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तस्वीरों में देखिये बाढ़ से घिरी जिंदगी, यूपी में हालात बद से बद्तर 

तस्वीरों में देखिये बाढ़ से घिरी जिंदगी, यूपी में हालात बद से बद्तर यूपी में बाढ़ के हालात 

प्रमोद अधिकारी

लखनऊ। भारत के कई राज्य इस समय बाढ़ की समस्या से जूझ रहे हैं। देश के उत्तर पूर्वी राज्य असम में बाढ़ के कारण अब तक लगभग 59 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि नॉर्थ ईस्ट के सभी राज्यों को मिला दें तो अब तक कम से कम 85 लोग बाढ़ की वजह से जान गंवा चुके हैं।

एनडीआरएफ देश के कई राज्यों में आई बाढ़ से अब तक 1300 पीड़ित व्यक्तियों को रेस्क्यू कर चुकी है। मॉनसून को लेकर देश भर में 39 टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगाई गई है जो राहत और बचाव का कार्य कर रही है।

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यूपी के बाराबंकी के सिरौली गौसपुर तहसील के लगभग आधा दर्जन गाँव बाढ़ के पानी में समा चुके है। घाघरा नदी का जल स्तर दिनों दिन बढता ही जा रहा है, जिससे घाघरा के आस पास के गाँव के ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

गौसपुर तहसील के चरपुरवा, बेहटा, रायपुर मांझा व परसावल गाँव बाढ़ में समा चुके है। इन गाँवों में लगभग छह सौ परिवारों की ढाई हजार की आबादी इस गाँव में रहती थी जो आज बाढ़ के कारण अपना आशियाना छोड़ चुकी है।

गाँव के ग्रामीणों का कहना है कि खेती के जरिये ही अपने परिवार का भरण पोषण करते है। घाघरा नदी में हुयी कटान के चलते हम लोगों की धान व गन्ना एवं बाजरा आदि की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गयी है। यहां तक कि पशुवों को खिलाने के लिए चारा भी नहीं बचा है। ऐसे में ग्रामीणों के पास गाँव छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा है।

इसी के साथ अगर आप गोंडा जिले में आई बाढ़ का जिक्र करें तो करनैल गंज तहसील के भी कई गाँव इसकी चपेट में आ चुके है। गौरा सिघनापुर, नकहरा, काशीपुर, प्रतापपुर, घरकुइयाँ, पूरे अंगद व पूरे अजब गाँव के लगभग एक हजार परिवार घाघरा की चपेट में आ चुके है।

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अपनी इस दुर्दशा को लेकर ग्रामीण एल्गिन चरसडी को मुख्य वजह मानते है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर ये बाँध नहीं बना होता तो आज हम बाढ़ की चपेट में आने से बच जाते। दबी जुबान में ग्रामीण इस बाँध के निर्माण में हुए भ्रस्टाचार को भी इस बाढ़ के लिए जिम्मेदार मानते है।

इस मौके पर वहाँ बचाव दल NDRF की टीम भी उपस्थित थी, जिसमें बताया गया कि सीओ अलोक कुमार सिंह के नेतृत्व में यहाँ पूरी टीम काम कर रही है|

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