मनमानी कर रहीं एमडीएम वितरित करने वाली संस्थाएं

मनमानी कर रहीं एमडीएम वितरित करने वाली संस्थाएंgaonconnection

लखनऊ। एमडीएम वितरित करने वाली संस्थाएं मनमानी पर उतारू हैं। बच्चे भले ही भूखे रह रहें हो लेकिन चाहेंगे तो खाना भेजेंगे और नहीं चाहेंगे तो किसी का डर नहीं है। डर हो भी तो कैसे, बीएसए हों या एमडीएम वितरण विभाग से जुड़े अन्य कर्मचारी, सबसे दोस्ती जो है।

शिक्षा भवन स्थित बीएसए कार्यालय जाने पर अकसर एमडीएम वितरण से सम्बन्धित कर्मचारी आनंद गौड़ के कमरे में अकसर ही इन संस्थाओं के मालिक हंसी-ठिठोली करते मिल जायेंगे। तो जिनकी पकड़ बीएसए के साथ ज्यादा है वह बीएसए के कमरे में चाय-नाश्ता करते दिख जाते हैं। ऐसे में भला किसी तरह की कार्रवाई का डर कैसे हो सकता है। 

दूध योजना की शुरुआत होने के बाद कुछ ने दूध का वितरण किया लेकिन शिक्षाधिकारियों के खास माने जाने वाली संस्थाओं ने कम बजट का रोना रोते हुए दूध वितरित करने से मना कर दिया। इसके बाद बाकी संस्थाओं को भी मौका मिल गया और अब हाल यह है कि योजना शुरू होने के बाद भी बच्चों को दूध नसीब नहीं हो रहा है। अक्षयपात्र फिर भी सप्ताह-पन्द्रह दिन में एक बार बच्चों को खीर उपलब्ध करवा देती है। किसी स्कूल में फल नहीं वितरित होते तो किसी में खाना ही वितरित नहीं होता। पर बीएसए प्रवीण मणि त्रिपाठी कभी भी इन संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते हैं क्योंकि उनका कहना है कि कोई भी स्कूल इस बारे में शिकायत दर्ज करवाता ही नहीं है। 

रोज नहीं मिलता मिड डे मील

कस्तूरबा इंटर कॉलेज में पिछले काफी समय से संस्था खाना नहीं पहुंचा रही है। तो वहीं बिशन नारायण इंटर कॉलेज में भी पिछले एक महीने में लगभग पांच-छह दिन खाना नहीं दिया गया। इस बात की शिकायत भी कॉलेज के प्रधानाचार्य एमडीएम रजिस्टर पर दर्ज करवायी। इसके साथ ही आर्यकन्या पाठशाला में भी बच्चों को कई-कई दिन तक एमडीएम के इंतजार में भूखा रहना पड़ता है। बालिका विद्या निकेतन में भी एमडीएम अकसर नहीं पहुंचता। तो वहीं मोतीलाल मेमोरियल स्कूल में भी बच्चे अकसर एमडीएम के इंतजार में ही भूखे रह जाते हैं। 

गुणवत्ता सुधारने की जरूरत

स्कूलों में एमडीएम न भेजना ही मुद्दा नहीं है बल्कि एमडीएम की गुणवत्ता भी एक बड़ा मुद्दा है। संस्थाएं जैसे तैसे यदि स्कूलों में खाना भिजवा भी देती हैं तो वह मैन्यू के अनुसार नहीं होता और जो भेजा जाता है वह इतना बेस्वाद होता है कि बच्चे खाना खाने से कतराते हैं। इस बारे में क्वीन्स इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ आर पी मिश्र कहते हैं कि कितना भी शिकायत करो खाने की गुणवत्ता सुधरने का नाम नहीं लेती है क्योंकि इन संस्थाओं को किसी का डर नहीं है। 

Tags:    India 
Share it
Top