महिलाएं वीडियो देख कर सीख रहीं खेती के नए तरीके

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फैज़ाबाद। भारत में आम जन से खेती का गहरा सरोकार है। यही वजह है कि यहां खेती हमेशा चर्चा में रहती है। कभी खाद-बीज तो कभी सिंचाई, फसल कटाई को लेकर। संसद से सड़क तक हमेशा खेती का मुद‍्दा गूंजता रहता है। जनप्रतिनिधि हो या प्रशासक सभी खेती के मुद‍्दे पर सचेत रहते हैं।

सरकार की ओर से बनने वाली नई योजनाओं और बजट प्रावधानों में खेती को विशेष महत्व मिलता है। आज भी ग्रामीण इलाके में हालचाल पूछते वक्त खेती का हाल जरूर पूछा जाता है क्योंकि लोगों को पता है कि खेती ही जीवन का आधार है। खेती समृद्ध एवं उन्नत रहेगी तो जीवन सुदृढ़ होगा। जब भारतीय जनजीवन सुदृढ़ रहेगा तो देश की समृद्धि अपने आप बढ़ जाएगी। शायद इसी सिद्धांत को अपनाते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में अब महिलाओं ने भी खेती की कमान संभाल ली है।

कुछ समय पहले तक खेती पर पुरुषों का एकाधिकार समझा जाता था, लेकिन अब ऐसी बात नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों में तमाम ऐसी महिलाएं हैं जो खेती के जरिए नाम और पैसा दोनों कमा रही हैं। उनको सही जानकारी हो तो वह पुरुषों से कभी पीछे नहीं रहतीं। यही जानकारी देने का काम मीरा कर रही हैं। मीरा द्वारा गाँव में महिलाओं का समूह बनाकर महिलाओं को वीडियो द्वारा और अन्य नए-नए तरीके से नई तकनीकों के प्रयोग के बारे में हीं नहीं बताती बल्कि उनके साथ खेतों में जाकर उनको ट्रेनिंग भी देती हैं।

फैजाबाद के रुदौली विकासखंड के मुगल सराय जमुनिया मऊ और गौहन्ना ग्राम पंचायतों में किसानों को छोटी-छोटी वीडियो फिल्मों के माध्यम से खेती के नए तौर-तरीके सिखाने का काम किया जा रहा है। दरअसल पारस फाउंडेशन एव हिंदुस्तान यूनीलीवर द्वारा प्रत्येक ग्राम सभा में एक महिला को नए-नए तकनीकों द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है। जो गाँव में किसान तथा महिलाओं का समूह बनाकर उनको नई-नई खेती के बारे में वीडियो के माध्यम से बताया जाता है।

दिखाए जाने वाली फिल्मों के निर्माण का कार्य स्वयं संस्था द्वारा किया जाता है, जिसमें आस-पड़ोस में अपनाई जाने वाली तकनीकों को फिल्म के रूप में रूपांतरित किया जाता है जिसका मुख्य उद‍्देश्य जल संरक्षण का है, क्योंकि खेती करने में भूमिगत जल का अधिक दोहन होता है इसलिए फिल्मों के माध्यम से किसानों को ऐसी तकनीक बताई जाती है। जिसको अपनाकर किसान लागत मूल्यों को कम करते हुए अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं तथा साथ में जल का बड़े पैमाने पर बचत भी कर रहे हैं।

पारस फाउंडेशन के परियोजना निदेशक महेंद्र प्रताप ने बताया, “वह इस वर्ष उपरोक्त ग्राम पंचायतों की किसानों द्वारा 50 एकड़ श्री विधि  से धान की खेती की जा रही है इस विधि द्वारा कम लागत में अधिक पैदावार होगी।” 

गाँव की सुशीला (40 वर्ष) बताती हैं, “हम लोगों का आय का साधन खेती ही है जिसका में सही जानकारी न होने के कारण अधिक मेहनत तथा अधिक लागत लगाने के बावजूद अच्छी पैदावार नहीं हो पाती थी, जिससे खेती पर रुझान कम होता जा रहा था, लेकिन इन संस्था के कर्मचारियों द्वारा हम लोगों को नई नई तकनीक सीखने को मिली जिस को अपनाया और अच्छी पैदावार मिली।”

रिपोर्टर - रबीश कुमार वर्मा

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