पिछले 40 साल से एक घर में चल रहा फतेहपुर बस स्टैंड

पिछले 40 साल से एक घर में चल रहा फतेहपुर बस स्टैंडफतेहपुर का बस स्टैंड मात्र तीन जर्जर कमरों के कमजोर नींव पर टिका है।

वीरेंद्र शुक्ला

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

बाराबंकी। जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर फतेहपुर तहसील के बस स्टैंड के हालात दिन पर दिन बदतर होते जा रहे हैं और प्रशासन कोई सुध नहीं ले रहा है। ऐसे में न बस स्टैंड पर ध्यान दिया जा रहा है और न ही उसका स्थानांतरण हो रहा है।

फतेहपुर का बस स्टैंड मात्र तीन जर्जर कमरों के कमजोर नींव पर टिका है। कब ठह जाये कुछ पता नहीं। यात्रियों के लिए वो मात्र दिखावा है कि फतेहपुर में भी एक बस स्टैंड है और फतेहपुर बस स्टैंड से अछूता नही है। लेकिन नसीम , रामसरन, जय प्रकाश और तमाम यात्रियों का कहना है कि यहां का बस स्टैंड सिर्फ नाम का बस स्टैंड है। बसों के बारे में भी सही जानकारी नहीं मिलती है।

इस बस स्टैंड से चारों दिशाओ में बसों का आवागमन है। फतेहपुर से बेलहरा, छेदा, रामपुरमथुरा, पेतेपुर, महमूदाबाद, सूरतगंज हेतमापुर, साडेमउ आदि क्षेत्रों को बसें जाती हैं। रोजाना हजारों यात्री इन आने-जाने वाली बसों पर सफ़र करते हैं। हर महीने लाखों रुपये का मुनाफ़ा फतेहपुर रूट से परिवहन विभाग को प्राप्त होता है। इसके बावजूद भी परिवहन विभाग इसकी कोई सुध नही ले रहा है।

फतेहपुर निवासी जितेंद्र का कहना है कि लगभग 2 साल पहले इस बस स्टैंड के स्थानांतरण के सम्बन्ध में प्रस्ताव पारित हुआ था, लेकिन वो भी सफल नहीं हो सका। असल में, इस बस स्टैंड को यहां से हटा कर ब्लॉक के बगल में बने पुराने अस्पताल के स्थान पर नवनिर्माण बस स्टैंड तैयार किया जाना था। इस संबंध में असिस्टेंट रीजिनल मैनेजर आरके वर्मा बताते हैं कि जिला प्रसासन से जमीन मांगी गई थी, पर कुछ कारणवश जमीन प्राप्त नही हो पाई। ऐसे में फतेहपुर बस स्टैंड का स्थानांतरण नही हो पाया है।

जब बोले घर के मालिक

जिस घर में किराए में फतेहपुर का बस स्टैंड लगभग 40 साल से चल रहा है, उस घर के मालिक दीपक का कहना है कि फतेहपुर बस स्टैंड मात्र 35 रुपये प्रति महीना किराया देकर 40 साल से ऐसे ही अपना चलता आ रहा है। न तो इसका सुंदरीकरण किया गया है और न ही इसके हालातों में कुछ सुधार आया है और ज्यूं का त्यूं बना हुआ है। न यात्रियों के लिए पानी पीने की व्यवस्था है और न ठहरने के लिए, अगर कोई बस कभी ख़राब हो जाये तो उसके कर्मचारियों के रुकने की जगह भी नहीं है।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top