सूजन और जोड़ों के दर्द में कारगर हर्बल उपचार

सूजन और जोड़ों के दर्द में कारगर हर्बल उपचारgaoconnection

मौसम के बदलाव, उम्र के बढ़ने, अनियंत्रित जीवनशैली व कई अन्य कारणों से लोगों को अक्सर शरीर में सूजन, जोड़ों का दर्द आदि की शिकायत होती रहती है। सूजन और जोड़ों का दर्द एक तरह का इन्फ्लेमेशन कहलाता है जो बहुत लंबे समय तक शरीर में बना रहे तो बेहद घातक भी हो सकता है। दरअसल शरीर में लंबे दौर तक चलने वाले इन्फ्लेमेशन से कैंसर होने के दावे तक आधुनिक विज्ञान ने किए हैं।

ये इन्फ्लेमेशन यानी सूजन और बदन में होने वाला दर्द जीवन की रफ्तार में एक बड़ी बाधा बन जाता है। रासायनिक दवाओं को अपनाकर आपको तुरंत राहत तो जरूर मिल सकती है लेकिन सिन्थेटिक दवाओं के दूरगामी परिणाम काफी घातक होते हैं। हजारों सालों से हिन्दुस्तान के ग्रामीण लोग सूजन और दर्द निवारण के लिए देसी नुस्खों को आजमाते आएं हैं। पिछले लगभग 2 दशकों के अपने स्वयं के अनुभव से कह सकता हूं कि इस लेख में बताए कई नुस्ख़े बेहद कारगर भी हैं और इनपर बाकायदा वैज्ञानिक शोध भी जारी है, चलिए जानते हैं किस तरह से आदिवासी हर्बल नुस्खों को अपनाकर आप सब सूजन और जोड़ों का दर्द जैसी समस्याओं से निजात पा सकते हैं।

तरबूज

पातालकोट के आदिवासी मानते हैं कि लगभग 100 मिली तरबूज के रस में लगभग 2 ग्राम कालीमिर्च के चूर्ण को मिलाकर दिन में 2-3 बार सेवन कराया जाए तो शरीर की सूजन दूर हो जाती है।

दालचीनी की छाल

दालचीनी की छाल का चूर्ण तैयार कर एक कप पानी के साथ लगभग 2 ग्राम चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन सुबह भोजन के बाद लिया जाए तो जोड़ दर्द में तेजी से आराम मिलता है, वैसे डांगी आदिवासियों के अनुसार यही फार्मुले का सेवन डायबिटीज के लिए भी कारगर है। आदिवासियों के अनुसार अपने खान-पान में अक्सर दालचीनी का उपयोग सेहत के लिए कई मायनों में बेहतर होता है।

शीशम की पत्तियां

शीशम की सूखी पत्तियों का चूर्ण बनाकर पानी में घोलकर लेप तैयार किया जाए और सूजन वाले अंग पर लगाया जाए तो सूजन कम करने में मदद करता है। शीशम की पत्तियों में पाए जाने वाले महत्वपूर्ण रसायनों में काफी एंटीइन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं।

कुंदरू

कई इलाकों में जानकार लोग कुंदरू के फल, अजवायन, अदरख और कपूर की समान मात्रा लेकर कूट लेते हैं और एक सूती कपड़े में लपेटकर इसे हल्का-हल्का गर्म करके सूजन वाले भागों पर धीमे धीमे सेंकाई करते हैं, ऐसा करने से मोच या सूजन मिट जाती है। 

समुद्रशोख बेल की जड़ें

घुटनों में सूजन होने पर समुद्रशोख नामक बेल की जड़ों के चूर्ण चावल की मांड में मिलाकर घुटनों पर लेपित किया जाए और दो घंटे बाद इसे धो लिया जाए, आराम मिलने लगता है।

नागरमोथा 

नदी, नालों और पोखरों के किनारे पाए जाने वाली महत्वपूर्ण वनस्पति नागरमोथा में प्रोटीन, स्टार्च के अलावा कई कार्बोहाड्रेट्स पाए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि संपूर्ण पौधे का लेप शरीर पर लगाने से सूजन मिट जाती है। इसके कंद को कुचलकर सूजन वाले हिस्सों पर लगाने पर आराम मिलता है।

ग्वार फल्िायों के बीज

पातालकोट के आदिवासियों का मानना है कि गंवारफल्लियों के बीजों को रात भर पानी में डुबोकर रखा जाए और अगले दिन उसे कुचलकर सूजन, जोड़ दर्द और जलन देने वाले शारीरिक भागों पर लगाने से अतिशीघ्र आराम मिलता है।

कटहल

कटहल के फल के छिल्कों से निकलने वाला दूध यदि गांठनुमा सूजन, घाव और कटे-फटे अंगों पर लगाया जाए तो आराम मिलता है। अक्सर पहाड़ों पर चढ़ते उतरते हाथ पैरों में अक्सर खरोंचे आने पर पहाड़ी लोग, कटहल के फलों को चीरा लगाकर दूध निकालते हैं और घावों पर लगाते हैं।

जोड़ दर्द-बदन दर्द

दक्षिण मध्यप्रदेश के महाकौशल क्षेत्र में अरबी के पत्तों में बेसन लगाकर भजिए तैयार किए जाते हैं, माना जाता है कि ये भजिए वात रोग और जोड़ दर्द से परेशान रोगियों के लिए उत्तम होते हैं, आर्थराइटिस रोग से त्रस्त व्यक्ति को इन भजियों का सेवन जरूर करना चाहिए। 

आक-अकौना के पौधे का दूध 

यह बहुत कम लोग जानते हैं कि आक या अकौना के पौधे से निकलने वाले दूध का उपयोग शारीरिक दर्द भगाने में किया जाता हैं, पातालकोट के आदिवासियों की मानें तो इसका दूध किसी भी प्रकार के दर्द को खींच लेता हैं। इसके पत्तियों को कुचलकर जोड़ों पर लेपित किया जाए तो भी यह दर्द को खींच लेती है। आदिवासियों के अनुसार इसकी पत्तियों के रस जोड़ों पर मालिश करने से जो दर्द में आराम मिलता है। आक की पत्तियों को सतहों पर सरसों के तेल को लगाकर आँच पर सेंका जाए और दर्द वाले हिस्सों पर इससे हल्की सेंकाई की जाए तो दर्द में आराम मिलता है। डाँग- गुजरात के आदिवासी हर्बल जानकार अमरबेल के बीजों और पूरे पौधे को कुचलकर आर्थराइटिस के रोगी को दर्द वाले हिस्सों पर पट्टी लगाकर बांध देते हैं। इनके अनुसार यह दर्द निवारक की तरह कार्य करता है।

राई के बीज

राई के बीजों का लेप और कपूर का मिश्रण जोड़ों पर मालिश करने से आमवात और जोड़ के दर्द में फायदा होता है। पातालकोट के कई हिस्सों में आदिवासी इस मिश्रण में थोड़ा से केरोसिन तेल डालकर मालिश करते हैं। कहा जाता है कि यह फार्मूला दर्द को खींच निकालता है।

फराशबीन की फल्लियां 

कुछ आदिवासी फराशबीन की फल्लियों के रस के सेवन की सलाह गठिया का रोग दूर करने के लिए देते हैं। फल्लियों के बीजों का चूर्ण तैयार कर तेल के साथ मिलाकर जोड़ दर्द वाले हिस्सों पर लगाया जाए तो दर्द में तेजी से राहत मिलती है।

पारिजात की ताजी पत्तियां

पारिजात की 6-7 ताजी पत्तियों को अदरक के रस साथ कुचल लिया जाए और शहद मिलाकर सेवन किया जाए तो बदन दर्द और जोड़ दर्द में काफी आराम मिलता है। माना जाता है कि इस फार्मुले का सेवन सायटिका जैसे रोग के लिए भी महत्वपूर्ण होता है।

शारीरिक सूजन 

करीब 8-10 लहसुन की कलियों को तेल या घी के साथ फ्राई कर लिया जाए और खाने से पहले चबाया जाए तो जोड़ दर्द में तेजी से आराम मिलता है, ऐसा प्रतिदिन किया जाना चाहिए। डाँग- जिला गुजरात के हर्बल जानकारों का मानना है कि लहसुन की कलियों को सरसों के तेल के साथ कुचलकर गर्म किया जाए और कपूर मिलाकर जोड़ों या दर्द वाले हिस्सों पर लगाकर मालिश की जाए तो भी तेजी से आराम मिलता है। लहसुन के एंटीइन्फ्लेमेटरी गुणों की वकालत आधुनिक विज्ञान भी खूब करता है।

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