कठुआ गैंगरेप : पाकिस्तान में रेप के आरोपी को 39 दिनों में ही फांसी हो गयी थी, हमारे यहां अब चार्जशीट दाखिल हुई है

कठुआ गैंगरेप : पाकिस्तान में रेप के आरोपी को 39 दिनों में ही फांसी हो गयी थी, हमारे यहां अब चार्जशीट दाखिल हुई हैसोशल मीडिया पर फूट रहा लोगों का गुस्सा

जम्मू के कठुआ में बच्ची से हुई दरिंदगी को लेकर देश भर में नाराजगी है, सोशल मीडिया में लोग सरकार, समाज और सिस्टम सबको कोस रहे हैं। इसी बीच पाकिस्तान भी एक है, जो कई सवाल हमारे सिस्टम पर खड़े करती हैं...

ये भी पढ़ें- कठुआ गैंगरेप : बच्ची सुन्न पड़ी थी, और पुलिस वाले ने कहा, अभी मारो मत, मुझे भी रेप कर लेने दो

निरंजन मिश्रा फेसबुक पर लिखते हैं, "हमारे अखण्ड और अतुलनीय भारत के अभिन्न अंग जम्मू के कठुआ में जिस दिन 8 साल की आसिफ़ा को हवसी दरिंदों ने अगवा किया उससे ठीक एक दिन पहले यानि 9 जनवरी को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कसूर में 7 वर्षीय ज़ैनब का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ था, उसे भी एक हफ्ते पहले अगवा कर बलात्कार के बाद बुरी तरह से मार डाला गया था, लेकिन अभी जब भारत में आसिफ़ा के साथ हुई घटना ख़बर बन रही है, पाकिस्तान ज़ैनब के खूनी दरिंदे को फांसी की सजा सुना चुका है और वो भी 17 फरवरी को ही, जब भारत में आसिफ़ा का मामला क्राइम ब्रांच को भी नहीं सौंपा गया था।

हमारे अखण्ड और अतुलनीय भारत के अभिन्न अंग जम्मू के कठुआ में जिस दिन 8 साल की आसिफ़ा को हवसी दरिंदों ने अगवा किया उससे ठीक...

Posted by निरंजन मिश्रा on Wednesday, April 11, 2018

यह उसी पाकिस्तान का सच है, जिसे हम अपना दुश्मन मानते हैं, हां, है वो हमारा दुश्मन, उसके पाले गए आतंकी हमारे देश का चैन-ओ-सुकून छीनते हैं, हमारे कश्मीर पर उसकी बुरी नज़र है। लेकिन वो अपनी बेटियों पर उठने वाली हर बुरी आंख को निकाल बाहर फेंकने की कूवत रखता है और हम तो उस जम्मू-कश्मीर में भी मासूम बेटियों की रक्षा नहीं कर पा रहे, जिसे हम पकिस्तान की बुरी नज़र से बचाना चाहते हैं। काश इस मामले में हम पाकिस्तान से ही कुछ सीख लेते, जिसने अपनी बेटी पर जुल्म ढाने वालों का मज़हब नहीं देखा, नहीं देखा कि वो किस बिरादरी या किस सियासी दल से जुड़ा हुआ है, वहां दोष सिद्ध होने में राष्ट्रवाद आड़े नहीं आया, वहां के बलात्कारियों में हिम्मत नहीं है कि वे अपने सियासी आका की सरपरस्ती में पाकिस्तानी झंडे का जुलूस निकालकर खुद को बचाने सड़कों पर उतर आएं।

ये भी पढ़ें- उन्नाव गैंगरेप: सीबीआई तय करेगी विधायक की गिरफ्तारी होगी या नहीं

क्या हो गया हमारे भारत को, आज़ादी के बाद गलत रास्ते पर निकला पाकिस्तान अपनी बेटियों को इंसाफ दे रहा है और हमारी सरकारें उनके बलात्कारियों को अंजाम तक पहुंचाने में भी वोट का गणित देख रही हैं। क्या देश सिर्फ एक नक्से का नाम है, जहां की आधी आबादी बेख़ौफ़ सड़कों पर घूम नहीं सकती, उस समाज की उस देश की क्या सार्थकता है। पाकिस्तान एक महीने के भीतर अपनी मासूम बच्ची के बलात्कारी को सजा दिला देता है, वहां के लोग उस मासूम की तस्वीरों के साथ सड़कों पर उतरते हैं, वहां की संसद तक इसकी गूंज पहुंचती है और हम।

हमारे यहां तो अब भी बलात्कारी बेख़ौफ़ हैं, उन्हें अहसास है कि उनके समर्थन में खड़े एक खास सियासी धड़े से जुड़े लोग और वकीलों की फौज उनका बाल भी बांका नहीं होने देगी। हो सकता है वे बच जाएं, कोर्ट में वे जीत जाएं, पर अफ़सोस कि नैतिकता और ज़हनियत के मामले में हम अपने पड़ोसी पाकिस्तान से हार जाएंगे।

ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट में होगी उन्नाव रेप केस की सुनवाई, पिता की मौत की भी सीबीआई जांच की मांग

अरविंद शुक्ला ने लिखा है कि ऐसे नरपिशाचों के लिए फांसी कम होगी, कोई और सजा मिले, समर्थन करने वालों का सामाजिक बहिष्कार हो, सबको जेल भेजो.. दोषियों के साथ सजा इनके समर्थकों को नहीं मिली आने वाला कल और खराब होगा.. #Masoom को इंसाफ दो..

आप शुक्र मना रहे होंगे कि ये आपकी बेटी नहीं है... ऐसे नरपिशाचों के लिए फांसी कम होगी, कोई और सजा मिले, समर्थन करने...

Posted by Arvind Shukkla on Thursday, April 12, 2018

पुष्यमित्र लिखते हैं, "कठुआ और उन्नाव कांड महज रेप के मामले नहीं हैं। यह रेप जैसे जघन्य अपराध के पक्ष सरकार और सरकार समर्थित जनता के बेशर्मी से उतर आने और न्याय प्रक्रिया को बाधित करने की संविधान विरोधी हरकत है। और जिस नेतृत्व को इस हरकत पर रोक लगाना है वह इधर से आंखें मूंदकर उपवास का ड्रामा कर रहा है। कांग्रेस ने तो भोजनोपरांत उपवास किया था, ये कई कदम आगे बढ़कर बलत्कारोपरांत उपवास कर रहे हैं। ऐसा कभी अपने देश में नहीं हुआ है। अब यह सच लगने लगा है कि अपना देश भी तालिबान बन चुका है। दुःखद। अफसोसनाक।

कठुआ और उन्नाव कांड महज रेप के मामले नहीं हैं। यह रेप जैसे जघन्य अपराध के पक्ष सरकार और सरकार समर्थित जनता के बेशर्मी से...

Posted by Pushya Mitra on Thursday, April 12, 2018

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने फेसबुक पर लिखा है, 'कठुआ की बच्ची के साथ देवी-देवताओं की पूजा वाले घर में बार-बार बलात्कार करने और बच्ची को मार-काट कर फेंक देने वाले दरिंदों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर होने में तीन महीने क्या इसलिए लग गए कि वह हिंदू-बहुल इलाक़ा है और प्रदेश के शासन में भाजपा भी सवार है?

कठुआ की बच्ची के साथ देवी-देवताओं की पूजा वाले घर में बार-बार बलात्कार करने और बच्ची को मार-काट कर फेंक देने वाले...

Posted by Om Thanvi on Wednesday, April 11, 2018

विलंबित चार्जशीट के बाद जिस तरह हिंदू संगठन दरिंदों के हक़ में उठ खड़े हुए हैं, उससे भी दयनीय यह कि भाजपा के नेता उन्हें शह दे रहे हैं। कल टीवी पर पार्टी का प्रवक्ता सांप्रदायिक प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ एक शब्द बोलने को तैयार न था। वक़ील भी अपना विवेक संकीर्णता की भेंट चढ़ा चुके। देश को पता नहीं किस मुक़ाम पर ले आए हैं। शर्म भी शर्मसार होगी बलात्कारियों को धर्म, संप्रदाय और पार्टी के नाम पर मिल रहे संरक्षण को देखकर।

ये भी देखिए:

Share it
Top