ज़िद हो तो इस महिला सरपंच जैसी

Deepak AcharyaDeepak Acharya   15 April 2017 10:15 AM GMT

ज़िद हो तो इस महिला सरपंच जैसीज़िद हो तो बड़े से बड़े काम भी आसानी से हो जाते हैं।

ज़िद हो तो बड़े से बड़े काम भी आसानी से हो जाते हैं। पंजाब के पठानकोट जिले के ब्लॉक घरोटा में एक गाँव है गुजरात। भारत के अन्य गाँवों की तरह ये भी एक ऐसा गाँव हैं जहाँ औपचारिक शिक्षा के लिए स्कूल जरूर हैं, प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं भी हैं लेकिन कई मामलों में ये गाँव अब तक पिछड़ा हुआ है। इस पिछड़ेपन की एक मुख्य वजह स्थानीय लोगों का खुले में शौच जाना था। खुले में शौच करना इस इलाके में आम बात हुआ करती थी।

पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही खुले में शौच की सोच नें स्थानीय लोगों को इसका आदी बना दिया था। वर्षों से गुजरात गाँव की इस पुरानी दकियानुसी सोच को बदलने और स्वच्छता की बात करने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखायी तो यहाँ की सरपंच नीरज सैनी ने हिम्मत जुटाकर खुद को आगे खड़ा किया और एक जोरदार अभियान चला दिया। ये अभियान था गाँव को स्वच्छ बनाना, सबको स्वच्छता का पाठ पढ़ाना और पूरे गाँव को खुले में शौच से मुक्ति दिलाना।

सुबह शाम ग्रामीण महिलाओं से मिलकर नीरज ने उन्हें खुले में शौच जैसी आदतों के दुष्प्रभावों को समझाना शुरू किया। नारी अस्मिता और स्वच्छता से जोड़ते हुए इस मुद्दे पर इन्होंने गाँव में खुलकर बहस शुरू की और इस बहस में हर किसी को आमंत्रित किया और देखते ही देखते सारा गाँव खुले में शौच से मुक्त हो गया। नीरज के नेतृत्व में स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को संचालित करने का बीड़ा उठाया गया और तमाम जरूरतमंद लोगों के घर शौचालयों का निर्माण भी कराया गया।

गाँव के बुजुर्गों और कई लोगों ने नीरज के फैसलों और सलाहों पर नकारात्मक दिखायी और शौचालय निर्माण को व्यर्थ का खर्च बताया। बावजूद इसके, नीरज ने तमाम अवरोधों के बावजूद अपनी जिद के साथ शौचालय निर्माण का कार्यक्रम जारी रखा। ईंटें, रेत और सीमेंट की व्यवस्था भी इन्हीं सरपंच ने करवाई। ग्रामीणजनों द्वारा शौचालय बनाने के खर्च को वहन ना कर पाने की स्थिति में नीरज ने स्वयं अपनी पंचायत और अपने खुद के खर्च से लोगों के घरों में शौचालय तैयार करवाया और लोगों को एक उपाय दिया कि जब सरकार से उन्हें आर्थिक मदद मिलेगी तो वे इस खर्च को चुका दें।

लोगों को ये बात जम गयी और देखते ही देखते उन सभी घरों में शौचालय बन गए जिनके घरों में शौचालय नहीं थे और देखते ही देखते खुले में शौच का किस्सा खत्म होता गया। राज्य सरकार ने गुजरात गाँव को खुले में शौचमुक्त घोषित कर दिया है। गाँव में सरपंच नीरज के प्रयासों की सफलता के बाद एक निगरानी समिति भी बनायी गयी है जो ग्रामीण स्वच्छता पर लगातार नज़र रखे हुए हैं। गाँव की अपनी सहेलियों, महिलाओं और बुजुर्गों को समझाकर खुले में शौच प्रथा को बंद करवाने वाली महिला सरपंच नीरज सैनी आज अपने गाँव की लाड़ली है और पूरा गाँव इनका आभार मानता है।

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