ई-फॉरेस्ट मंड़ी से देश के काठ व्यापार को मिलेगी मजबूती

ई-फॉरेस्ट मंड़ी से देश के काठ व्यापार को मिलेगी मजबूतीबिहार में शुरू हुआ देश का पहला ई-फॉरेस्ट मंडी पोर्टल  फोटो-इंटरनेट

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। किसानो को लकड़ी का सही दाम दिलवाने और काठ व्यापार में बिचौलियों का हस्ताक्षेप खत्म करने के लिए बिहार में ई-फॉरेस्ट मंडी सुविधा शुरू की गई है। इस सुविधा की मदद से किसान से लेकर आरा फैक्ट्री के मालिक पौधों व लकड़ियों को सीधे खरीददारों को अच्छे दामों पर बेच सकते हैं। बिहार में शुरू हुई यह सुविधा उत्तरप्रदेश के काठ व्यापार को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।


बिहार में शुरू हुई ई-फॉरेस्ट मंडी के बारे में इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (बिहार) के उपर निदेशक केके अकेला ने बताया,'' बिहार में अभी सागौन, पापुलर, शीशम और यूकेलिपटस जैसे पेड़ों की खरीद-बिक्री के लिए किसान को काठ मंडी का सहारा लेना पड़ता है। काठ मंडी में बिचौलियों व्दारा तय किए गए रेट पर किसान अपनी लकड़ी को औने-पौने दामों पर बेच देते हैं।'' उन्होंने आगे बताया कि ई-फॉरेस्ट मंडी की मदद से ई-फॉरेस्ट पोर्टल पर दिए गए फार्म को भरकर अपनी लकड़ी सीधे खरीददार को बेच सकेगा। इसमें 10 से 15 दिन के भीतर किसानों को निश्चित भुगतान देने का प्रावधान है।


बिहार में कृषि रोडमैप योजना के तहत बिहार में वर्ष 2016-17 में 24 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना का 15 फीसदी हिस्सा हरियाली मिशन के तहत पूरा किया जाना है। इसलिए पूरी उत्तर बिहार बेल्ट में पॉप्लर पौधे लगाए जा रहे हैं।इन पौधों की खरीद-बिक्री के लिए इस पोर्टल की मदद ली जा रही है।


कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार विभाग, उत्तरप्रदेश उत्तरप्रदेश से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में मुख्यरूप से दो तरह ( इमारती लकड़ी, व्यवसायिक) लकड़ियों का व्यापार होता है। प्रदेश में लखीमपुर, पीलीभीत, बहराइच, रामपुर और मुजफ्फरनगर जैसे जिलों में 70 फीसदी मंडी शुल्क काठ व्यापार से ही पूरा किया जाता है।ऐसे में ई-फॉरेस्ट मंडी जैसी सुविधा अगर उत्तरप्रदेश में शुरू की जाए तो इससे प्रदेश में काठ व्यापार को काफी हद तक बढ़ावा मिल सकेगा।


ई-फॉरेस्ट मंडी सुविधा को उत्तरप्रदेश में भी अपनाने की बात कहते हुए कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार विभाग, उत्तरप्रदेश के सह निदेशक दिनेश चंद्र ने बताया,'' प्रदेश में इमारती लकड़ी(शीशम,बबूल,सागौन) का व्यापार बहराइच,लखीमपुर और पीलीभीत में सबसे अधिक होता है। ई-फॉरेस्ट सुविधा अगर उत्तरप्रदेश के इन जिलों में भी अपनाई जाए तो काठ किसानो के लिए यह फायदेमंद हो सकती है।''

ई-फॉरेस्ट मंडी में अपनी लकड़ी बेचने के लिए किसानो को ई-फॉरेस्ट मंडी पोर्टल पर वन उत्पादों के क्रेता और विक्रेताओं के सेगमेंट पर जाकर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस पोर्टल पर पॉप्लर व शतावर औषधीय पौधों जैसे व्यावसायिक पौधों की लकड़ी के अलावा शीशम, सागौन और बबूल जैसी इमारती लकड़ियों की बिक्री की जा सकती है।

'' ई-फॉरेस्ट मंडी देश का पहला एकमात्र काठ व्यापार का पोर्टल है।पोर्टल को किसानो के लिए अधिक फायदेमंद बनाने के लिए हमने पोर्टल पर ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा भी शुरू की है।'' केके अकेला ने बताया।

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