जानिए संतरे के कुछ अनोखे गुणों के बारे में

Deepak AcharyaDeepak Acharya   7 Nov 2016 5:38 PM GMT

जानिए संतरे के कुछ अनोखे गुणों के बारे मेंजानिए संतरे के फायदे

संतरा कहने के लिए एक फल है लेकिन इसकी उपयोगिता कितनी ज्यादा है इसका अंदाजा भी लगा पाना आसान नहीं। अब तक लोग यही समझते थे कि संतरा "विटामिन सी" का एक अच्छा स्रोत है लेकिन पिछले एक दशक में जिस तरह से आधुनिक विज्ञान ने इस फल की उपयोगिता पर शोध करके परिणाम प्रस्तुत किए हैं, मुझे काफी उत्साहित करते हैं। विज्ञान की मानी जाए तो संतरे में कई तरह के रोगों के उपचार का गुण हैं। इस लेख के जरिये हम जानेंगे संतरे के ऐसे ही कुछ अनोखे गुणों के बारे में, जिन्हें अब आधुनिक विज्ञान भी मान रहा है।

तेजी से आधुनिकता की तरफ बढ रहे समाज में रोगों ने भी तेजी से पांव पसारने शुरु किए हैं और ऐसे में जल्द से जल्द ठीक होने की चाहत में हम अक्सर ऐसी दवाओं का सेवन कर जाते हैं जो तात्कालिक सेहत दुरुस्ती कर देती हैं लेकिन इनके दूरगामी परिणाम बेहद घातक साबित होते हैं। अक्सर जड़ी-बूटियों के विषय पर चर्चा होती है तो आमतौर पर हमारा ध्यान सीधे जंगलों की तरफ चला जाता है जबकि देखा जाए तो बहुतायत सी जड़ी बूटियाँ हमारे आसपास के परिवेश में ही मिलती है।

किचन की अलमारी में रखे मसाले हों या सब्जियां या टोकरी में सजे हुए फल, इन सब में खूब सारे औषधीय गुण हैं किंतु हमे इन गुणों की जानकारी नहीं या हम इसे समझना भी नही चाहते लेकिन खतरनाक और घातक रसायनयुक्त दवाओं के असर को देखते हुए हमें अतिउपयोगी फलों, सब्जियों और मसालों की जानकारी होना जरूरी है। आखिर क्यों ना हो? जब सारी दुनिया और आधुनिक विज्ञान हमारे हिन्दुस्तानी पारंपरिक दावों या हर्बल नुस्खों को प्रामाणिकता के साथ सिद्ध करने में तत्परता से लगा हुआ है। संतरा भी एक ऐसा फल है जिसके औषधीय गुणों और इसके प्रभावों को दुनिया भर के वैज्ञानिक तीखी नजरों से देख रहें है। चलिए जानते हैं इसके कुछ गुणों को और देखें आखिर क्या कहता है आधुनिक विज्ञान..

कोलेस्ट्राल

पारंपरिक ज्ञान के अनुसार संतरे का रस एक टॉनिक की तरह कार्य करता है और यह हृदय की सेहत के लिए अतिउत्तम उपाय है। नयी शोधें बताती हैं कि LDL- HDL कोलेस्ट्राल अनुपात को बेहतर बनाए रखने के लिए संतरे का रस (750 मिली) प्रतिदिन 2 महीनों तक पिया जाए तो बेहद असरकारक होता है।

हड्डियों की मजबूती

पारंपरिक हर्बल जानकार संतरे के जूस को हड्डियों में शक्ति या मजबूती प्रदान करने के लिए अतिउत्तम मानते हैं और इस बात की पुष्टी सन 2006 में ‘न्यूट्रिशन’ नामक वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट से होती है जिसमें कहा गया है कि संतरे का रस एण्टीओक्सीडेंट की तरह कार्य करता है और हड्डियों को मजबूती प्रदान करने के लिए मददगार होता है।

वजन कम करें

सन 2011 में न्यूट्रिशन रिसर्च में प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट के अनुसार संतरे का रस पीने से वजन कम करने में मदद मिलती है। इस विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार मोटापे से ग्रस्त बच्चों को प्रतिदिन संतरे का रस दिया गया तो आहिस्ता आहिस्ता देखा गया कि इनका वजन कम होने लगा। पारंपरिक हर्बल जानकारों का भी मानना है कि खट्टे संतरों का रस प्रतिदिन सवेरे दो चम्मच शहद के साथ लिया जाए तो यह वजन कम करने में सहायक होता है।

पथरी

मध्यभारत के ग्रामीण वैद्य और हर्बल जानकार पथरी रोग से परेशान रोगियों को संतरे का रस पीने की सलाह देते हैं। सन 2006 में "फाईटोटेरापिया" जर्नल में प्रकाशित शोध रिपोर्ट के अनुसार संतरे का रस किडनी में कैल्शियम के ओक्सेलेट्स को एकत्र होने नहीं देता जिससे पथरी होने की संभावनांए कम हो जाती है। एक अन्य अध्धयन के अनुसार संतरे का रस कैल्शियम ओक्सेलेट्स को तोड़ने में सहायक होता है। इन रिपोर्ट्स और पारंपरिक ज्ञान पर गौर करें तो साफ समझ पड़ता है कि पथरी के उपचार के लिए संतरा एक उत्तम उपाय साबित हो सकता है।

संतरे के छिलकों के भी हैं काफी फायदे

संतरे का छिल्का भी है एक कारगर औषधि

संतरे के छिल्के भी कई तरह के औषधीय गुणों को समाहित किए हुए हैं। पारंपरिक तौर पर संतरे के छिल्कों का इस्तमाल फ़ेसियल या अन्य कोस्मेटिक उत्पादों को तैयार करने में किया जाता है। संतरे के छिल्कों में पेक्टिन्स, फ़्लेवोनोएड्स जैसे नारिंजिन, हर्सपेरिडेन, पोलिमेथाक्सिफ़्लेवोन्स, क्वेर्सेटिन, रुटिन और डी-लिमोनेन जैसे रसायन होते हैं। जो संक्रामक सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोकने से लेकर रूम फ्रेशनर की तरह कार्य करते हैं।

आर्थरायटिस

सन 2010 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार संतरे के छिल्कों से प्राप्त तेल आर्थरायटिस के असर को कम करने में मददगार होता है। आदिवासी अंचलों में संतरे के छिल्कों को छांव में सुखा लिया जाता है और इसे किसी खाद्य तेल में तलकर छान लिया जाता है और इस तेल से जोड़ों पर मालिश की जाती है, माना जाता है कि यह दर्दनिवारक की तरह कार्य करता है।

कैंसर

छिल्कों से प्राप्त रसायनों का उपयोग कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने के लिए किया जा रहा है, कई शोधें बताती हैं कि इसके छिल्कों से प्राप्त रसायन कैंसररोधी होते हैं।

छिल्कों की सुगन्ध

संतरे की सुगंध एक रूम फ्रेशनर की तरह कार्य करती है। शोधों से प्राप्त जानकारियों के अनुसार संतरे में एंटीमाईक्रोबियल गुण होते है, इसकी सुगंध से सूक्ष्मजीवों को नाश हो जाता है।

क्या कहता है आदिवासी हर्बल ज्ञान

  • संतरा एक जबरदस्त एनर्जी देने वाला फल है। गर्मियों में लू लगने पर दिन में चार बार संतरे का रस देना बहुत अच्छा होता है। घमौरियों के इलाज के लिए डांग- गुजरात के आदिवासी संतरे के छिलकों को छांव में सुखाकर पाउडर बना लेते हैं और इसमें थोड़ा तुलसी का पानी और गुलाबजल मिलाकर शरीर पर लगाते हैं, ऐसा करने से तुरंत आराम मिलता है। भोजन करने के बाद यदि आधा गिलास संतरे का रस रोज लिया जाए तो पेट के अल्सर ठीक हो जाते हैं। छांव में सुखाये संतरे के छिलकों को बारीक पीस लें और घी के साथ बराबर मात्रा में मिलायें और इसे 1-1 चम्मच दिन में दो बार पीने से बवासीर में आराम मिलता है। संतरे के रस को गर्म करके उसमें काला नमक और सोंठ का पाउडर मिला लें, आदिवासियों के अनुसार ये अपचन और आमाशय संबंधित रोग में खूब फायदा देता है।

  • संतरे के रस में काला नमक और कुछ मात्रा में अदरक कुचलकर निकाले गए रस को भी मिलाकर अक्सर बच्चों को दिया जाता है, खास तौर से उस वक्त जब बच्चा बीमारी से उठता है। माना जाता है कि यह कमजोर शरीर में स्फूर्ति दिलाने का कार्य करता है। कुछ हर्बल जानकारों के अनुसार रात सोने जाने से पहले संतरे के 2 चम्मच रस में 2 चम्मच शहद मिलाकर चेहरे पर 20 मिनिट तक लगाए रखना चाहिए, बाद में साफ कपास को दूध में डुबोकर चेहरे की सफाई करनी चाहिए, ऐसा प्रतिदिन करा जाए तो चेहरे की सौंदर्यता को लेकर सकारात्मक परिणाम जल्द ही दिखने लगते हैं।
  • खट्टी गौती चाय बनाते समय आदिवासी चाय में संतरे के छिल्के डाल देते हैं और कुछ मात्रा नींबू रस की भी डाल दी जाती है। गाँव के बुजुर्गों से उनकी लंबी उम्र का राज पूछा जाए तो सीधा जवाब मिलता है, खट्टी गौती चाय। और मजे की बात यह भी है कि सदियों पुराने इस एंटी एजिंग फार्मुले को आदिवासी अपनाते रहें हैं और अब आधुनिक विज्ञान इस पर ठप्पा लगाना शुरु कर रहा है। नई शोधें बताती है कि हरी चाय और संतरे का मिश्रण उम्र के पड़ाव की प्रक्रिया को धीमा कर देता है, यानि आप इस चाय का प्रतिदिन सेवन करें तो अपने यौवन को लंबा खींच सकते हैं।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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