पीसीओएस से पीड़ित महिलाओ में हार्मोन्स की गड़बड़ी

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महिलाओं में होने वाली बीमारी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) अब केवल प्रजनन संबंधी बीमारी नहीं रह गई है। इसका संबंध शरीर की अंत:स्रावी ग्रंथियों व पाचन तंत्र से भी है।

यह बीमारी अब आम हो गई है। साथ ही इसके कारण और नतीजों को लेकर आए दिन नए तथ्य समाने आ रहे हैं, जिससे मरीज ही नहीं डॉक्टरों में भी भ्रम की स्थिति है।

इस बीमारी को लेकर देश भर में कोई एक सत्यापित रिपोर्ट नहीं है, इसलिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) को इस पर राष्ट्रीय स्तर पर शोध का प्रस्ताव दिया गया गया है, ताकि देशव्यापी स्तर पर स्थिति साफ हो सके और इसको लेकर सही ढंग से जांच व इलाज का प्रोटोकाल अपनाया जा सके। पीसीओएस महिलाओं में होने वाली हार्मोन संबंधी गड़बड़ी वाली बीमारी है।

पहले इसे केवल प्रजनन संबंधी विकार माना जाता था, लेकिन नए वैज्ञानिक तथ्यों से पता चला है कि यह मेटाबॉलिक गड़बड़ियों से भी संबंधित जीवन शैली से जुड़ी बीमारी है। पहले इसमें इंसुलिन का स्तर बहुत अधिक बढ़ा होता है। फिर जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है खून में इंसुलिन की मात्रा कम होने लगती है और मरीज को मधुमेह हो जाता है। 

महिलाओं की ओवरी (अंडाशय में) में सिस्ट या रसौली होना आम बात है। दुनिया भर में चार से दस फीसद महिलाएं इससे पीड़ित हैं, वहीं भारत में करीब 20 फीसद महिलाएं पीसीओएस का शिकार हैं। बढ़ती उम्र में शरीर में होने वाले हार्मोन संबंधी बदलाव में भी सिस्ट हो जाते हैं। केवल सिस्ट होने से दिक्कत नहीं होती, लेकिन अगर इसके साथ और दिक्कते हैं तो उसका समुचित इलाज व प्रबंधन जरूरी है।

कम से कम तीन लक्षण या व्यापक जांच के बाद ही इलाज की रणनीति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस बीमारी में माहवारी में अनियमितता, भारी रक्तस्राव,मोटापा, गर्दन और त्वचा पर काले निशान, शरीर पर बाल और बांझपन जैसे लक्षण आम हैं। भारत में हर चौथी-पांचवीं महिला इस बीमारी से पीड़ित है।

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