शिक्षामित्रों को सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत

शिक्षामित्रों को सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहतगाँव कनेक्शन

लखनऊ। यूपी के शिक्षामित्रों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। शिक्षामित्रों के समायोजन के मामले में हाईकोर्ट के 12 सितम्बर के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। अगली सुनवाई तक शिक्षामित्र अपने पदों पर बने रहेंगे। मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी 2016 को होगी।

कुछ दिनों पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाने के राज्य सरकार के फैसले को असंवैधानिक करार दिया था। कोर्ट ने इसके लिए सेवा नियमावली में किए गए संशोधनों व सभी सरकारी आदेशों को भी रद्द कर दिया था। फैसले में शिक्षामित्रों को दूरस्थ शिक्षा के तहत दिया गया प्रशिक्षण अवैध माना गया था। बिना टीईटी पास किए कोई भी प्राथमिक विद्यालय का अध्यापक नियुक्त नहीं किया जा सकता। न्यूनतम योग्यता तय करने या इसमें ढील देने का अधिकार केवल केंद्र सरकार को ही है। फैसले में कहा गया था कि राज्य सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत संविदा पर नियुक्त शिक्षामित्रों का समायोजन करने में अपनी विधाई शक्ति सीमा का उल्लंघन किया है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता तथा न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की तीन सदस्यीय पूर्ण पीठ ने शिवम राजन व कई अन्य की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिया था। 

सुप्रीम कोर्ट में मामले को लेकर शिक्षामित्रों ने याचिका दायर की थी। सोमवार को 1.72 लाख शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन और 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती की सुनवाई हुई। दोनों ही मामले टीईटी से जुड़े हैं। शिक्षामित्रों के मामले में जहां बगैर टीईटी सहायक अध्यापक बनाने को लेकर सुनवाई हुई, वहीं प्रशिक्षु शिक्षकों की टीईटी मेरिट पर भर्ती प्रकरण की अंतिम सुनवाई हुई। प्रशिक्षु शिक्षकों का मामला दिसम्बर 2013 से सुप्रीम कोर्ट में है। कोर्ट के निर्देश पर 58 हजार से अधिक प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती टीईटी मेरिट पर हो चुकी है। कोर्ट ने शिक्षामित्रों के मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। साथ ही कहा है कि अगली सुनवाई तक शिक्षामित्र अपने पदों पर बने रहेंगे।

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