Top

न थाना न कचहरी, ये महिलाएं खुद सुलझा लेती हैं अपने तमाम केस

Neetu SinghNeetu Singh   4 April 2017 4:47 PM GMT

न थाना न कचहरी, ये महिलाएं खुद सुलझा लेती हैं अपने तमाम केसहर महीने की 21 तारीख को महिलाएं एक-दूसरे की तकलीफ में भी शामिल होती हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

बहराइच। जिला मुख्यालय से 40 किमी पश्चिम दिशा में शिवपुर ब्लॉक का खैरी बाजार का बगीचा महिलाओं के मिलने का एक स्थान बन गया है। हर महीने की 21 तारीख को महिलाएं न सिर्फ आपस में हंसी-ठिठोली करती हैं, बल्कि एक-दूसरे की तकलीफ में भी शामिल होती हैं।

बैठक में आई करीमन (50 वर्ष) का कहना है, “हमें चाहे जितना जरूरी काम हो, लेकिन महीने की 21 तारीख को हम इस बगीचे में जरूर आते हैं। मेरी शादी 11 साल की उम्र में हो गयी थी। तब हम अपने अब्बा को मना नहीं कर पाए थे। छह महीने पहले जब मेरे बेटे ने मेरी 15 साल की पोती की शादी तय कर दी और मुझे खबर हुई तो मैंने वो शादी रुकवा दी।” करीमन आगे बताती है "इस बैठक में मैं दो साल से आ रही हूं। मुझे यहीं से पता चला कि लड़की की शादी की उम्र 18 साल होती है।”

महिलाओं से संबन्धित सभी बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

करीमन पहली महिला नहीं हैं, जिन्होंने अपनी पोती की शादी रोकी हो। कई महिलाओं ने न सिर्फ अपने घरों की शादियों को रोका, बल्कि आस-पास होने वाली बेमेल शादियों को भी रोका है। महिला सामाख्या द्वारा शिवपुर ब्लॉक में अप्रैल 2014 से हर महीने की 21 तारीख को बगीचे में महिला मुद्दा बैठक होती है। इस बैठक में आस-पास के कई गाँव की महिलाएं आती हैं।

बैठक में आई सैलकुमारी कुमारी (30 वर्ष) बताती हैं, “मेरी ननद रामवती (28 वर्ष) की शादी 10 साल की उम्र में लखीमपुर में कर दी गयी थी। उनके पति ने वर्ष 2011 में दूसरी शादी कर ली। यहां दूसरी शादी करना आम बात है।” वो आगे बताती हैं, “हम लोगों को नियम-कानून का ज्ञान नहीं है। दूसरी शादी के बाद ननदोई मेरी ननद को मारने पीटने लगा। इसके बाद उसे मायके छोड़ गए।”

सैल कुमारी महिला मुद्दा बैठक में चार पांच महीने से आ रही थी। जब उसने यहां कई केस सुलझते देखे तो अपनी ननद की बात भी एक दिन रख दी। समूह संघ की 11 महिलाएं लखीमपुर गईं और वहां पर दोनों पक्षों का समझौता करा दिया गया है।

बैठक की इंचार्ज मंजू शुक्ला (27 वर्ष) बताती हैं, “जब भी महिला मुद्दा बैठक में कोई केस आता है तो दोनों पक्षों की बात सुनी जाती है। इसके बाद सुलहनामा कराया जाता है। तीन महीने तक केस का फॉलोअप किया जाता है। दूसरा पक्ष सूचना देने के बावजूद अगर उपस्थित नहीं होता है तो संघ की महिलाएं उनके घर जाती हैं।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

Next Story

More Stories


© 2019 All rights reserved.