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पानी की तरह बह गया पैसा पर हलक सूखे

पानी की तरह बह गया पैसा पर हलक सूखेप्रतीकात्मक फोटो।

किशन कुमार, गाँव कनेक्शन संवाददाता

रायबरेली। गाँव वालों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए, लेकिन ठूंठ बनी टंकियां बता रही हैं कि करोड़ों रुपए पानी में बह गये पर लोगों को पानी मयस्सर नहीं हुआ।

रायबरेली के लालगंज ब्लॉक में दर्जनों गाँव के लोग पेयजल की किल्लत से जूझ रहे हैं। जल निगम से लेकर जिला पंचायत तक ने कई गाँवों में सोलर डुअल पम्प लगवाये। परन्तु यही सोलर डूअल पम्प अब ग्रामीणों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। लालगंज क्षेत्र के मदुरी गाँव निवासी ललित कुमार (26 वर्ष) बताते हैं, “गाँव में नौ सोलर पम्प लगे हैं परन्तु सिर्फ एक ही काम कर रहा है।”

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ईश्वरदीन कुशवाहा के दरवाजे दो साल पहले लगा पम्प लगने के बाद से चला ही नहीं तो सरोजनी देवी (50 वर्ष) ने बताया, “प्राथमिक स्कूल के पास लगा पम्प सिर्फ एक महीना ही चला और बन्द हो गया। शिकायत करने पर कर्मचारी आया इसकी मोटर और सब पुर्जे खोल ले गया। तब से ये पम्प ठूंठ बना खड़ा है। ग्रामीण और स्कूल के बच्चे पानी के लिए भटक रहे हैं।''

बंस बहादुर (55 वर्ष) अपने घर के सामने लगा सोलर पम्प दिखाते हुये कहते हैं, “15 लाख की लागत से पम्प लगाया गया था। फिर बोरिंग फेल बता दी गयी।” यही हाल सलमा बानों (24 वर्ष) के घर के पास लगे पम्प का भी है। यह पम्प भी लगने के 15 दिन बाद फेल हो गया। तीन बार तो चंदा एकत्र कर बनवाया गया। हर बार 2, 4 दिन ही चल पाया, अब फिर बन्द है।

सलमा बानों बताती हैं, “तीन साल में पम्प मुश्किल से तीन महीने ही चला होगा।” सोडांसी स्थित शीतल प्रसाद मिश्र इण्टर कालेज में लगा फ्लोराइड परिशोधन संयंत्र स्थापना से आज तक चला ही नहीं। जिला पंचायत द्वारा लगाया दो सौ लीटर क्षमता का यह संयंत्र बेकार पड़ा है। गाँव में सोलर पम्प की स्थापना के समय पम्प के बगल में बड़ा सा बोर्ड लगाया गया, लेकिन उसमें लिखा कुछ भी नहीं गया।

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