मुख्यधारा की पढ़ाई कराने वाले मदरसों में बनेगा मिड-डे-मील

मुख्यधारा की पढ़ाई कराने वाले मदरसों में बनेगा मिड-डे-मीलकेंद्र सरकार ने अब देश के मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए भी मिड-डे-मील योजना शुरू करने की तैयारी शुरू कर दी है।

करन पाल सिंह

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ/कन्नौज/रायबरेली। देश के सभी प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को मिड-डे-मील दिया जाता है। अभी तक बच्चों को दोपहर का भोजन केवल सरकारी स्कूलों के बच्चों को दिया जाता था लेकिन अब यह दायरा केंद्र सरकार ने बढ़ाने का फैसला लिया है। देश के मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए भी मिड-डे-मील योजना शुरू करने की तैयारी शुरू कर दी है।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अल्पसंख्यक आयोग की बैठक में कहा कि ये सोचना गलत है कि मदरसे भारत का हिस्सा नहीं है। काफी मदरसों में बहुत अच्छा कार्य किया जा रहा है। इसलिए हमने फैसला लिया है कि जिन मदरसों में विज्ञान, गणित और अंग्रेजी की तामील दी जा रही है उन मदरसों में बच्चों को मिड-डे-मील दिया जाएगा।"

कन्नौज जिले के मदरसा में पढ़ने वाली छात्रा कहकसा (10 वर्ष) बताती हैँ, "हम जिस मदरसे में पढ़ते हैं उसमें मिड डे मील नहीं बनता है। हमारे मदरसे के पास ही प्राथमिक विद्यालय है जहां बच्चों को खाना दिया जाता है। इस स्कूल की तरह हम लोगों को भी खाना मिलेगा तो उसे अच्छा लगेगा। सभी बच्चे भी मन लगाकर पढ़ेंगे।"

इस योजना से गरीब बच्चों को मुफ्त भोजन मिल सकेगा जिससे गरीब बच्चों के अभिभावको को राहत मिल सकेगी।
सबिया बनो (15 वर्ष), रायबरेली के मदरसा में पढ़ने वाली छात्रा

कन्नौज में स्थित मदरसा इलाहीबख्श के इंचार्ज प्रधानाचार्य ज़ैनुल (48 वर्ष) बताते हैं, "मदरसा में बच्चों को मिड-डे-मील देने की स्कीम तो अच्छी है। अगर यह योजना जल्द शुरू हो गई तो बच्चों की मदरसों में संख्या बढ़ जाएगी। "रायबरेली की मदरसा रहमानिया के संचालक हाफिज मुस्तफा रज़ा (54 वर्ष) बताते हैं, "मदरसे में शुरू हो रहे मिड-डे-मील को लेकर बहुत खुशी हो रही है। अगर ऐसा होता है तो हमारा मदरसा और तरक्की कर पायेगा।"

यह सरकार की अच्छी पहल है अगर यह योजना मदरसो में लागू होती है तो निःसन्देह छात्रों को फायदा होगा और बच्चों की संख्या मदरसो में बढ़ेगी।
नगमा बानो (32 वर्ष), प्रधानाचार्या

उत्तर प्रदेश में 48 हज़ार से ज़्यादा मदरसे हैं। 2001 की जनगणना के मुताबिक देश में मुस्लिम आबादी वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश की आबादी 18.5% (30.7 मिलियन) मुसलमानों की है। मुख्तार अब्बास नकवी ने बताया कि बीते दिसंबर में मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन की सालाना आम बैठक में मदरसों में मिड-डे-मील बनने के विषय पर चर्चा की गई और सभी ने एकमत में इस विचार का समर्थन किया।

केन्द्र सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं। इससे गरीब परिवारों के लोग अपने बच्चों को ज्यादा तादाद में मदरसों में भेजने को सोचेंगे।
मोहम्मद हुसैन खान, महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के प्रमुख

इंडियास्पेंड की 26 जुलाई, 2016 की रपट के मुताबिक, मदरसा के छात्र मुख्य रूप से मुसलमान होते हैं। उनकी साक्षरता दर में 9.4 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि हुई है। उनकी साक्षरता दर वर्ष 2001 में 59.1 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2011 में 68.5 प्रतिशत हो गई।

मदरसा एसए पब्लिक स्कूल हाजीगंज के प्रधानाचार्य मुहम्मद शाकिब बताते हैँ, "मदरसों में हर प्रकार के बच्चे पढ़ने जाते हैं योजना अच्छी है।" सौरिख के मदरसा अशरफ उल उलूम के प्रबंधक सैयद मुशर्रत का मत है कि चुनावी दौर है, अगर योजना शुरू कर दी गई तो अच्छा रहेगा। नहीं तो कई नेता फायदे के लिए बयानबाजी करते हैं। वैसे योजना से बच्चों को फायदा होगा।

This article has been made possible because of financial support from Independent and Public-Spirited Media Foundation (www.ipsmf.org).

Share it
Top