ओडिशा की बीज रक्षक महिलाओं से सीखें भारतीय किसान

ओडिशा की बीज रक्षक महिलाओं से सीखें भारतीय किसानgaonconnection

ओडिशा ओडिशा के भीमदंगा गाँव की इन दिनों पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है और इसकी वजह भी बेहद ख़ास है। एक ओर जहां दुनियाभर के वैज्ञानिक आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर खेती को उन्न्त बनाने और बीजों के संरक्षण का काम कर रहे हैं वहीं ओडिशा में बीज रक्षक महिलाओं की एक ऐसी ब्रिगेड है जो बीजों के संरक्षण के काम को देसी तरीके से अंजाम दे रही है।

ओडिशा के भीमदंगा गाँव में 18 महिला बीज रक्षकों की एक टीम है जो अनाज, सब्जियों और फूलों के बीजों के संरक्षण का काम करती है और वो भी बिना किसी सरकारी मदद के। ये सभी 18 महिला बीज रक्षक 'चेतना ऑर्गेनिक सीड कंजर्वेशन प्रोजेक्ट के लिए काम करती हैं' जो ओडिशा भर में किसानों को ऑर्गेनिक खेती करने के साथ-साथ बीजों के सरक्षण के लिए प्रेरित करती है। 'चेतना ऑर्गेनिक सीड कंजर्वेशन प्रोजेक्ट' के तहत ओडिशा के 6 गाँवों में बीज बैंक बनाए गए हैं। इन बीज बैंकों में 50 से भी ज्यादा किस्मों के बीजों को संरक्षित किया गया है।

बीज के बदले बीज देने का नियम

'चेतना' ने गरीब किसानों को बीज मुहैया कराने के लिए खास मोड्यूल बनाया है। किसान 'चेतना' के जरिए चलाए जा रहे बीज बैंकों से अपनी ज़रूरत के हिसाब से बीज ले सकते हैं। महिला बीज संरक्षण ब्रिगेड भी इसमें उनकी मदद करती है। बस फर्क सिर्फ इतना है कि इन बीज बैंकों से बीज लेने के बाद किसानों को फसल तैयार होने के बाद बीजों के बदले बीज देने पड़ते हैं। बीज बैंक से एक किलो बीज लेने के बाद किसानों को डेढ़ से दो किलो बीज लौटाने पड़ते हैं। अब तक 600 से ज्यादा किसान 'चेतना' के बीज बैंकों से बीज लेकर अपनी खेती को बेहतर बना चुके हैं।

देसी तरीके से बनाए गए हैं बीज बैंक

बीज रक्षक महिलाओं ने चेतना की मदद से जो बीज बैंक तैयार किया है उसे देसी तरीके से बनाया गया है। बीजों को मिट्टी के पक्के बर्तनों में ठीक तरीक़े से सील बंद किया जाता है ताकि चूहे और कीड़े उसे नुकसान ना पहुंचा पाएं। बीज बैंकों के लिए पुरुष भी काम करते हैं लेकिन महिलाएं इस काम को बेहतर तरीके से कर पा रही हैं। 'चेतना' किसानों को जेनिटिकल मोडिफाइड बीजों से भी दूर रहने की सलाह देता है। ख़ासकर बीटी कॉटन जैसे बीजों से क्यों कि इस तरह के बीजों से सिर्फ़ एक बार ही बुआई मुमकिन है। और इससे खेतों को भी नुकसान पहुंचता है। बीज बैंकों में तमाम तरह के ऑर्गेनिक बीजों का भी भंडारण किया गया है कि जिसके लिए किसानों को कम कीमत पर ज्यादा पैदावार के साथ-साथ आगामी बुआई के लिए बीज भी खरीदने पड़ते हैं। 

10 साल पहले की गई थी 'चेतना' की स्थापना

'चेतना' का मुख्य लक्ष्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ बीजों के संरक्षण को बढ़ावा देना भी है ताकि ओडिशा ही नहीं देश के दूसरे किसान भी इस प्रक्रिया का फायदा उठा सकें और खेती के लिए उन्हें जेनेटिकली मोडिफाइड बीजों का इस्तेमाल ना करना पड़े। चेतना के संस्थापक अरुण अंबातीपुणी कहते हैं 'देश की 56% कृषि बारिश पर निर्भर है। अगर कभी बारिश अच्छी नहीं हुई तो किसानों को बड़ी तादात में नुकसान उठाना पड़ता है। और फिर अगली खेती के लिए उनके पास कुछ भी नहीं बचता। ऐसे में बीज बैंकों में मौजूद बीजों से किसानों को बड़ी मदद मिल जाती है।' आमतौर पर देखा जाए तो ओडिशा में कपास की खेती नहीं की जाती है लेकिन बीज बैंकों में मौजूद ऑर्गेनिक बीजों के चलते ओडिशा के किसान कपास की भी खेती करने लगे हैं। 

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