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  • मिलिए पशु और पर्यावरण बचाने के लिए नौकरी छोड़ने वाले पति-पत्नी से

    गोंडा। 'पर्यावरण असंतुलन की सबसे बड़ी समस्या ग्लोबल वॉर्मिंग है, जिसकी वजह से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। ऐसे में अगर हमने पर्यावरण को बचाने के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया तो वह दिन दूर नहीं, जब हमारा अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।' ये कहना है उत्तर प्रदेश के जनपद गोंडा निवासी एक युवा का, जिसने...

  • मीना कुमारी ने फिल्म पाकीज़ा में ओढ़ा था यहां का दुपट्टा

    अरविंद सिंह परमारकम्युनिटी जर्नलिस्टचंदेरी (मध्य प्रदेश)। फिल्म पाकीजा में मीना कुमारी ने 'इन्हीं लोगों' गीत में जो दुपट्टा ओढ़ा था, वो यहीं के बुनकरों ने बनाया था, यही नहीं सुई धागा फिल्म में भी यहां की साड़ियां दिखीं थीं, ये है चंदेरी। मध्य प्रदेश बुंदेलखंड के हिस्से वाले अशोकनगर जिले से 65...

  • इस किसान की फसल को देखने विदेश से आते हैं कृषि वैज्ञानिक

    लखीमपुर। गन्ने की खेती में नए प्रयोग करने वाले इस किसान को पांच बार राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार मिल चुके हैं। आज बबलू एक एकड़ में 1150 से 1250 कुंतल गन्ने का उत्पादन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले की पसगवां ब्लॉक के सदरपुर निवासी कुसुम फार्म के प्रगतिशील किसान अशोक बिहारी मिश्रा लखनऊ...

  • मेंथा के साथ खस की खेती : एक खर्चे में दोहरा लाभ

    बाराबंकी। पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर यहां के किसानों ने इस बार मेंथा की खेती के साथ खस की खेती करनी शुरू कर दी और यह सहफसली खेती इन किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है। बाराबंकी जिला मुख्यालय से 38 किलोमीटर उत्तर दिशा में सूरतगंज ब्लॉक के अकमबा गाँव के किसान राम मनोरथ वर्मा...

  • यूूपी के इस गाँव में देश-विदेश से आते हैं टूरिस्ट

    सीतापुर (उत्तर प्रदेश)। शहर की भागदौड़ से परेशान हर कोई सुकून चाहता है और पहाड़ों पर घूमने जाना चाहता है, लेकिन एक किसान ने अपने गाँव को टूरिस्ट प्लेस बना दिया, आज जहां देश-विदेश से लोग घूमने आते हैं। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिला मुख्यालय से लगभग 12 किमी. दूर देना गुलरीपुरवा गाँव के किसान अली...

  • चप्पन कद्दू या जुकुनी, जिसे फिल्म स्टारों की भी सब्जी कहा जाता है

    लखनऊ। कम जमीन और कम समय में ज्यादा कमाई के लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को सब्जियों की खेती की सलाह देते हैं। सब्जियों की फसल 30 से लेकर 70 दिन में तैयार होती हैं और अमूमन रोज पैसा देती हैं। भारत में इस वक्त करीब 40 तरह की सब्जियों की खेती हो रही है, इन्हीं में एक है चप्पन कद्दू। आम कद्दू के मुकाबले...

  • पोस्टमार्टम करने वाली महिला की कहानी ...

    नरहरपुर (कांकेर, छत्तीसगढ़)। पोस्टमार्टम हाउस ऐसी जगह जहां जाने में अच्छे-अच्छे लोग भी घबरा जाते हैं, लेकिन वहीं पर एक महिला बिना झिझके और डरे लाशों का पोस्टमॉर्टम करती है। छत्तीसगढ़ प्रदेश के उत्तर बस्तर कांकेर जिले के नरहरपुर ब्लॉक की संतोषी दुर्गा आज महिलाओं को लिए एक मिसाल बनी हैं।...

  • खीरे की अगेती फसल, तीन महीने में एक एकड़ से दो लाख की कमाई

    बाराबंकी(उत्तर प्रदेश)। जहां कभी धान गेहूं और मोटे अनाज भी पैदा नहीं होते थे वहां एक युवा किसान के अथक प्रयास से अगेती खीरे जैसी फसल लहरा रही है और क्षेत्र के तमाम किसान उनसे प्रेरित होकर खीरे, खरबूजा, तोरई और तरबूज जैसे नगदी फसलें पैदा करने लगे हैं बाराबंकी जिला मुख्यालय से 38 किलोमीटर उत्तर...

  • इंजीनियर की जॉब छोड़ बने किसान, करते हैं इंटीग्रेटेड फार्मिंग

    कैमूर (बिहार)। कई साल तक वेब डिजाइनर की नौकरी करने के बाद जब चितरंजन गाँव में खेती करने आए तो लोगों ने उन्हें तरह-तरह की बातें सुनाई। निकम्मा तक कह दिया, लेकिन आज वही लोग उनकी तारीफ करते हैं। बिहार के कैमूर जिले के झिझुआ गाँव के चितरंजन सिंह, आज पशुपालन और मछलीपालन के बदौलत साल के 7 से 8 लाख...

  • बुंदेलखंड के इस गाँव में अस्सी प्रतिशत लोग करते हैं बकरी पालन

    अरविंद सिंह परमारकम्युनिटी जर्नलिस्टमहरौनी (ललितपुर)। खेती के नुकसान को देखते हुए बुंदेलखंड के किसान बकरी पालन को अपना रहे हैं इससे होने वाले जीविकोपार्जन से परिवार की तमाम जरूरतों का खर्च आसानी से चलता हैं। कर्ज को चुकाने में सहूलियत हुई अब महाजनों के आगे हाथ नहीं फैलाने पड़ते। यहां के लोग बड़े...

  • बांस भी बन सकता है कमाई का जरिया, बिहार की इस महिला से सीखिए

    समस्तीपुर (बिहार)। शादी करके जब किरन अपने ससुराल आयीं तो घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने पर बांस से सामान बनाना शुरू किया। आज न केवल खुद का घर चला रहीं हैं बल्कि दूसरी महिलाओं को भी काम सिखा रहीं हैं। बिहार के समस्तीपुर जिले की रहने वाली कुमारी किरन की पहचान बांस की कारीगरी से होती है, पूरे...

  • धमतरी के नगाड़े की थाप पर छत्तीसगढ़ में चढ़ता है होली का खुमार

    धमतरी (छत्तीसगढ़)। रंग और गुलाल का त्योहार होली हर कोई अपने ही रंग में मनाता है। कहीं गुलाल से होली खेली जाती है तो कहीं फूलों से, कहीं होली पर महफिलें सजती हैं तो कहीं होरियारे फाग गाते हैं। छत्तीसगढ़ की होली भी अपने खास रिवाजों के लिए पहचानी जाती है। छत्तीसगढ़ में नगाड़े की छाप पर फाग गाने का...

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