दुबई की जमी जमाई नौकरी छोड़, युवक करने लगा पशुपालन

सात गायों से शुरू किए पशुपालन के इस व्यवसाय से धीरे धीरे विशाल को अच्छी खासी आमदनी होने लगी। दूध का उत्पादन बेहतर होने के बाद विशाल ने गांव से शहर तक दूध वितरण का व्यवसाय बढ़ा दिया। उन्होंने बताया कि देशी गाय के दूध में मौजूद पौष्टिकता से उनकी मां के घूटनो का दर्द सही हो गया। आज उनकी मां पूरी तरह स्वस्थ हैं।

अकिंत चौहान, कम्युनिटी जर्नलिस्ट

अरावली( गुजरात)।देश में युवाओं की जितनी जनसंख्या है,उस मुकाबले सरकार रोजगार नहीं दे पाती है। ऐसे में कई लोग बेरोजगार रह जाते हैं। कुछ रोजगार के सिलसिले में विदेशों का रूख कर लेते हैं तो कुछ हार मानकर किस्मत से समझौता। लेकिन खुद का व्यवसाय शुरू कर आप किस्मत से लड़ उसे बदल भी सकते हैं ऐसा कर दिखाया गुजरात के अरवल्ली जिले के बामणवाड गांव के विशाल पाड्या ने, जो आज पशुपालन के व्यवसाय से अपना घर भी चला रहे हैं और कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

जमी जमाई नौकरी छोड़ करने लगे पशुपालन

विशाल बताते हैं कि दुबई में नौकरी करते थे। 50 हजार महीने सैलरी थी। अचानक उनकी मां की तबीयत खराब हो गई। दुबई की जमी जमाई नौकरी छोड़ उन्हें वापस आना पड़ा। वापस आने पर उन्होंने देखा कि गुजरात में प्राथमिक शिक्षक बनने का बड़ा क्रेज है। यह देखकर विशाल ने बीएड कर लिया। बीएड करने के बाद उन्होंने एक विद्यालय में बतौर अध्यापक 5 हजार रूपये में अपनी सेवाएं भी दी। सरकारी नौकरी न मिलने और सैलरी कम होने की वजह उन्होंने फिर शिक्षक की नौकरी से किनारा कर अपना पशुपालन का व्यवसाय शुरू किया।

व्यवसाय शुरू करने से पहले शुरू किया रिसर्च

पशुपालन का व्यवसाय शुरू करने के से पहले उन्होंने कई महीने तक गायों की नस्ल पर रिसर्च किया। रिसर्च के दौरान उन्होंने पाया कि देशी गायों के दूध में विदेशी गायों के मुकाबले पौष्टिकता की मात्रा ज्यादा होती है। सात गायों से शुरू किए पशुपालन के इस व्यवसाय से धीरे धीरे विशाल को अच्छी खासी आमदनी होने लगी। दूध का उत्पादन बेहतर होने के बाद विशाल ने गांव से शहर तक दूध वितरण का व्यवसाय बढ़ा दिया। उन्होंने बताया कि देशी गाय के दूध में मौजूद पौष्टिकता से उनकी मां के घूटनो का दर्द सही हो गया। आज उनकी मां पूरी तरह स्वस्थ हैं।

खुद उगाते हैं गायों के लिए आर्गेनिक चारा

विशाल के मुताबिक आज उनके पास 22 गाय हैं। इसके साथ ही 6 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। वह अपनी गायों के लिए बाजार से चारा नहीं लाते हैं बल्कि खुद आर्गेनिक चारे की फार्मिंग करते हैं। खेत में उगे चारे और घास को ही वह गायों को खिलाते हैं। वह कहते हैं " आर्गेनिक चारे से गायों में तंदरूस्ती आती है और साथ ही दूध का उत्पादन भी बढ़ता है। वह सबको हिदायत भी देते हैं कि विदेशी गायों कि जगह देशी गायों को पाले और उन्हें आर्गेनिक चारा ही खिलाएं।

विशाल सुबह तीन बजे ही उठ जाते हैं। उठने के बाद वह गायों को चारा खिलाने से लेकर दूध निकालने तक का काम में मजदूरों का सहयोग करते हैं। गायों को चारा खिलाने से लेकर सारे काम वह अपनी देख रेख में ही कराते हैं।

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क्षेत्र के लोगोंं के लिए मिसाल हैं विशाल

विशाल कहते हैं कि उच्च शिक्षा लेने के बाद भी लोग बेरोजगार रह जाते हैं, जिनके पास ठीक ठाक पूंजी है उन्हें खुद का व्यनसाय शुरू करना चाहिए। खुद के व्यवसाय से आमदानी तो होगी ही साथ ही बेरोजगारी भी कम होगी। आज विशाल को देखकर उनके गांव के अन्य युवकों ने भी खुद का वयवसाय शुरू कर दिया है। विशाल अपने क्षेत्र में लोगों के लिए एक विशाल बन कर निकले हैं।

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