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जल्द ही टैक्सियों में मिलेगी महिलाओं को सुरक्षा

Swati ShuklaSwati Shukla   17 April 2017 9:18 AM GMT

जल्द ही टैक्सियों में मिलेगी महिलाओं को सुरक्षामहिलाओं की सुरक्षा के लिए जल्द ही टैक्सियों में लाये जायेंगे नए नियम।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। टैक्सी से चलने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए महिला और बाल विकास मंत्रालय की ओर से कई उपायों को टैक्सी नीति के दिशा-निर्देशों में शामिल किया गया है।

सोशल मीडिया पर केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को टैक्सियों में महिलाओं के यौन उत्पीड़न के कई मामलों के बारे में सूचित किया गया, जिसके बाद ये सिफारिशें की गईं। इसके अलावा महिलाओं ने ट्विटर और फेसबुक पर अपनी मुश्किलें साझा की थीं। इसके बाद महिला और बाल विकास मंत्री ने इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए रेडियो टैक्सी सेवा प्रदाताओं के साथ बैठक की।

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उस बैठक के आधार पर मंत्री ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को उनके मंत्रालय द्वारा तैयार किये जा रहे नियामक दिशा-निर्देशों में आवश्यक सुरक्षा उपायों को शामिल करने के लिए पत्र लिखा था। महिला और बाल विकास मंत्री की सिफारिशों को नियामक दिशा-निर्देशों में शामिल करने की मंजूरी दे दी गई है। मेनका गांधी ने टैक्सियों में महिलाओं के लिए अधिक सुरक्षा उपाय करने संबंधी सिफारिशों को स्वीकार करने के लिए नितिन गडकरी का धन्यवाद किया है।

प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए नई टैक्सी सुरक्षा नीति जल्द ही लागू की जाएगी। इस नीति से महिलाओं को काफी लाभ होगा।
स्वतंत्र देव सिंह,परिवहन मंत्री, उत्तर प्रदेश

नई टैक्सी नीति में यह नियम

  • टैक्सियों में अनिवार्य रूप से जीपीएस पैनिक उपकरण लगे होने चाहिए।
  • महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए टैक्सी में सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
  • वाहन के फोटो और पंजीकरण संख्या के साथ चालक का पहचान पत्र भी टैक्सी में प्रमुखता से लगाया जाना चाहिए।
  • टैक्सी ऑपरेटरों और ड्राइवरों द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने पर उनसे कानून के अनुसार कड़ाई से निपटा जाना चाहिए।
  • यात्रियों की इच्छा पर ही सीट साझा की जानी चाहिए।

सीधे कर सकते हैं शिकायत

महिला यात्री टैक्सियों में सुरक्षा के संबंध में मेनका गांधी को सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी परेशानियां बताती हैं। महिला और बाल विकास मंत्री ने #HelpMeWCD नाम से हैशटैग शुरू किया है। इस पर उत्पीडन और हिंसा झेल रही कोई भी महिला या बच्चा ट्वीट कर सीधे अपनी समस्या बता सकता है।

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