मनोवैज्ञानिक से सुनिए “कैसे बचाए अपने बच्चों को ब्लू व्हेल के चंगुल से”

मनोवैज्ञानिक से सुनिए “कैसे बचाए अपने बच्चों को ब्लू व्हेल के चंगुल से”फोटो साभार (फर्स्ट पोस्ट )

लखनऊ। ब्लू व्हेल गेम इन दिनों लोगों में एक चर्चा का विषय बना हुआ है। अभी तक इस गेम ने सिर्फ भारत के बाहर ही अपने खुनी पैर पसारे थे लेकिन इसने अब भारत में भी दस्तक दे दी है। बीतें दिनों कई ऐसी घटनाएं भारत में घटी जिसमें बच्चों ने खुद को चोटे पहुंचाई साथ ही कईयों ने तो खुद को ही ख़त्म कर लिया।

गाँव कनेक्शन ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए इस समस्या पर मनोवैज्ञानिक से भी जानने की कोशिश की, कि आखिर इन खतरनाक चीजों से आप अपने बच्चों को, खुद को बचाए तो कैसे?

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नेहा आनंद जो कि एक मनोवैज्ञानिक है साथ ही वो बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ में मुख्य मनोवैज्ञानिक सलाहकार के पद पर है उनसे हमने ब्लू व्हेल गेम से बच्चों को कैसे बचाया जाय साथ ही बच्चे क्यों इस गेम की तरफ खींचें चले जा रहे ये जानने की कोशिश की।

मनोचिकित्सक ने गाँव कनेक्शन को बताया कि अभी तक कानपुर (यूपी) से मेरे पास दो केस आये है जिनमें मैंने इस ब्लू व्हेल गेम के बारे में जांच की, मेरा मानना है कि ग्रामीण बच्चों से ज्यादा शहरी बच्चे इस ब्लू व्हेल गेम में ज्यादा लिप्त पाए जा रहे है। साथ ही आज कल के माता पिता इसके लिए दोषी है। शहर के बच्चों के पास मोबाइल है, टेबलेट है, लैपटॉप है जिससे वो माता पिता से दूर हो रहे है। बच्चों का ज्यादा वक्त अब इन्हीं कामों में बीत रहा है। पेरेंट्स बच्चों पर ध्यान नहीं दे पा रहे जिस कारण ऐसी घटनाएं सामने आ रही है।

शहरों में पिता के ऑफिस चले जाने के बाद माँ किटी पार्टी में चली जाती है जिसके बाद बच्चा घर पर अकेला हो जाता है। अब वो बच्चा न जाने कौन सी साईट देख रहा है, न जाने किन लोगों के साथ बाहर घूम रहा है। न जाने घर पर लैपटॉप या मोबाइल में कौन सा गेम खेल रहा है। इन सब बातों पर हमें ध्यान देना होगा।

ब्लू व्हेल खेलने वाले बच्चों में अचानक बदलाव आ जाते है। वो बदलाव किसी भी प्रकार का हो सकता है जिसमें बच्चा खुद को अकेले में एक कमरे में सीमित कर लेता है। खाना खाने का टाइम बदल गया, बच्चा चुप चुप सा रहने लगा। बच्चे के टीवी देखने का समय बदल गया, बच्चा सुबह सुबह उठ कर हॉरर मूवी देख रहा, ऐसे बदलाव आपको अगर अपने बच्चे में दिखते है तो आप उससे तुरंत बात करें, क्यों कि अगर आपने अपने बच्चे को समय नहीं दिया तो आपका बच्चा इन गेम्स की तरफ जल्दी आकर्षित हो जाता है।

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मोबाइल के प्ले स्टोर में आपको ब्लू व्हेल गेम कहीं नहीं मिलेगा, ये गेम डाउनलोड नहीं किया जाता है। इस गेम को सीक्रेट लिंक्स के माध्यम से लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर उन लोगों तक फैलाया जा रहा है जो अंदर से कमजोर होते है, वो जो इमोशनल होते है उन्हें टारगेट करके चिंहित किया जा रहा है। इस गेम को रशिया के एक आदमी ने बनाया था जो आज जेल में है। आपको बता दूं कि इस गेम को बनाने वाला भी मनोवैज्ञानिक था, उसने इस गेम को इसलिए बनाया क्यों कि उसका तर्क था कि दुनिया में बहुत बोझ है इसलिए लोगों को सुसाइड के लिए प्रेरित किया जाये ताकि दुनिया का भार कुछ कम किया जा सके।

ब्लू व्हेल से बच्चों को बचाने के उपाय

  1. छोटी उम्र के बच्चों को महंगें मोबाइल, टेबलेट न दें।
  2. माता पिता अपने बच्चों को बाहर ले जाएँ ताकि वो पार्क या कहीं खुली जगह पर खेल सकें।
  3. माँ-बाप अपने बच्चों पर ध्यान रखें कि उनका बच्चा मोबाइल पर कौन सा गेम खेलता है।
  4. अगर आपको अपने बच्चे के व्यवहार में कोई बदलाव दिखता है तो उसे आप तुरंत किसी अच्छे मनोवैज्ञानिक से मिलवायें।

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