फर्जी साइन कराने के लिए मारा, अब जान की धमकी

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हथिका (कानपुर देहात)। एक रोजगार सेवक ने जब प्रधान के कहने पर फर्जी दस्तखत नहीं किए तो महिला प्रधान के पति ने उसे मारा-पीटा, पुलिस ने एफआईआर अपने हिसाब से लिखी और कंचन पिछले डेढ़ महीने से न्याय के लिए दर-दर भटक रही है।

कानपुर देहात जिले के मैथा ब्लॉक से चार किमी. दूर दक्षिण-पश्चिम स्थित हथिका गाँव में रोजगार सेवक कंचन (27 वर्ष) का आरोप है, “ग्राम प्रधान अल्का शुक्ला के पति कमलेश शुक्ला (38 वर्ष) मनरेगा में मजदूरों को फर्जी भुगतान करने के लिए दबाव बना रहे थे। जब मैंने साइन नहीं किया तो मेरे घर दो भाइयों राजीव शुक्ला (42 वर्ष) और मुकेश शुक्ला (35 वर्ष) के साथ आ धमके, और गाली-गलौज किया, मुझे मारा और कपड़े फाड़ दिए।

गाँव के लोग भी इन लोगों के डर से सामने नहीं आए।” कंचन की मुश्किल यहीं खत्म नहीं हुई, जब वह थाने में रिपोर्ट लिखाने गई तो थानेदार ने अपने हिसाब से रिपोर्ट लिखी, धाराएं वह लिखीं, जिसमें गिरफ्तारी तक नहीं हो सकती। मनरेगा घोटाले का जिक्र तक नहीं किया। “थानेदार ने कहा कि जो हम कह रहे हैं वह लिखो।” कंचन ने बताया।

आरोपियों पर कार्रवाई न होने से वह खुलेआम घूम रहे हैं वह कंचन के परिवार पर समझौता करने का दबाव बना रहे हैं। “प्रधान के पति कहते हैं कि अगर हम जेल जाएंगे तो तुम्हें समाज में मुंह दिखाने लायक नही छोड़ेंगे या तुम्हारा मर्डर करके ही जेल जायेंगे। प्रधान पक्ष के सहयोगी आये दिन मेरे भाई को फोन कर रहे हैं कि समझौता कर लो नहीं तो गाँव में रहना मुश्किल कर देंगे, ज्यादा तीन-पांच किया तो नौकरी से भी हाथ धोने पड़ेगे, “कंचन ने डरते हुए बताया।

वहीं इस बारे में जब कमलेश शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने सफाई दी, “कंचन ने खुद हमसे कहा कि हम फर्जी साइन कर रहे हैं ये बात तुम सेक्रेटरी को मत बताना और अगले दिन कंचन ने खुद ही यह बात पंचायत सेक्रेटरी को बता दी। कंचन के भाई इंद्रकुमार (27 वर्ष) ने गाली-गलौज की और तीनों बहनों ने मिलकर हमें मारा और झूठे आरोप में मुझे फंसा दिया।

कार्रवाई न करने के बारे में पुलिस के भी अपने ही तर्क हैं। शिवली थानाध्यक्ष शैलेन्द्र सिंह ने कहा, “जो धाराएं इस केस में लगी हैं, उसमें गिरफ्तारी संभव नहीं है। कोर्ट में रिपोर्ट दे दी गई है। वारंट के लिए अप्लाई कर दिया गया है, जैसे ही बयान हो जाएंगे, कार्रवाई शुरू हो जाएगी।” वहीं, मैथा चौकी इंचार्ज राकेश पांडेय की अलग ही दलील है, वह कहते हैं, “मुल्जिम पकड़़ना है कई बार दबिश दे चुके हैं पर मुल्जिम मौके से नदारद मिलता है।”

कंचन ने डीएम, एसपी से लेकर हर संबंधित अधिकारी के यहां चक्कर काटे लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। “मैं न्याय पाने के लिए दिन-रात एक कर दूंगी। मुझे अपनी जान की परवाह नहीं है, मुझे सिर्फ न्याय चाहिए। हम हर जगह लिखित में अर्जी लगा चुके हैं, पर अभी तक कहीं से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।” वह आगे कहती हैं, “चाहे जितना वक़्त लग जाए, चाहे जितने चक्कर दफ्तरों के काटने पड़े, मेरा परिवार भी मेरा साथ छोड़ दे तो भी मैं समझौता नहीं करूंगी, आखिरी सांस तक लड़ूंगी, अगर पुलिस ने पैसे नहीं खाए तो मुझे न्याय जरूर मिलेगा।”

नीतू सिंह 

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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