मार्केट में आएगी गुड़ की आइसक्रीम, किसानों को सिखाए जा रहे हैं गुड़ बनाने के आधुनिक तरीके, गन्ना किसानों की बढ़ेगी आमदनी 

मार्केट में आएगी गुड़ की आइसक्रीम, किसानों को सिखाए जा रहे हैं गुड़ बनाने के आधुनिक तरीके, गन्ना किसानों की बढ़ेगी आमदनी केवीके गोरखपुर में गुड़ बनाने के नए तरीकों की जानकारी दी जा रही है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। किसानों को गन्ने की फसल को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि केवीके गोरखपुर में गुड़ बनाने के नए तरीकों की जानकारी दी जा रही है। प्रदेश के कई जिलों में जल्द ही ऐसे प्रसंस्करण यूनिट की स्थापना की जाएगी।

“हर जिले के कृषि विज्ञान केंद्रों में इसकी शुरुआत की जाएगी। शुरुआत पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तरी बिहार के उन जिलों से होगी, जहां गन्ने की खेती से किसानों का रुझान कम हो रहा है। गोरखपुर के पीपीगंज के महायोगी गुरु गोरक्षनाथ कृषि विज्ञान केंद्र इसकी शुरुआत भी हो गयी है। जहां पर गन्ना किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।”
गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के प्रमुख वैज्ञानिक एके साह कहते हैं ।

कृषि विज्ञान केन्द्र, पीपीगंज, गोरखपुर में प्रायोगिक स्तर पर गुड़ के उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं। पूर्वांचल के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार, प्रशिक्षण और प्रसंस्करण इकाइयों को लगाने के बाद ये उत्पाद बाजार में उपलब्ध होंगे। भारतीय कृषि तकनीकी अनुप्रयोग संस्थान, कानपुर और गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ मिलकर प्रदेश के दूसरे जिलों में भी इसकी शुरुआत करेंगे।

गन्ने के रस को गर्म करती बाराबंकी की रुखमीना देवी।

“खाद्य प्रसंस्करण ज्यादा संभावनाओं वाला क्षेत्र है। ऐसी हर इकाई से उन्नत खेती, उत्पाद के प्रसंस्करण, लोडिंग-अनलोडिंग और विपणन के क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिल सकता है। पूर्वांचल के इन क्षेत्रों में अगर वैज्ञानिक तकनीकि के गुड़ प्रसंस्करण इकाईयां शुरू कर दी जाएं तो इससे ज्यादा फायदा हो सकता है।”
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसएन सिंह कहते हैं।

गन्ना अनुसंधान संस्थान के अनुसार, गन्ना की खेती पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखुपर, बस्ती, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बलिया, आजमगढ़ और मऊ में लगभग 2.2 लाख हेक्टेयर में होती है। जोकि पूरे प्रदेश के गन्ना क्षेत्रफल का नौ प्रतिशत है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में लगभग 24 चीनी मिलें हैं, जिनमें से कुछ चीनी मिलें पुरानी और अप्रचलित मशीनरी की वजह से पूरी तरह से गन्ना पेराई का काम नहीं कर पा रही हैं।

यूपी में सबसे ज्यादा उत्पादन, मगर कोई संगठित बाजार नहीं

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार, भारत में प्रति वर्ष लगभग 60 लाख गुड़ का उत्पादन होता है, जोकि विश्व उत्पादन का लगभग 60 फीसदी है।

वहीं अकेले उत्तर प्रदेश में देश के उत्पादन का लगभग 60 फीसदी यानि लगभग 40 लाख टन गुड़ तैयार किया जाता है। लेकिन अभी तक गुड़ का कोई संगठित बाजार नहीं बन पाया है।

नए तरीके से बनाया जा रहा है गुड़

गुड़ खुद में एक संपूर्ण आहार है। औषधीय गुणों के साथ यह ऊर्जा का भी स्रोत है। इसमें शरीर के लिए जरूरी कई पोषक तत्व (आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन ए और बी) भरपूर मात्रा में मिलते हैं। अलग-अलग फ्लेवर इसकी अतिरिक्त खूबी होगी। आने वाले दिनों में यह आंवला, अजवाईन और सोंठ के स्वाद में बाजार में उपलब्ध होगा। गुड़ की आइसक्रीम और खीर भी लाने की तैयारी की जा रही है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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