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बैंक और क्रय केंद्रों की दूरी से गेहूं किसान परेशान

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। पिछले वर्ष गेहूं विक्रय के भुगतान में हुई गढ़बड़ी और पैसा ले जा रहे किसानों से लूटपाट की वारदातों को खत्म करने के लिए सरकार ने इस वर्ष गेहूं किसानों को खरीद का भुगतान चेक के माध्यम से करने का फैसला लिया है। लेकिन गाँवों से बैंकों की दूरी और खातों में देर से खरीद का पैसा आने के कारण किसानों को बैंकों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
रायबरेली जिले के भेलई गाँव के किसान दिनेश बहादुर सिंह ( 59 वर्ष) ने हाल ही में 10 कुंतल गेहूं अपने गाँव के पास के ही गेहूं क्रय केंद्र पर बेचा है। गेहूं खरीद पर उन्हें 16,200 रुपए का चेक मिला है, जिसे उन्होंने गाँव से आठ किमी. दूर जाकर बैंक में लगाया है।तीन दिन पहले बैंक में चेक लगाने के बावजूद उनके खाते में पैसा नहीं आया है।
अपनी परेशानी बताते हुए दिनेश बहादुर सिंह कहते हैं,'' पिछले साल नगद पैसा मिला था, इस बार चेक दिया जा रहा है। चेक मिलने से भागादौड़ी बढ़ गई है।अब गेहूं बेचने के बाद चेक लेकर बैंक जाना पड़ रहा है,हमारा खाता इलाहाबाद ग्रामीण बैंक में है। बैंक गाँव से आठ किलोमीटर दूर है।''
सरकार ने इस वर्ष व्यापक तौर पर गेहूं खरीद को प्रोत्साहन देने के लिए किसानों को 48 घंटों के भीतर भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।ऐसे में किसानों को खरीद के निश्चित भुगतान का लाभ दिलवाने के लिए क्रय केंद्रों में गेहूं बेचने पर चेक के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने गेहूं खरीद में 3.3 करोड़ टन से अधिक गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। पिछले वर्ष सरकार ने 2.2 करोड़ टन खरीद की थी। इस वर्ष होने वाली खरीद पिछले वर्ष करीब 30 फीसदी ज़्यादा है।
रायबरेली जिले के किसान दिनेश जहां गाँव से बैंक की दूरी के कारण परेशान हैं, वहीं लखनऊ जिले के अटेसुआ गाँव के किसान शरीफुद्दीन (50 वर्ष) ने गाँव से क्रय केंद्र की दूरी के कारण 13 कुंतल गेहूं गाँव के व्यापारी को फुटकर में बेचा है।
शरीफुद्दीन ने बताया कि हमारे गाँव से सात किमी. की दूरी पर अमानीगंज क्षेत्र में इस बार गेहूं क्रय केंद्र बनाया गया है।अब गेहूं बेचने के लिए सात किमी. कौन जाता, इसलिए हमने सारा गेहूं 1,400 रुपए प्रति कुंतल रेट पर गाँव में ही बेच दिया है।

केंद्र सरकार ने गेहूं किसानों को अपनी फसल के अच्छे दाम दिलवाने के लिए सभी सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 100 रुपए बढ़ाकर 1,625 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है,लेकिन गाँवों से क्रय केंद्रों की दूरी के कारण ना चाहते हुए भी अपनी उपज को कम पैसों में बेचने के लिए मजबूर हैं।

बाराबंकी जिले के सूरतगंज ब्लॉक के शिवराजपुर गाँव में आठ बीघे में गेहूं की खेती कर रहे किसान पारस कुमार ( 40 वर्ष)  किसानों को चेक से गेहूं खरीद का भुगतान किए जाने के फैसले को ज़्यादा कारगर नहीं मानते हैं।पारस कुमार बताते हैं,'' जब किसानों को नकद पैसे मिलते थें, तब वो घर के बाकी खर्चे और लेबरों को किराया, उन पैसों से पूरा कर लेता था।चेक मिलने से अब उनका काम बढ़ जाएगा, पहले किसान अपना गेहूं बेंचे, फिर चेक को बैंक में लगाए और जब चेक क्लीयर होने के बाद खाते में पैसा आए, तब वो बाकी खर्चे पूरे करे।''