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प्यास क्या है इस तस्वीर से समझिए...

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रांची। झारखंड के बोकारो ज़िले से आई ये तस्वीर बदलत इंडिया और शाइनिंग इंडिया जैसे जुमलों के मुंह पर बहुत बड़ा तमाचा है। झारखंड को अलग राज्य का दर्जा मिले 16 साल हो चुके हैं लेकिन आज भी झारखंड के कई ज़िलों में लोगों को पीने का साफ़ पानी मयस्सर नहीं है।

ये तस्वीर बोकारो के झगराहीबाद गाँव की है। ये गाँव चंद्रपुरा-धनबाद रूट पर है। राजधानी रांची से इस गाँव की दूरी महज़ 180 किलोमीटर है। आज भी यहां के लोग पीने के पानी के लिए इस रूट पर चलने वाले रेत से लदे ट्रकों से बूंद-बूंद गिरते पानी पर ही निर्भर हैं। ये पानी बेहद गंदा है बावजूद इसके झगराहीबाद के लोग इस पानी को पीने के लिए मजबूर हैं।

इस पानी में तमाम तरह की अशुद्धियां हैं जिसे पीने के बाद यहां के लोग पेट की गंभीर बीमारियों का शिकार हो सकते हैं लेकिन उन्हें इस बात की कतई फिक्र नहीं। प्यास बुझाने का ज़रिया सिर्फ़ रेत से भरे ये ट्रकभर हैं। अगर दिन में इन ट्रकों पर लदी रेत से रिसता पानी नहीं जुटाया तो अगले दिन तक पीने के पानी के लिए तरसना पड़ेगा।

रिपोर्टर - अंबाती रोहित

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