#स्वयंफेस्टिवलः किसान मेले में किसानों को दी गई फसल में लगने वाले रोगों की पहचान और इलाज की जानकारी

#स्वयंफेस्टिवलः किसान मेले में किसानों को दी गई फसल में लगने वाले रोगों की पहचान और इलाज की जानकारीगाँव कनेक्शन के स्वयं फेस्टिवल का 8 दिसम्बर को उन्नाव जिले के सरोसी ब्लॉक में समापन किया गया।

उन्नाव। गाँव कनेक्शन के स्वयं फेस्टिवल का 8 दिसम्बर को उन्नाव जिले के सरोसी ब्लॉक में समापन किया गया। सरोसी ब्लॉक के चिलौला बाजार में किसान मेला और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। किसान मेले में कृषि विभाग की और से डॉ. यतीन्द्र सिंह ने किसानों को फसलो को रोग से बचाने और उनके उपचार के सम्बन्ध में जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सरकारी केंद्रों पर गेंहू के बीज अभी भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। सब्सिडी के साथ किसान गेंहू बीज खरीद सकते हैं। सरकार की और से मिलने वाली सब्सिडी सीधे किसान के खाते में जायेगी

उन्होंने यह भी बताया कि अब किसान फसलों में लगने वाले रोगों की ऑनलाइन जानकारी पा सकते हैं। वैज्ञानिक उन्हें रोग की पहचान करने के साथ ही उसके इलाज की भी जानकारी देंगे।

पशु पालन विभाग की और से मौजूद रहे डॉ. अरुण कुमार सचान ने पशुओं को होने वाली बीमारी और उनसे बचाव की जानकारी दी। साथ ही किसानों को पशु बीमा की जानकारी देते हुए बताया कि आज के समय में पशुओं का बीमा कराना बहुत ही जरूरी हो गया है। बीमा में हमें बहुत ही काम प्रीमियम देना होता है। उन्होंने बताया कि अधिकतर लोग इस बात से बीमा नहीं कराते हैं कि उनके पशु की मौत के बाद उन्हें क्लेम नहीं मिल पाता।

डॉ अरुण ने बताया कि अगर हम कुछ बातों का ध्यान रखें तो आसानी से क्लेम मिल सकता है। किसानों को बताया कि बीमा कंपनी पशुओ के लिए जो भी छल्ला देती है उसे हमेशा पहना कर रखें। पशु की मौत होने पर सबसे पहले नजदीकी अस्पताल में जानकारी दें। पशुओ की सेहत को लेकर बताया कि किसान सीधे बरसींन न खिलाये। जानवरों को समय समय पर पेट के कीनो की दवा देते राहें। खुरपका, मुंहपका रोग के विसय में बताया कि विभाग ने अभियान चलाकर सभी पशुओं को टीके लगाएं हैं। किसान मेले के दौरान 10 पशुओं को टीके भी लगाए गए। उन्हीने बताया कि इन रोग की चपेट में आने वाले पशुओं को बुखार आता है। मुंह जीभ और पैरों में छाले पद जाते हैं। बीमारी बढ़ने पर जानवर खाना छोड़ देते हैं, उन्होंने बताया कि बचाव के लिए टीके अवश्य लगाये।

कार्यक्रम में ब्रूक्स इंडिया टीम के सदस्यों ने भी हिस्सा लिया। टीम के डॉ दिनेश मौर्या ने बताया कि उनकी संस्था ईंट भट्ठों पर काम करने वाले पशुओं के लिए काम करती है। जागरूकता की कमी से भट्ठों पर काम करने वाले खच्चर और गधों पर ध्यान नहीं दिया जाता। उनकी संस्था पशुओं का इलाज करने के साथ ही उनके मालिकों को भी महत्वपूर्ण जानकारी देती है।

उन्होंने सर्रा रोग के विषय में जानकारी दी। बताया कि पशु के शरीर में परजीवी की वजह से यह रोग होता है। डांस मक्खी की वजह से रोग फैलता है। बचाव के लिए जरूरी है कि पशु के शरीर पर रोज मालिश करने के साथ खुरेरा किया जाए।

सरोसी के साथ ही ब्रूक्स इंडिया की और से गंजमुरादाबाद और बीघापुर ब्लॉक में पशु स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया था।

जहां ईंट भट्ठों पर काम करने वाले कई पशुओं का इलाज किया गया। उनके मालिकों को ट्रेनिंग दी गयी। रोग के विसय में जानकारी के साथ ही बचाव की जानकारी दी गयी।

इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की और से डॉ. जयनारायण वर्मा, आलोक मिश्रा और डॉ विकास यादव ने लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कॉर्न्स कस साथ ही दवा बांटी।

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