संसदीय समिति ने गंगा को प्रदूषित करने वाली इकाइयों के लक्ष्यों पर पुनर्विचार करने को कहा

संसदीय समिति ने गंगा को प्रदूषित करने वाली इकाइयों के लक्ष्यों पर पुनर्विचार करने को कहाgaoconnection, संसदीय समिति ने गंगा को प्रदूषित करने वाली इकाइयों के लक्ष्यों पर पुनर्विचार करने को कहा

नई दिल्ली (भाषा)। गंगा नदी के तट पर स्थित प्रदूषणकारी उद्योगों को शून्य तरल स्राव (जेडएलडी) करने वाली इकाई के रुप परिवर्तित करने के संबंध में तय समय सीमा को हकीकत से दूर बताते हुए संसद की एक समिति ने दो मंत्रालयों से इन लक्ष्यों पर फिर से विचार करने और यह सुनिश्चित करने को कहा है कि इसे मार्च 2017 तक हासिल कर लिया जाए।

वन एवं पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से जुड़ी प्राक्कलन समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि शराब उद्योग और कपड़ा उद्योग से गंगा में बिना शोधित गंदा जल के प्रवाह रोकने के लिए इन्हें शून्य तरल स्राव करने वाली इकाई के रुप में परिवर्तित करने का सितंबर 2016 और दिसंबर 2016 का लक्ष्य रखा गया है।

दूसरी ओर, जल संसाधन एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय ने शराब उद्योग और कपड़ा उद्योग से उत्सर्जन के संबंध में इन्हें शून्य तरल स्राव करने वाली इकाई के रुप में बदलने के लिए मार्च 2016 और मार्च 2017 की समससीमा तय की।

समिति ने कहा कि इस तरह से दो मंत्रालयों की ओर से दो अलग अलग समयसीमा तय की जा रही है। काजग और लुगदी उद्योग के संबंध में दोनों मंत्रालयों ने कहा कि इन्हें शून्य तरल स्राव करने वाली इकाई के रुप में परिवर्तित करने के लिए मार्च 2017 तक ऐसा करने की बात कही गयी है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘ समिति इन समयसीमा को हकीकत से दूर और अव्यवहारिक पाती है और यह सुनिश्चित करने को कहती है कि इसे मार्च 2017 तक हासिल कर लिया जाए।''     

विज्ञान प्रौद्योगिकी और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि नदियों की सफाई के लिए आवंटित धन अपर्याप्त है। समिति ने पर्यावरण मंत्रालय की इस बात के लिए खिंचाई की कि उसके पास जो संसाधन है, उनको भी ठीक ढंग से खर्च नहीं किया जा रहा है।

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