सावधान! फिर आ गया आग का मौसम

सावधान! फिर आ गया आग का मौसमGaon Connection

लखनऊ में 14,000 लोगों पर एक दमकलकर्मी, दो लाख लोगों पर एक दमकल गाड़ी

लखनऊ। गोमतीनगर इलाके में शनिवार शाम सब्ज़ी मण्डी में भीषण आग लग गई, सैकड़ों का सामान खाक हो गया। मण्डी के बिलकुल बगल में पेट्रोल पंप भी था जहां आग पहुंच सकती थी लेकिन दमकल कर्मियों ने हादसा और बड़ा होने से रोक लिया। लेकिन हर बार स्थिति इतनी जल्दी काबू में नहीं आ पाती।

हाल ही में कानपुर के परेड ग्राउंड में लगी भीषण आग में 14 साल की बच्ची की मौत हो गई, तो गोंड़ा के तेलियनपुरवा गाँव में दो साल की मासूम जिंदा जल गई। पिछले एक हफ्ते में राजधानी व आस-पास आग से मरने वालों की संख्या एक दर्जन को पार कर गई है। इन सभी घटनाओं में आग का काबू में न आ पाना बड़ी वजह बनी, जो इस ओर इशारा करती है कि क्या प्रदेश में दमकल कर्मियों की संख्या और संसाधन पर्याप्त हैं।

प्रदेश की राजधानी लखऩऊ का ही उदाहरण लें लखऩऊ में 24 दमकल की गाड़ियां हैं और कुल कर्मचारियों की संख्या 313 है। ज़िले की 46 लाख की आबादी के हिसाब से हर साढ़े चौदह हज़ार लोंगों पर केवल एक दमकल कर्मी और लगभग दो लाख लोगों पर एक आग बुझाने वाली गाड़ी है।

आग से जानमाल और नुकसान की शहरों में बड़ी वजहें संकरी गलियां, अवैध कॉलोनियां और अतिक्रमण हैं। "अमीनाबाद जैसी बाज़ारों और अनाधिकृत कॉलोनियों में हमेशा दिक्कत आती है। काबू कैसे पाएं जब दमकल कर्मी ही नहीं पहुंत पाते,” लखऩऊ के मुख्य अग्निशमन अधिकारी .... पांडे ने गाँव कनेक्शन को बताया।

साल भर में होने वाली आग की घटनाओं में से साठ प्रतिशत आग की घटनाएं मार्च से जून माह के बीच में होती हैं। वर्ष 2015 में 30 हजार छोटी बड़ी आग की घटनाओं की सूचना मिली थी।

उत्तर प्रदेश शासन का कहना है कि गर्मियों में बढ़ने वाली आग के लिए तैयारी रखी जा रही है। "गर्मी के मौसम में बढऩे वाली आग की घटनाओं के लिए प्रदेश भर में 75 अस्थाई फायर स्टेशन भी बनाए जाएंगे। इन अस्थाई फायर स्टेशन से आग की घटनाओं को कम करने में मदद मिल सकेगी।" आलोक प्रसाद, महानिदेशक फायर, उप्र ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा।

चंद मिनटों में खाक हुई पत्रकारपुरम मंडी

लखनऊ। गोमतीनगर इलाके में शनिवार को शाम करीब भीषण आग लग गई। आग से केंद्रीय विद्यालय के सामने स्थित मंडी पूरी जलकर खाक हो गई। दमकल की 14 गाड़ियां तीन तरफ से आग बुझाने में जुटी थीं। गनीमत रही कोई हतागत नहीं हुआ लेकिन लाखों का माल जलकर खाक हो गया।

पत्रकारपुरम में विजयश्री नाम की बिल्डिंग है, जिसमें एक्सिस बैंक और ओरासिस ब्यूटी पार्लर समेत कई बड़े ऑफिस हैं। इसके पीछे स्थित फल, किराना, सब्जी आदि की मंडी है। इसी बिल्डिंग में छत के ऊपर बिल्डिंग का काम चल रहा था। उसे से निकली चिंगारी से आग लगना बताया जा रहा है। विजय श्री बिल्डिंग और मंडी से सटा पेट्रोल पंप है। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और दमकल में हड़कंप मच गया।

गनीमत रही पेट्रोल पंप के कर्मचारियों ने आग लगते ही उस पर काबू पाने की कोशिश शुरू कर दी और दमकल कर्मचारियों ने भी कोशिश करके आग पेट्रोल पंप तक पहुंचने नहीं दी। आग बुझती देख छत से नीचे उतरे पेट्रोल पंप के कर्मचारी प्रकाश से बताया, “भगवान का शुक्र था बस बच गए। पंप पर भारी मात्रा में पेट्रोल-डीजल था अगर कुछ होता तो बड़ा हादसा हो जाता।” हालांकि लोगों की भीड़ और ट्रैफिक के चलते गाड़ियों को मौके तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

लखनऊ के मुख्य अग्निशमन अधिकारी एबी पांडेय बताते हैं, “पत्रकारपुरम की सूचना मिलते ही हम तुरंत पहुंच गए थे। हमारी सारी गाड़ियां और पहले पहुंच जातीं। लेकिन सड़क पर लोग दमकल को जगह नहीं देते हैं। लोगों में आग की भयावता और उसके परिणामों की समझ नहीं है।”  विजय श्री बिल्डिंग के पास होटल चलाने वाले प्रकाश (50 वर्ष) बताते हैं, “आग सबसे पहले मंडी में स्थित रुई की दुकान में लगी थी तो जाहिर सी बात है ऊपर बिल्डिंग करने के दौरान ही चिंगारी गिरी होगी।”

आग की चपेट में आने से मंडी की 100 से ज्यादा अस्थाई दुकानें जलकर खाक हो गईं। आग बुझाने और बीच-बीच में अपना सामान समेटते मंडी के दुकानदार राजेश मौर्या (35 वर्ष) ने बताया, “सब इस बिल्डिंग वाले की गलती है। हमारा लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।”

आग की सूचना पर कुछ ही देर में दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई थीं, लेकिन आग बेकाबू होते देख शहर के साथ ही बीकेटी, सरोजनीनगर दमकल केंद्रों के साथ ही टाटा की गाड़ी भी बुलानी पड़ी। आग बुझाने में लगे कर्मचारियों को आग बुझाने के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दमकल की गाड़ी के एक ड्राइवर ने नाराजगी जताते हुए कहा, “लोगों की भीड़ आग बुझाने में बड़ी बाधा है। लोग फोटो खींचने और देखने के लिए अंदर तक आ जाते हैं अब हम आग बुझाएं या लोगों पर काबू पाएं। स्थानीय लोगों को समझना चाहिए।”

लिम्ब सेंटर में भी लगी आग

पत्रकारपुरम की आग अभी बुझ भी नहीं पाई थी कि वजीरगंज में स्थित लिम्ब सेंटर में आग लग गई। आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर दमकल की चार गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। आग लगने से जनहानि तो नहीं हुई लेकिन लाखों रुपए का सामान जलकर खाक हो गया।

दमकल गाड़ियों में लगेगा जीपीएस सिस्टम

आग की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए दमकल गाडिय़ों को अपडेट किया जाएगा। प्रदेश में 65 दमकल गाड़ियों में जीपीएस सिस्टम लगाए जाएंगे। जीपीएस से लैस दमकल गाड़ियां कंट्रोल रूम से चौबीस घंटे जुड़ी रहेंगी।

आग की सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम घटनास्थल से सबसे नजदीक की दमकल गाड़ी को आग की सूचना देगा। इससे कम समय में दमकल गाड़ी घटनास्थल पर पहुंच सकेगी। विभाग का मानना है इससे कम समय में घटनास्थल पर पहुंचने से आग से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा। डीजी फायर आलोक प्रसाद ने बताया कि आग की बढ़ती घटनाओं पर रोक लगाने के लिए अग्रिशमन विभाग जागरूकता अभियान चला रहा है।

कागजों में आपदा प्रबंधन समितियां

केंद्र सरकार ने गुजरात के भुज व महाराष्ट्र के लातूर में आए भयानक भूकंप व 2004 की सुनामी में जन-धन की व्यापक हानि के बाद 2005 में आपदा प्रबंधन अधिनियम बनाया था। लेकिन यह व्यवस्था सिर्फ बड़ी आपदाओं के दौरान नजर आती है। बाढ़ और आग आदि के दौरान पूरी व्यवस्था कागजी लगती है। प्रदेश स्तर पर सीएम, जिले पर डीएम और ग्राम पंचायत में प्रधान इसके मुखिया होते हैं। पंचायत में प्रधान की जिम्मेदारी होती है कि पंच और गांव के कुछ युवकों को समिति में शामिल करे और उन्हें प्रशिक्षण दिलाए लेकिन जमीन पर कहीं भी ऐसा नहीं है। अगर गांव के लोग जागरूक हों तो आग जैसी विपदा को दौरान नुकसान को कम किया जा सकता है।

जान और माल पर भारी पड़ी आग

लखनऊ। अमीनाबाद की मुमताज मार्केट, मवैया के पास झुग्गियों के साथ ही लखनऊ में आग की इस वर्ष कई घटनाएँ हो चुकी हैं। अकेले बीकेटी दमकल केंद्र पर 2016 में 47 मामले आए हैं। 

अस्ती गाँव से पहले लखनऊ जिले के भाखामऊ में भीषण आग लगी थी। इस आग में सोलह लोग बुरी तरह झुलस गए और एक मासूम बच्ची िज़दा जल गयी।

कानपुर के साथ ही राजधानी के पास सीतापुर और गोंडा में कई गांव खाक हो चुके हैं। इऩ सभी जगहों पर दमकल की गाड़ियां पहुंची लेकिन जब तक देर हो चुकी थी। हालांकि इऩ गाड़ियों ने आग से दूसरे घरों, गांवों और फसलों को जरूर बचा लिया। उन्नाव जिले में हाईंटेशन तारों की संख्या काफी ज्यादा है इसलिए आए दिन फसलों में आग लगने की ख़बरें आती रहती हैं। उन्नाव के एसएसओ जेपी सिंह बताते हैं, ‘’अभी से 20-30 कॉल आ रही हैं आग लगने की। पिछले वर्ष 447 वारदातें हुईं थीं। कॉल आते ही हम लोग एक्टिव हो जाते हैं।’’

आग की घटनाओं को रोकने के लिए लगातार लोगों को जागरुक किया जाता है। पहले अप्रैल माह में आग की घटनाओं के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए अभियान चलाया जाता था लेकिन इस बार फरवरी माह में ही अभियान की शुरुआत की गई है। 

हालांकि जागरुकता अभियान और मॉक ड्रिल जैसी कवायदें सिर्फ शहरों में नजर आती हैं। गांवों के अधिकांश लोगों को न दमकल का नंबर तक पता नहीं होता। लखऩऊ में बक्शी का तालाब स्टेशऩ के प्रभारी उमाशंकर यादव बताते हैं,  “ हर वर्ष किसानों को घर, खेत, खलिहान को आग की आपदा से बचाने के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था है, जिसमें किसानों को आग लगने के कारण और उनसे बचाव संबंधी उपाय बताय जाते हैं। लेकिन, जागरूकता के अभाव के चलते लोगों की प्रशिक्षण में भागीदारी अभी कम है।‘’

श्रीवत्स अवस्थी/अरविंद शुक्ला

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