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कम लागत में किसानों को भा रही मटर की खेती

कम लागत में किसानों को भा रही मटर की खेतीकम खाद और पानी में तैयार हो रही हरी मटर की खेती।

वीरेंद्र सिंह, स्वयं कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

बेलहरा (बाराबंकी)। जिला मुख्यलय बाराबंकी से 38 किमी उत्तर दिशा से सूरतगंज और फतेहपुर ब्लॉक मे लगभग 50 से 60 एकड़ क्षेत्रफल मे हरी मटर की खेती की जा रही है।

कस्बा बेलहरा के किसान राजकुमार राजपूत बताते हैं कि अगेती प्रजाति आर्किल की बुवाई सितम्बर माह के अन्त में करते हैं जो 60 से 65 दिन बाद फलियां तैयार हो जाती हैं जबकि बोर्नविला, आजाद पी1 तथा चाइना प्रजाति की बुवाई अक्टूबर के मध्य से नवम्बर के मध्य तक करते हैं जिसकी फलियां 75 दिन में तथा चायना की फलिया 90 दिनों में तैयार होती हैं। और यह मौसम है जब फलियां तोड़ी जा रही हैं।

एक एकड़ में लगभग 8 हजार से 10 हजार की लागत आती है मटर की खेती में केवल फास्फेटिक उर्वरक का प्रयोग बुवाई से पूर्व किया जाता है। मटर कि खेती में एक या दो सिंचाई फूल आने की अवस्था में की जाती है।
किसान सुशील मौर्या, खाले टोला निवासी

सूरतगंज ब्लॉक के मोहम्मदपुर निवासी लतेश कहते हैं “हम हरी मटर की बुवाई तीन विधि से करते हैं पहली छिटकाव विधि, दूसरी हल के पीछे कूड़ में और तीसरी लाइन में खुर्पी से बुवाई की जाती है।”

फतेहपुर ब्लॉक के गंगापुर निवासी अश्वनी वर्मा कहते हैं “मटर की जड़ों में एक प्रकार की गांठ पाई जाती है जो वायुमंडल से नाइट्रोजन खींचकर पौधों को देती है जिससे हरी मटर की खेती में उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है।”

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

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