मनरेगा में महिलाएं बनेंगी सुपरवाइजर

मनरेगा में महिलाएं बनेंगी सुपरवाइजरgaonconnection

उन्नाव। महिला सशक्तिकरण का असर मनरेगा में भी दिखने लगा है। इसके लिए शासन ने उन्हें मेट (सुपरवाइजर) के रूप में तैनात करने की रूपरेखा तैयार की है। सौ मजदूरों पर एक महिला मेट तैनात    करने के दिशा निर्देश शासन से जारी किये गये है। विभाग ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। 

मालूम हो कि महिला सशक्तिकरण के तहत हर क्षेत्र में महिलाओं को विशेष तवज्जो दी जा रही है। इसी कड़ी से केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा को भी जोड़ा जा रहा है। जिसमें अब महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने पर जोर देते उनकी तैनाती मेट के रूप में करने के दिशा निर्देश जारी किये गये है। बता दें कि मनरेगा योजना में जिले में लगभग चार लाख जाब कार्डधारक है। जिनमें काम मांगने और करने में आगे रहने वाले जाब कार्ड धारकों की संख्या तकरीबन डेढ़ लाख ही है। जिसमें महिलाओं की संख्या लगभग पचास हजार है। बीते वित्तीय वर्ष 37,25,000 मानव दिवस सृजन का लक्ष्य जिले को दिया गया था। जिसमें महिलाओं के मानव दिवस सृजन का आंकड़ा कुल लक्ष्य का पच्चीस फीसदी ही रहा। जबकि शेष लक्ष्य पुरुषों के मानव दिवस से ही पूरा हुआ।

मनरेगा सेल के आंकड़ों पर गौर करे तो 5,784 महिलाओं ने मनरेगा में काम किया। जबकि 44,216 महिलाओं ने मनरेगा में काम करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी। विभाग की माने तो मनरेगा में महिलाओं की सहभागिता कम से कम तेंतीस फीसदी होनी चाहिए। शायद यही वजह से महिलाओं की सहभागिता योजना में बढ़ाने के लिए उन्हें मेट के रूप में तैनात करने का तानाबाना बुना गया है। 

अब मनरेगा मजदूरों को मिलेंगे 174 रुपये प्रतिदिन

उन्नाव। नए वित्तीय वर्ष से मनरेगा की मजदूरी में तेरह रुपये का इजाफा किया गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार ने मनरेगा मजदूरों की मजदूरी अब बढ़ा कर 174 रुपये प्रतिदिन कर दी है। एक अप्रैल से बढ़ी मजदूरी जाब कार्डधारकों के खातों में पहुचेंगी। 

मनरेगा मजदूरों के लिए एक अच्छी खबर है एक अप्रैल से उन्हें बढ़ी हुई मजदूरी के हिसाब से भुगतान किया जाना है। इन मजदूरों को पहले 161 रुपये प्रतिदिन की दर से मजदूरी का भुगतान किया जाता था। केन्द्र सरकार ने नए वित्तीय वर्ष से मजदूरी की धनराशि में 13 रुपये का इजाफा करते हुए इसे 174 रुपये कर दिया है। बता दें कि जनपद में चार लाख जाबकार्ड धारक हैं। 

नियमानुसार मनरेगा के तहत पंजीकृत जाबकार्डधारक को साल में सौ दिन का रोजगार हर हाल में उपलब्ध कराया जाना चाहिए। अभी तक मनरेगा मजदूरों को 161 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी दी जा रही थी। एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए वित्तीय वर्ष से जिले के मनरेगा मजदूरों को एक सौ चौहत्तर रुपये प्रति दिन के हिसाब से मजदूरी मिलने लगेगी। इस लिहाज से एक वर्ष में प्रति मजदूर को तेरह सौ रुपये अतिरिक्त मिलेगें। इसके लिए भारत सरकार की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। प्रदेश सरकार की ओर से अभी शासनादेश नहीं जारी किया गया है। हलांकि विभागीय अधिकारी बताते है नए वित्तीय वर्ष से मजदूरों की मजदूरी का भुगतान बढी हुई दरों के हिसाब से किया जाएगा।

पड़ोसी राज्य की अपेक्षा यूपी की ज्यादा बढ़ी मजदूरी

पड़ोसी प्रदेशों की अपेक्षा केन्द्र उत्तर प्रदेश का खास ख्याल रख रहा है शायद यही वजह है कि उत्तर प्रदेश में जहां 174 रुपये मजदूरी निर्धारित की गई है वहीं पड़ोसी राज्य बिहार में 167 रुपये ही मजदूरी निर्धारित की गयी है। पहले के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले साल बिहार के मजदूरों की मजदूरी यूपी के जाबकार्ड धारकों से ज्यादा बढ़ाई गई थी। इस बार सबसे ज्यादा मजदूरी हरियाणा राज्य के मजदूरों को मिलेंगी। यहां प्रति जाबकार्ड 259 रुपये मिलेंगे। सबसे कम मजदूरी वाले राज्यों झारखंड 167 रुपये, अरुणाचल प्रदेश 172 रुपये और जम्मू—कश्मीर 173 रुपये है।  

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