महिला प्रधान बोलीं, बड़ी कठिन है प्रधानी

महिला प्रधान बोलीं, बड़ी कठिन है प्रधानीगाँव कनेक्शन

अमेठी/रायबरेली। लगातार चौथी बार अपनी ग्राम पंचायत की ज़िम्मेदारी संभालने जा रही सुनीता सिंह (38) इस बार अपनी पंचायत में कुछ नए बदलाव लाना चाहती हैं। पिछले तीन बार प्रधान रहते हुए पंचायत में कराए गए विकास कार्यों की बदौलत उन्हें इस बार भी प्रधान पद पर चुना गया है।

रायबरेली जिला मुख्यालय से 10 किमी दक्षिण दिशा में 4,745 आबादी वाली देदौर ग्राम सभा की प्रधान सुनीता बताती हैं, "पिछले कुछ वर्षों में पंचायत में अच्छा विकास हुआ है, पर यहां बहुत कम लोगों को कालोनिया मिली हैं। इस बार मैंने पंचायत में रहने वाले पात्रों से यह वादा किया था की अगर मैं विजयी रही तो आपको कालोनिया ज़रूर दिलवाउंगी। इसलिए इस बार मेरा लक्ष्य रहेगा कि मैं सभी पात्रों को उनकी अपनी छत दिलवा सकूं।"

जिले में इस बार हुए ग्राम पंचायत चुनाव में कुल 989 प्रधानों को अपनी पंचायतों के विकास कार्यों को संभालने की बागडोर दी गई है। जिले में करीब 80 फीसदी पुराने प्रधानों को हार का मुह देखना पड़ा है।वहीं इसबार जिले में 55 फीसदी महिला प्रत्याशियों को प्रधान पद पर चुना गया है।

जहां रायबरेली जिले की सुनीता को चौथी बार ग्राम प्रधान बनने का मौका मिला वहीं अमेठी जिले की कल्पना शुक्ला (35 वर्ष) को यह ज़िम्मेदारी पहली बार मिली है।

पहली बार अमेठी की खालिसपुर ग्राम पंचायत से प्रधान पद पर चुनी गईं कल्पना बताती हैं, "कॉलेज में पढ़ते समय यह पता नहीं था कि एक दिन प्रधान बनूंगी। शादी से पहले न सही ससुराल में रहते हुए यह मौका मिला है। इसलिए ज़िम्मेदारी और भी ज़्यादा बढ़ गई है।"

"हमारी पंचायत में 13 मजरे हैं पर किसी में भी अच्छा काम नहीं हुआ है। कहीं बिजली के खंबे टूटे हैं तो कहीं बिजली आती ही नहीं है। इसके अलावा पंचायत में सिर्फ तीन सरकारी स्कूल हैं और सभी गाँवों में नाली व् खड़ंजे की हालात खराब है। इन सभी मुद्दों पर काम होगा।" कल्पना आगे बताती हैं।

इस बार ग्राम पंचायत चुनाव के परिणाम चौकाने वाले रहें हैं। दोनों जिलों में 60 फीसदी से अधिक सीटों पर युवाओं ने अपनी सरकार बनाई है। अमेठी व रायबरेली में 300 से अधिक सीटों पर महिला प्रत्याशियों का दबदबा रहा है।

रायबरेली जिले के अमावां ब्लॉक के चकदादर पंचायत की रहने वाली उर्मिला को प्रधान पद पर चुना गया है। उर्मिला बताती हैं, "अभी तक पंचायत के सभी गाँवों गई भी नहीं थी।छोटे से परिवार में पली बढ़ी हूं, अब पूरे गाँव को संभालना है। यहां पर आंगनबाड़ी सही से नहीं काम करती है, इसलिए यहां के बच्चों में बीमारियां ज्यादा है। प्रधान होने के नाते मैं गाँव की स्वच्छ्ता और इन मुद्दों पर काम करूंगी।"

जहां एकतरफ कई पंचायतों में शिक्षित प्रधानों को मौका मिलने से उन्हें ग्राम पंचायतों की हालत के बारे में पता है। वहीं दूसरी ओर कुछ पंचायतों में अशिक्षित महिला प्रधान होने के कारण पंचायत की भागदोड़ प्रधान पति संभाल रहे हैं।

रायबरेली की नागदिल ग्राम पंचायत में प्रधान जी से मिलना है ये पूछने पर गाँव की प्रधान सुमन देवी की जगह उनके पति रामू चौधरी सामने आएं।

रामू बताते हैं, "पत्नी ज़्यादा पढ़ी लिखी नहीं है इसलिए पंचायत का काम हम देखते हैं।"

सुमन देवी के अशिक्षित होने के बावजूद उनकी ग्राम पंचायत ने उन्हें चौथी बार प्रधान पद पर चुना है।

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