बींस फली की खेती है फायदे का सौदा 

बींस फली की खेती है फायदे का सौदा बाराबंकी जिले के किसान परम्परागत खेती से हटकर अब सब्जियों की खेती पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

अरुण मिश्रा, स्वयं कम्यूनिटी जर्नलिस्ट

विशुनपुर (बाराबंकी)। बाराबंकी जिले के किसान परम्परागत खेती से हटकर अब सब्जियों की खेती पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। जिले में निन्दूरा ब्लॉक के काफी किसान मनोज वर्मा (40 वर्ष) अब बीन्स फली की खेती कर रहे हैं। पंजाब राज्य में बहुतायत मात्रा में पैदा होने वाली बींस फली की खेती,अब बाराबंकी जिले में भी पसंद की जा रही है।

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बाराबंकी मुख्यालय से 40 किमी. दूर निन्दूरा ब्लॉक के कटाई गाँव के किसान मनोज बीन्स फली की खेती कर रहे हैं। मनोज बताते हैं,’’ बींस फली की खेती करने के लिए सबसे पहले आलू की तरह खेत तैयार किया जाता है। इसके बाद 1.5 फीट की दूरी पर लाइन बनाकर 10 इंच की दूरी पर बीज बो दिए जाते हैं, बीज बोने के बाद नाली बनाई जाती है। बीज बोते समय इस बात का ध्यान रखे कि खेत में पर्याप्त नमी जरूर हो। ’’

लोबिया, सेम व चायनीज फली के नाम से विख्यात बीन्स फली का प्रयोग शादी समारोहों में मिक्स वेज सब्जी में सबसे अधिक होता है।जानकर बताते है कि इसकी सब्जी खाने से शुगर की बीमारी कुछ हद तक शांत रहती है।

मनोज वर्मा आगे बताते हैं,’’ जब मिट्टी में बीज का जमाव हो जाता है तो 15 दिनों के अंदर कीटनाशक दवाई का छिड़काव कर देना चाहिए।’’

बीन्स फली का बीज लखनऊ में 700 रुपए प्रति किलो की दर से मिलता है। एक एकड़ में तीन किलो के आस पास बीज लगाया जाता है।यानी बीन्स फली की एक एकड़ खेती करने में लगभग छह से अाठ हज़़ार रुपए की लागत आ जाती है। अक्टूबर महीने ने बोई जाने वाली यह फसल, जनवरी महीने के अंत में फल देने लगती हैं।

‘’ बींस फली को बेचने के लिए लखनऊ की मंडी ले जाना पड़ता है।लखनऊ में इसके दाम 160 से 300 रूपए प्रति किलो की दर से मिल जाते हैं। ’’

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