नवजात शिशुओं की परवरिश में रखें इन बातों का ध्यान

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जीवन का पहला साल बच्चे के विकास के लिए बेहद अहम होता है। इस समय माता-पिता पर सबसे ज्यादा जिम्मेदारी आ जाती है। नवजात शिशु की परवरिश में इन बातों का ध्यान रखकर आप बेहतर पैरेंट्स बन सकते हैं---

मालिश करें

बच्चे की मालिश कब और कैसे की जाए, इस बात को लेकर कई बार मांए परेशान रहती हैं। शिशु को दूध पिलाने के बाद या उससे पहले मालिश ना करें। घी या बादाम तेल को हल्के हाथ से बच्चे के पूरे शरीर पर मलें। नहलाने से पहले मालिश करना अच्छा होता है।

ध्यान से नहलाएं

नवजात शिशुओं की त्वचा बेहद नाजुक होती है। बहुत ज्यादा देर तक पानी में रहने से वह सूख सकती है। ध्यान रखें कि पानी ज्यादा गर्म ना हो। शुरुआती तीन हफ्ते में गीले कपड़े से बदन पोंछना काफी है। अगर आप बेबी शैंपू का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो एक हाथ से बच्चे की आंखों को ढक लें। नहाने के बाद बच्चे बेहतर नींद सो पाते हैं।

आराम से सुलाएं

माता-पिता बच्चों को सुलाने से पहले उन्हें कपड़ों की कई परतें पहना देते हैं, खास कर रात को, वे उन्हें बेबी बैग में भी डाल देते हैं और उसके ऊपर से कंबल भी ओढ़ा देते हैं। बहुत ज्यादा गर्मी बच्चे के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।

कुदरत के साथ

बच्चों को जितना हो सके कुदरत के साथ जोड़ें। आज के हाई टेक जमाने में माता पिता बच्चों को मोबाइल, टेबलेट और टीवी के साथ ही बढ़ा करने लगे हैं। बच्चा जैसे ही समझने लगता है उसे मोबाइल खेलने को मिल जाता है। बच्चे को पार्क और हरी भरी जगहों पर घुमाएं।

रंगों के बीच

बच्चों के आसपास रंग होना अच्छा है। आठ से नौ महीने के होने पर बच्चे अलग अलग तरह के रंग, सुगंध, शोर और स्पर्श को पहचानने लगते हैं। यही उन्हें सिखाने का सही समय भी है।

खेल खेल में सिखाएं

बच्चे खेल खेल में नई चीजें सीखते हैं। सिर्फ वस्तुओं को पहचानना ही नहीं, बल्कि खुशी और गुस्से जैसे भावों को भी समझने लगते हैं। बच्चों से बात करते हुए मुस्कुराएं और उनकी आंखों से संपर्क बना कर रखें।

संकलन- श्रोती बाजपेई

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