बिहार जल संकट: सुबह होते ही शुरू हो जाता है पानी का संघर्ष

साल 2019 की भीषण गर्मी से बिहार के लोग भी परेशान हैं। बिहार के 38 जिले में से 25 जिलें गंभीर जल संकट से गुजर रहे हैं। दक्षिण बिहार का नवादा जिला भी इस जल संकट से बचा हुआ नहीं है।

विनय कुमार पांडेय,कम्युनिटी जर्नलिस्ट

नवादा( बिहार)। साल 2019 की भीषण गर्मी से बिहार के लोग भी परेशान हैं। बिहार के 38 जिले में से 25 जिलें गंभीर जल संकट से गुजर रहे हैं। दक्षिण बिहार का नवादा जिला भी इस जल संकट से बचा हुआ नहीं है। जिले की शहरी आबादी से ग्रामीण क्षेत्र की जनता पानी की समस्या को लेकर हलकान है। नलों से पानी नहीं निकल रहा है। गांवों के अधिकांश कुएं सूखे पड़े हैं। नदियां इतनी सूखी दिख रही हैं कि उसमें रेत के टीले नजर आ रहे हैं। आम आदमी, मवेशी, पंछी सभी पानी की समस्या है परेशान हैं।

एक बाल्टी पानी के लिए लगानी पड़ती है घंटो कतार

नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड अंतर्गत सांगोबर मुसहरी टोला की आबादी इन दिनों पड़ोस के गांव के एक व्यक्ति के बोरिंग पर निर्भर है। उस बोरिंग से भी सुबह और शाम के वक्त केवल एक-एक घंटे पानी दिया जाता है। लिहाजा पानी भरने के लिए औरतों की भीड़ लग जाती हैं। पानी के लिए घंटों कतार में खड़ी रहने वाली औरतों को कभी कभार पानी लिए बिना ही मायूस होकर वापस जाना पड़ता है। गांव के बिंदा राजवंशी बताते हैं कि गांव में एक कुआं और 2 हैंडपंप थें। दोनों महीनों से सूखे पड़े हैं, ऐसे में पानी की बड़ी समस्या है। शासन-प्रशासन, जनप्रतिनिधि कोई सुनने वाला नहीं है।

मुसहरी टोला की महिला कुंती देवी बताती हैं कि उन्हें हर रोज सुबह-सुबह उठकर कई कोस दूर से पानी लाना पड़ता है। उनकी गोद में छोटा बच्चा रहता है। उनको पानी लाने में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गांव की एक अन्य महिला पनमा देवी ने कहती हैं कि "पानी कहीं नहीं मिल रहा है। बहुत मुश्किल से बाल्टी भर पानी मिल जाता है। गरीब की कौन सुनता है साहब ? भगवान भरोसे पानी मिल रहा है। कई बार बगैर पानी पिए ही सो जाते हैं। हम गरीबों की जिंदगी ऐसे ही कटती है।"

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सरकारी दावों की पोल खोलता पेयजल संकट

सांगोबर मुसहरी गांव की आबादी करीब 400 की है। रजवार और मांझी जाति के परिवार यहां रहते हैं। 65 घरों की बस्ती के लोग रोजमर्रा मजदूरी पर ही निर्भर है। राज्य सरकार महादलितों के नाम पर अनेक तरह की योजनाएं चलाने का दावा करती है। लेकिन पेयजल संकट झेल रहा यह गांव सरकारी दावों की पोल खोलता है। गांव के लोग सरकार के दावों पर सवाल उठाते हैं। अपने नेताओं के खिलाफ इनमें गुस्सा भी दिखता है। गांव के युवक कहते हैं कि वोट के समय सभी नेता हर तरह का वादा करते हैं। चुनाव जीतने के बाद वह हमारे गांव को देखने तक नहीं आते।

मुसहरी गांव के ही पशुपालक श्रवण यादव बताते हैं कि "जानवरों को पानी पिलाने के लिए करीब 5 किलोमीटर दूर जंगल ले जाना पड़ता है। पहाड़ की तलहटी में थोड़ा बहुत जो पानी मिलता है, उसी से इन जानवरों की प्यास बुझती है। गांव के सारे हैंडपम्प और तालाब सूखे पड़े हैं। इंसान के साथ साथ मवेशी भी इस जलसंकट से बेहद परेशान हैं।

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