रोशनलाल ने गन्ने की कलम बनाने वाली मशीन का किया आविष्कार

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नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के मेख गाँव में रहने वाले रोशनलाल विश्वकर्मा ने पहले नई विधि से गन्ने की खेती कर उसकी लागत को कम और उपज को बढ़ाने का काम किया, उसके बाद ऐसी मशीन को ईजाद किया जिसका इस्तेमाल गन्ने की ‘कलम’ बनाने के लिए आज देश में ही नहीं दुनिया के दूसरे देशों में किया जा रहा है।

रोशनलाल के परिवार का पुस्तैनी धंधा खेती था। खेती के दौरान उन्होंने देखा कि गन्ने की खेती में ज्यादा मुनाफा है। लेकिन तब किसानों को गन्ना लगाने में काफी लागत आती थी इसलिए बड़े किसान ही अपने खेतों में गन्ने की फसल उगाते थे। तब रोशनलाल ने ठाना कि वो भी अपने दो-तीन एकड़ खेत में गन्ने की खेती करेंगे इसके लिए उन्होंने नए तरीके से गन्ना लगाने का फैसला लिया।

रोशनलाल बताते हैं, “मेरे मन में ख्याल आया कि जैसे खेत में आलू लगाते हैं तो क्यों ना वैसे ही गन्ने के टुकड़े लगा कर देखा जाए।” उनकी ये तरकीब काम आई और लगातार दो सालों ने उन्होंने यही किया। इस तरह उन्होंने कम लागत में ना सिर्फ गन्ने की कलम तैयार की बल्कि गन्ने की पैदावार आम उपज के मुकाबले 20 प्रतिशत तक ज्यादा हुई।

रोशनलाल ने देखा कि हाथ से गन्ने की कलम बनाने का काम काफी मुश्किल है। इसलिए उन्होंने कृषि विशेषज्ञों और कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह लेकर एक ऐसी मशीन ‘शुगरकेन बड चिपर’ बनाई जिसे हाथ से चलाया जा सकता था। इससे एक घंटे में 300 से 400 गन्ने की कलम बनाई जा सकती है। रोशनलाल को खेती के क्षेत्र में आविष्कार करने के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले हैं। 

स्रोत:इंटरनेट

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