बजट, नई बोतल में पुरानी शराब जैसा: कांग्रेस

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार न्यू इंडिया की बात कर रही है, जबकि बजट में कोई नई पहल नहीं की गई है।

बजट, नई बोतल में पुरानी शराब जैसा: कांग्रेस

लखनऊ। कांग्रेस ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शुक्रवार को पेश बजट को नई बोतल में पुरानी शराब करार दिया है। कांग्रेस ने दावा किया कि इसमें कुछ भी नया नहीं है और सिर्फ पुराने वादों को दोहराया गया है।

लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ''इसमें कुछ भी नया नहीं है। पुरानी बातों को ही दोहराया गया है। यह नयी बोतल में पुरानी शराब जैसी है।''

उन्होंने कहा, वे न्यू इंडिया की बात कर रहे हैं, जबकि कोई नई पहल नहीं की गई है। पेट्रोल और डीजल पर उप कर लगा दिया गया। वे एक ऐसे भारत को पेश कर रहे हैं जो सबके लिए हसीन ख्वाब जैसा है, लेकिन हकीकत में कृषि, अर्थव्यवस्था और अन्य दूसरे क्षेत्रों को लेकर जो पहले वादे किए गए थे उसमें कुछ नया नहीं किया गया।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा ने कहा कि इस बजट में आम आदमी के लिए कुछ नहीं है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, गाँव, ग़रीब व किसान हाशिये पर हैं। क्या सिर्फ शब्दों से कृषि संकट हल होगा?

उन्होंने लिखा, "न किसान की आय दोगुनी करने का रास्ता, न न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) का वादा, अकाल-सूखे से लड़ने का कोई उपाय, न ग्रामीण अर्थव्यवस्था में संकट का सुधार। केवल डीज़ल पर दो रुपये का अतिरक्ति भार।"

राजद के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने कहा कि बजट में लुभावने नारों और नामों वाली योजनायें ही सुनाई दीं। उन्होंने कहा कि सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण से ही पता चल गया था कि सरकार ने अर्थव्यवस्था में गलत बीमारी की पहचान की, ऐसे में गलत इलाज होना तय था। झा ने कहा, इस बजट में आर्थिक गति को दुरुस्त करने के लिये सिवाय प्रतीकों के कोइ रोडमैप नहीं है। सरकार ने यह बजट चुनिंदा समृद्ध घरानों को और अधिक समृद्ध करने के लिये बनाया है। सब कुछ निजी हाथों में सौंपना उचित नहीं है, जनता इसका प्रतिकार करेगी।

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, बजट निजी क्षेत्र को बढ़ावा देकर कुछ बड़े पूंजीपतियों की ही मदद करने वाला है। जिससे दलितों व पिछड़ों के आरक्षण की ही नहीं बल्कि महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, किसान और ग्रामीण समस्या और भी जटिल होगी। देश में पूंजी का विकास भी इससे संभव नहीं है।

मायावती ने ट्वीट कर कहा, भाजपा की केन्द्र सरकार द्वारा बजट को हर मामले में हर स्तर पर लुभावना बनाने की पूरी कोशिश की गई है। लेकिन देखना है कि इनका यह बजट जमीनी हकीकत में देश की आमजनता के लिए कितना लाभदायक सिद्ध होता है। जबकि पूरा देश गरीबी, बेरोजगारी, बदतर शक्षिा और स्वास्थ्य सेवा से पीड़ित व परेशान है।

सपा के राज्यसभा सदस्य चौधरी सुखराम सिंह ने इसे पूजीवादी बजट बताते हुए कहा कि इसमें समाज के शोषित और वंचित वर्गों की उपेक्षा कर सिर्फ पूंजीपति वर्ग की सहूलियतों का ख्याल रखा गया है। उन्होंने कहा कि बजट में पेट्रोल डीजल की कीमत में ढाई रुपये तक के इजाफे से मंहगाई चरम पर होगी और इसका सीधा असर आम आदमी पर पडे़गा।

एनसीपी अध्यक्ष और पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा कि वित्त मंत्री ने बजट में कृषि क्षेत्र के लिये जीरो बजट खेती की बात जरूर कही लेकिन देश भर में कर्ज के बोझ तले दबे किसानों को कोई राहत या समाधान नहीं दिया। पवार ने कहा कि बजट में किसानों की आय दोगुना करने की ठोस कार्ययोजना पेश की जानी चाहिये थी।

वामदलों ने भी बजट को जनविरोधी बताते हुये कहा है कि इससे सिर्फ धनी वर्ग की बेहतरी के उपाय किए गए है। माकपा पोलित ब्यूरो की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि चुनाव के बाद पेश बजट सरकार की ओर से भारतीय उद्योगपतियों के लिये चुनावी मदद की वापसी का तोहफा है।

भाकपा ने कहा कि इस बजट में जनता से जुड़े मुद्दों की पूरी तरह से अनदेखी किये जाने के कारण बजट ने जनसामान्य को निराश किया है। आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने शुक्रवार को संसद में पेश किये गये आम बजट को जनसामान्य, खासकर महिलाओं, युवाओं, किसानों और उद्यमियों की परेशानियों को बढ़ाने वाला बताते हुये कहा है कि यह करों के भार से भरा हुआ बजट है।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने आम बजट को किसान, मजदूर, युवा और महिला विरोधी बताया है। कुशवाहा ने कहा कि बजट में किसानों को आर्थिक संकट से उबारने और आय दोगुना करने का बजट में कोई जिक्र नहीं किया गया है।


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