सत्र शुरू, लेकिन तीन महीने बाद मिलेंगी बच्चों को किताबें

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मेरठ। उत्तर प्रदेश में नया शैक्षिक सत्र शुरु हो गया है। लेकिन करोड़ों बच्चों को “नि:शुल्क मिलने वाली (कक्षा एक से आठवीं तक) पाठ्य पुस्तकों को प्राप्त करने में अभी कम से कम तीन महीने प्रतीक्षा करनी होगी।” क्योंकि प्रदेश सरकार ने अभी तक इन पुस्तकों के प्रकाशन का जिम्मा ही किसी को नहीं दिया है।

देश के अन्य राज्यों की तरह उत्तर प्रदेश को भी केंद्र सरकार द्वारा सर्व शिक्षा अभियान को प्रदेश में सफलता पूर्वक चलाने के लिए पूर्व की भांति इस बार भी लगभग 500 करोड़ (कुल बजट का 85 प्रतिशत) दिए जाने का प्रावधान किया गया है। प्रदेश भर में एक अप्रैल से सभी प्राथमिक स्कूलों में शैक्षिक सत्र 2016-2017 प्रारम्भ भी हो चुका है।

जिसके लिए राजधानी के निशातगंज स्थित विद्या भवन के पाठ्य पुस्तक अधिकारी द्वारा 17 फरवरी 2016 को शासनादेश संख्या 238/79/6/2016-33(1) 2002 को प्रदेश में अभियान के तहत नि़:शुल्क वितरण हेतु हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी आदि की पुस्तकों को प्रकाशित करने का टेंडर निकाला जो 26 मार्च, 2016 को पूर्ण होना था, परन्तु नहीं हो पाया। इस पर संशोधित कर दिनांक चार अप्रैल की तारीख निर्धारित कर दी गई।

किन्हीं कारणों से इस दिन भी टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं पाई है अब कोई और तारीख निर्धारित की जानी है। प्रकाशन के टेंडरों में दिए नियमों और निर्देशों के अनुसार टेंडर निर्गत होने के बाद जब टेंडर लेने वालों के साथ विभागीय अनुबंध हो जाएगा, उस तारीख से कम से कम 75 और अधिकतम 90 दिनों में टेंडर लेने वालों को जिलों की मांग के अनुसार उन जिलों में बेसिक शिक्षा विभाग में मानक अनुरुप पुस्तकों की आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी।

अगर एक माह में भी टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तब भी बच्चों को अपनी पढ़ाई के लिए सरकारी नि:शुल्क पुस्तकों का जुलाई तक इंतज़ार करना होगा। निदेशक बेसिक शिक्षा, राम बाबू शर्मा बताते हैं, “टेंडर आ चुके हैं, उनका परीक्षण किया जा रहा है। किताबें आने में थोड़ा वक्त लगेगा।” बेसिक शिक्षा अधिकारी मेरठ मोहमद इकबाल कहते हैं, “यह सब नीतियां शासन की होती हैं, इसमें हम कुछ नहीं कर सकते। हमने डिमांड भेज दी थी, जब भेजेंगे तो हम भी आगे स्कूलों को भेज देंगे। इसमें हम क्या कर सकते हैं?”

रिपोर्टर - सुनील तनेजा

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