पताल में भर्ती नहीं हुई है। सुशीला वर्मा के नाम से कोई रिकॉर्ड अस्पताल के पास मौजूद नहीं है", सिविल अस्पताल के प्रभारी अधिकारी डॉ. वीके सिंह ने बताया

बता दें कि एक मार्च को विभूतिखंड थाना क्षेत्र में स्थित गोमतीनगर रेलवे स्टेशन के पास एक विवाहिता का शव मिला था। विवाहिता के हाथ में वीगो तथा मुंह में उसी का दुपट्टा ठूंसा हुआ था। इसकी जानकारी होने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामाले की जांच प्रारम्भ कर दी थी।

दूसरे दिन समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी मिलने पर मृतका के पिता राम कुमार वर्मा ने पोस्टमॉर्टम घर पहुंचकर शव की शिनाख्त अपनी बेटी सुशीला वर्मा (21वर्ष) के रूप में की थी। शव की शिनाख्त होने पर पुलिस ने जांच करते हुये सुशीला के पति विनोद कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस और आरोपी पति के मुताबिक सुशीला काफी खर्चीली थी जबकि विनोद की आमदनी काफी कम थी। विनोद के कम रुपये कमाने को लेकर आये दिन सुशीला का विवाद होता रहता था।

दो माह की गर्भवती सुशीला 29 फरवरी को विनोद से मिलने के लिये चारबाग रेलवे स्टेशन गई थी। जहां विनोद और पुलिस की कहानी के मुताबिक सुशीला को चक्कर आने के बाद उसने अपनी पत्नी को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सकों ने उसे वीगो लगाकर ड्रिप चढ़ाया। उपचार के बाद विनोद अस्पताल से सुशीला को डिस्चार्ज कराकर फिर गोमतीनगर रेलवे स्टेशन के तरफ ले गया। जहां उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। जबकि अस्पताल में सुशीला के भर्ती होने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। 

हालाँकि पुलिस का कहना है कि उसकी जांच सही है सुशीला सिविल में भर्ती हुई थी। "सुशीला वर्मा के पति विनोद कुमार के बताने पर सिविल अस्पताल में गया था। वहां सुशीला का नाम दर्ज है। सुशीला भर्ती हुई थी। उसके बाद उसे डिस्चार्ज किया गया था। कार्रवाई बड़ी जल्दीबाजी में हुई है। एक दो दिन में जब मैं खाली हो जाउंगा तो साक्ष्य के तौर पर सिविल अस्पताल से लिखित रूप में इस रिकॉर्ड को लूंगा।" जाँच करने वाले सत्येंद्र कुमार राय, विवेचक और थानाध्यक्ष विभूतिखंड ने बताया

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