जो कल तक सड़कों पर उठाते थे कूड़ा, आज कर रहे अच्छी जगह नौकरी

जो कल तक सड़कों पर उठाते थे कूड़ा, आज कर रहे अच्छी जगह नौकरीहजारों ऐसे युवा जो रेलवे स्टेशन, बस अड्डे पर कूड़ा बीनने को मजबूर हैं, उनके लिए युवा कौशल केन्द्र सहारा बन रहा है।    

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

गाजियाबाद। कभी सड़क पर कूड़ा बिनने वाले विशाल आज अहमदाबाद की एक कंपनी में जॉब कर रहे हैं, विशाल की तरह ही राजधानी दिल्ली में हजारों ऐसे युवा हैं जो रेलवे स्टेशन, बस अड्डे पर कूड़ा बीनने को मजबूर हैं, ऐसे युवाओं के लिए युवा कौशल केन्द्र सहारा बन रहा है जो ऐेसे युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार दे रहा है।

अहमदाबाद कंपनी के लिए चुने गए छात्र विशाल (20 वर्ष) कहते हैं, “आज हम जो कुछ भी हैं वह चेतना संस्था के सहयोग व मार्गदर्शन से हैं। मेरा इस दुनिया में कोई नहीं है न तो मां का पता है न पिता का, पूरी जिंदगी रेलवे स्टेशन पर बीत गई। जो युवा अब से कुछ समय पहले तक दिनभर नशे में डूबे रहते थे वो आज नशा छोड़कर एक नई जिंदगी जी रहे हैं। पहले इनको नशे की चंगुल से छुड़ाया उसके बाद उन्हें शिक्षित करने का काम किया उसके बाद उन्हें रोजगार देने का भी काम चेतना संस्था कर रही है।”

इस युवा कौशल विकास केन्द्र की सेंटर इंचार्ज मोनिका अंतल अपने युवा साथियों के सहयोग से इस पूरे कार्य को अंजाम दे रही हैं। मोनिका बताती हैं, “पिछले चार महीने में 150 से ज्यादा बच्चों के साथ काम किया जा रहा है। ज्यादातर ऐसे बच्चे जिनका इस दुनिया में कोई नहीं है। क्या सही है क्या गलत उन्हें कुछ पता नहीं होता है।

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संस्था उठाती है पढ़ाई का खर्च

संस्था ऐसे बच्चों को कॉपी-किताब बैग के साथ ही खाना-नाश्ता भी देती है और साथ ही इनको बेसिक शिक्षा भी दी जाती है। जो बच्चा आगे पढ़ना चाहता है उसे ओपन बोर्ड से पढ़ने का पूरा खर्च संस्था द्वारा वहन किया जाता है। चेतना के युवा कौशल विकास केन्द्र के सात बच्चों का चयन अहमदाबाद की आइएसएस फैसेलटी एण्ड केयर मैनेजमेंट में हुआ है। इस पर मोनिका का कहना है कि, “ यह हमारे लिए बहुत ही गर्व की बात है कि हमारे बच्चों को इस जॉब के लिए चयन हुआ है वो भी उस दौर में जब अच्छे अच्छे को नौकरी नसीब नहीं हो रही है।”

अहमदाबाद कंपनी में चयन के बाद से युवा कौशल विकास केंद्र में युवाओं की संख्या बढ़ गई है। जो बच्चे अब से पहले कई बार बुलाने पर भी नहीं आते थे वो आज के समय में बिना बुलाए ही सेंटर पर आ रहे हैं।

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ट्रेनिंग के बाद कराई जाती है प्लेसमेंट

केन्द्र की टीचर प्रतिभा त्रिपाठी का कहना है, “इन बच्चों को समझने की जरूरत है इनकी कार्य क्षमता बाकी बच्चों की अपेक्षा कई गुना ज्यादा है। हम एक रात भी बिना कंफर्म टिकट के सफर करने में डरते हैं और ये बच्चे पिछली कितनी रात व दिन ऐसे ही काट रहे हैं इस बारे में कोई नहीं सोचता। ये बस हालात की वजह से मजबूर थे लेकिन अब हमारा प्रयास है कि सेंटर पर आए सभी बच्चों के जीवनस्तर में सुधार किया जाए।

इसके लिए संस्था द्वारा इनके पढ़ने लिखने इनकी ड्रेस से लेकर इनकी ट्रेनिंग खाने पीने की सभी सुविधा नि:शुल्क दी जा रही है। जो भी बच्चा पढ़ने में रुचि दिखाता है उसको 30 दिन की बेसिक शिक्षा देने के बाद जीएमआरवी सेंटर के सहयोग से उसके शिक्षा स्तर को देखते हुए ट्रेनिंग दी जाती है और ट्रेनिंग के बाद प्लेसमेंट कराई जाती है।

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