शौचालय के लिए किसी ने लिया कर्ज़ तो किसी ने बेचे जेवर

शौचालय के लिए किसी ने लिया कर्ज़ तो किसी ने बेचे जेवरgaonconnection

कन्नौज। जिले को एक वर्ष के भीतर खुले में शौच से मुक्त कराने का मिशन कई गाँवों में सिर चढ़कर बोल रहा है। गाँव के कुछ लोगों ने सरकारी अनुदान का मोह त्यागकर इज्जतघर (शौचालय) बनवाने के लिए जेवर ही बेच दिए। कुछ ने जेवर गिरवी रखे तो कई ने मवेशियों का बेचकर शौचालय का निर्माण कराया। कर्ज लेने की नजीर भी सामने आई है।

फिलहाल ऐसे उदाहरण वीवीआईपी जिले के छिबरामऊ और तालग्राम ब्लॉक क्षेत्र के कुछ गाँव में मिले हैं। अफसरों ने इनकी तारीफ ही नहीं की बल्कि ऐसे लोगों को सम्मानित करने का फैसला भी लिया है। कुछ दिनों पहले छिबरामऊ के गाँव शहजहांपुर निवासी दो महिलाओं को तत्कालीन डीएम अनुज कुमार झा और सीडीओ उदयराज यादव सम्मानित भी कर चुके हैं। इन महिलाओं ने गाँव को खुले में शौच से मुक्त ही नहीं कराया बल्कि शौचालय भी बनाए।

केस नंबर एक-विकास खंड छिबरामऊ की ग्राम पंचायत खल्ला रूपमंगद निवासी पुष्पा देवी पत्नी तुलाराम शाक्य गाँव की गरीब महिला हैं। सिर पर मकान की छत भी नहीं है। पेट का ऑपरेशन होने की वजह से पैसों की व्यवस्था नहीं थी। कान के कुंडल बेचकर इन्होंने शौचालय बनवा लिया है। अब उसका प्रयोग भी करने लगी हैं।

                                                               

केस नंबर दो-ब्लॉक तालग्राम क्षेत्र के रजलामऊ निवासी नसीरुद्दीन ने शौचालय बनवाने के लिए अपनी पत्नी के जेवर गिरवी रख दिए। ग्राम विकास अधिकारी गिरिजेश ने बताया, “ग्रामीण नसीरुद्दीन का कच्चा मकान है। सात-आठ हजार रुपए आभूषण को गिरवी रखकर मिले और उससे इज्जतघर बनवाया।” उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को खुले में शौच करने से होने वाली हानियां समझ में आने लगी हैं। घर की महिलाओं के सम्मान की बात भी दिल पर चोट करती है। ये सब ट्रिगरिंग से संभव हो रहा है। 

केस नंबर तीन-ग्राम पंचायत रायपुर में भगवानदास ने अपनी पत्नी के कुंडल गिरवी रख दिए। महेंद्र यादव ने बताया, “ग्रामीण गरीब हैं। इसके बाद भी उसने शौचालय का निर्माण कराया।” 

केस नंबर चार-खल्ला रुपमंगद की निवासी फूलनदेवी के घर पर शौचालय नहीं था। पति और परिवार ने कहा, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। बाद में उन्होंने अपने पति महावीर सिंह यादव और ज्येष्ठ से झगड़ा किया। कर्ज लेकर पांच दिन में शौचालय बनवा लिया। अब उसका प्रयोग भी होने लगा है। 

केस नंबर पांच-स्वच्छता दूत पूनम प्रजापति ने बताया कि खल्ला की मनोरमा छह बहने हैं। पांच बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है। मनोरमा के माता-पिता और भाई नहीं हैं। मनोरमा ग्रेजुएशन की छात्रा है। मजदूरी आदि से वह अपना खर्च चलाती है। ट्रिगरिंग का असर ऐसा हुआ कि खुद मजदूरी के पैसों से शौचालय बनाना शुरू कर दिया। 

ये केस भी बन रहे नजीर

खल्ला के राजकुमार पुत्र श्रीराम शौचालय का निर्माण करा रहे थे। बजट कम पड़ा तो उन्होंने अपनी दो बकरियां बेच दीं। श्रीकृष्ण पुत्र तुलाराम वर्मा बुजुर्ग हैं। उनके लड़के की तबीयत खराब रहती है। इसके बाद भी शौचालय का निर्माण करा लिया है। विधवा होते हुए भी रेशमा देवी पत्नी दुलारे जाटव ने किसी तरह रुपयों का जुगाड़ कर इज्जतघर बनवा लिया है। इसी तरह मीरा देवी पत्नी पूरनलाल जाटव ने अपने जेवर गिरवी रख शौचालय बनवाया है। 

आज कन्नौज में होंगे राजबब्बर और शीला दीक्षित

कन्नौज। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर 25 जुलाई को कन्नौज में होंगे। जिले की सीमा मेहंदीघाट पर आ रहे कांग्रेसियों का स्थानीय नेता स्वागत भी करेंगे। जिलाध्यक्ष विजय मिश्र ने बताया कि इस मौके पर एसवीएस इंटर कॉलेज के निकट जनसभा संपन्न होगी।

रिपोर्टर - अजय मिश्र

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