महीनों से नवीन गल्ला मंडी में नहीं गया कोई सफाईकर्मी, कूड़े का लगा ढेर

महीनों से नवीन गल्ला मंडी में नहीं गया कोई सफाईकर्मी, कूड़े का लगा ढेरनवीन गल्ला मंडी के फल बाज़ार में हर दुकान के आगे कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। जिले की सीतापुर रोड स्थित नवीन गल्ला मंडी के फल बाज़ार में हर दुकान के आगे कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। यही नहीं नई फल मंडी से गुज़रने वाला रास्ता एक बड़े गड्ढे में बदल गया है, जिसमें हमेशा गंदा पानी भरा रहता है। यहीं पर फलों की खरीदारी भी चलती रहती है।

देश-दुनिया से जुड़ी सभी बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

मंडी में पिछले चार वर्षों से फलों का व्यापार कर रहे शाजिद (30 वर्ष) बताते हैं, ‘’मंडी में पहले एनजीओ और समिति की महिला सफाईकर्मी हर दिन झाडू लगाने आती थी। पिछले दो महीने से मंडी में कोई सफाईकर्मी नहीं आया है। यहां पर हमारे लिए पीने और नहाने के लिए पानी की समस्या है इसलिए अधिकतर लोग रास्ते पर लगे नलों पर ही नहा लेते हैं। इसकी वजह से पानी रास्ते में हमेशा फैला रहता है।’’

जिले में कृषि व्यापार और थोक खरीद के लिए मुख्य रूप से नवीन कृषि मंडी, दुबग्गा और नवीन गल्ला मंडी, सीतापुर रोड हैं। दोनो मंडियों में हर रोज़ 20,000 से अधिक लोगों आते-जाते हैं, लेकिन मंडी में साफ-सफाई व व्यापारियों को दी जाने वाली सुविधा के नाम पर जिला कृषि विभाग के साथ-साथ मंडी समिति के अफसर चुप हैं।

सत्येंद्र कटियार (40 वर्ष) मंडी में पिछले 12 वर्षों से आलू, प्याज का व्यापार कर रहे हैं। सुबह सात बजे से खरीदारी के काम में जूझने के बाद दोपहर दो बजे, उन्हें कचरे के बीचों-बीच बनी मंडी की कैंटीन में लंच करना पड़ता है। नवीन गल्ला मंडी, सीतापुर रोड की कैंटीन की तरफ इशारा करते हुए सत्येंद्र बताते हैं, ‘’मंडी की कैंटीन किसी छोटे कमरे जैसी लगती है।

इसके चारों-तरफ लोगों ने अवैध कब्ज़ा कर रखा है। यहां पर ना तो बैठने की अच्छी जगह है और ना ही हवादार माहौल। एक कैंटीन के सहारे मंडी के 500 से अधिक व्यापारियों का पेट भरता है।’’मंडी में प्रतिदिन हज़ारों की संख्या में आने वाले खरीदारों, आढ़ती, गल्ला व्यापारी और किसानों के लिए मात्र दो अधूरे बने शौचालय हैं लेकिन शौचालयों में गंदगी के कारण लोग इनके नज़दीक आना भी पसंद नहीं करते हैं।

शौचालय से महज़ पांच कदम की दूरी पर फल एवं सब्जियों की दुकान पर बैठे व्यापारी मो. अब्बास ने बताया, ‘’मंडी में बने शौचालय की महीने में एक-दो बार ही सफाई होती है। इतनी बदबू आती है कि यहां पर बैठकर दुकान चलाना भी मुश्किल हो जाता है और खरीदार भी कम आते हैं।’’लखनऊ की दुबग्गा और सीतापुर रोड पर बनी नवीन गल्ला मंडियों में प्रतिवर्ष करोड़ों का व्यापार होता है। इन मंडियों में सिर्फ प्रदेश के व्यापारी ही नहीं देश भर से लोग व्यापार करने आते हैं।

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

Share it
Top