सिर्फ पांच महीने में गाँव को कराया खुले में शौच से मुक्त

सिर्फ पांच महीने में गाँव को कराया खुले में शौच से मुक्तgaonconnection

मकरंदपुर बंथा (कानपुर देहात)। महिला प्रधान ने अपनी प्रधानी के करीब पांच महीने में ही गाँव को खुले में शौच मुक्त करा दिया। आज इस गाँव में कोई भी खुले में शौच में नहीं जाता है।

कानपुर देहात जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर मैथा ब्लॉक से पश्चिम दिशा में मकरंदपुर बंथा गाँव है। साल 2014 को इस गाँव को लोहिया समग्र ग्राम में शामिल किया गया था। इस साल गाँव की उमा देवी को गाँव वालों ने प्रधान बनाया। उमा देवी ने पांच महीने में ही गाँव को पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त करा दिया।

नवनिर्वाचित प्रधान उमा देवी (38 वर्ष) बताती है, “मैं पांच तक ही पढ़ी हूं, कोशिश करूंगी सबसे पहले गाँव में वो काम कराऊं जो हमारे यहां की पहली जरूरत हो। वो आगे कहती हैं, “जब गाँव की महिलाओं को खुले में शौच जाते देखती तो उनकी परेशानियों को बखूबी समझती थी, प्रधान बनने के बाद इसलिए मैंने इस काम को पहली प्राथमिकता दी।”

59193 ग्राम पंचायत वाले उत्तर प्रदेश में 2 करोड़ 87 लाख से ज्यादा घर हैं, इनमें वर्ष 1999 के बाद से अब तक 1 करोड़ 81 लाख 19 हजार घरों में शौचालय बनाए भी जा चुके हैं। पंचायती राज विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस वित्तीय वर्ष में 2 लाख 30 हजार घरों में शौचालय बनवाए गए हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी एक बड़ी आबादी खुले में शौच जाना पसंद करती है। मकरंदपुर बंथा गाँव की कुल जनसंख्या 1152 है।

यहां वोटरों की संख्या 620 है। शुरुआत में गाँव में 82 शौचालय बने थे और अब नए 37 और शौचालय बन गए हैं। गाँव के बबलू कुमार (25 वर्ष) घर में शौचालय बन जाने से काफी खुश हैं। बबलू कहते हैं, “हमारे गाँव में शौचालय बन गये हैं, तभी हम लोग खुले में शौच नहीं जाते हैं। शौचालय का ही इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि हमारे गाँव में लोहिया ग्राम की वजह से एक खास अभियान मई से जून तक चलाया गया।

वो आगे बताते हैं, “जिसमें ग्राम प्रधान का पूरा परिवार सुबह चार बजे से खुले में शौच जाने वाले लोगों से हाथ जोड़कर विनती करता कि आप लोग शौंचालय में जाओ, कुछ लोग मान जाते तो कुछ लोग नहीं मानते। अब धीरे-धीरे पूरा गाँव शौचालय में ही जाने लगा है।”

“शौचालय अभी भी बन रहे हैं, लेकिन बरसात की वजह से शौंचालय निर्माण काम में देरी हो रही है, जिन घरों में शौचालय नहीं बने है वो लोग अपने आस-पड़ोस के लोगों का शौचालय साझा कर रहे हैं।” ग्राम प्रधान उमा देवी ने बताया।

डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना साल 2012-13 से उत्तर प्रदेश में लागू की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य जिले के अति पिछड़े राजस्व ग्रामों का विकास कराना है। चयनित गाँवों में विद्युतीकरण, सड़कों और नालियों का निर्माण, शौंचालय निर्माण, शिक्षा, सेहत, पानी, सिंचाई, आवासहीन को आवास, तालाबों का निर्माण, आवासीय पट्टे का आवंटन, पेंशन योजना, रोजगार सहित 35 से अधिक योजनाओं को सीधे तौर पर अमल में लाने का निर्देश दिये गये हैं।

गाँव में अभी भी कुछ लोग खुले में ही शौच जाते हैं। जो खुले में शौच में जाते हैं वो अपने साथ में खुर्पी ले जाते हैं, जिससे अपने मल को मिट्टी से ढक देते हैं। इस गाँव में रहने वाली पुष्पा देवी (34 वर्ष) बताती है, “गाँव के कुछ बुजुर्ग अभी भी खुले में ही जाते हैं। वो कहते हैं जिन्दगी भर खेतों में गये, अब जरा सी कुठरिया में वो नहीं बैठ सकते। जब से शौचालय गाँव में बन गए, तबसे हमारे गाँव की सड़कें साफ दिखने लगी। अगर सभी लोग सहयोग करें तो ये सड़के हमेशा साफ रहेंगी।

स्वयं वालेंटियर: अंकित यादव

स्कूल: रामजानकी महािवद्यालय, बैरी असई,  कानपुर देहात।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

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