टीचर के चहेते बच्चों को ही मैथ-फिजिक्स

टीचर के चहेते बच्चों को ही मैथ-फिजिक्सgaoconnection

लखनऊ। प्राइवेट स्कूल अभिभावकों की जेब पर डाका तो डाल ही रहे थे, अब दसवीं पास कर चुके बच्चों के सामने ये समस्या आ गई है कि कई स्कूल ऐसे बच्चों को फिजिक्स-केमेस्ट्री और मैथ विषय इंटर के लिए दे रहे हैं जो उनके चहेते हैं।

हरदोई रोड स्थित मिशनरी स्कूल, सेंट क्लेअर्स कान्वेट के वह बच्चे जो इस वर्ष सीबीएसई की कक्षा 10 की परीक्षा दे चुके हैं, उनको स्कूल प्रबंधन जबरदस्ती कामर्स लेने के लिए बाध्य कर रहा है। 

ये तब हो रहा है जब अभी तक उनका रिजल्ट भी घोषित नहीं किया गया है। सीटें कम होने का बहाना कर स्कूल द्वारा केवल उन बच्चों को फिजिक्स, केमेस्ट्री मैथ दी जा रही है जिनको शिक्षक-शिक्षकाएं पसंद करते हैं।

नाम न छापने की शर्त पर सेंट क्लेअर्स स्कूल के कक्षा कक्षा 10 की परीक्षा दे चुके छात्र ने बताया कि मुझे फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ में ही रुचि है लेकिन मेरे स्कूल की शिक्षिका और प्रधानाचार्या मुझ पर कामर्स लेने का दबाव बना रही हैं जो कि मैं पढ़ना नहीं चाहता। मैंने अपने अभिभावकों को स्कूल प्रशासन से बात करने के लिए भेजा तो प्रबंधन ने यह कहकर मना कर दिया गया कि सीटें कम हैं और बच्चे का ग्रेड इस लायक नहीं है, जबकि मेरा रिजल्ट भी अभी नहीं आया है।

नाम न छापने पर अभिभावक ने बताया कि मेरा बच्चा इन दिनों बेहद मानसिक तनाव में है।  मेरा बच्चा शुरुआत से ही इस स्कूल में पढ़ता आ रहा है और मेरा उद्देश्य था कि इण्टर तक अपने बच्चे को इसी स्कूल में पढ़ाऊं लेकिन मेरा बच्चा कामर्स विषय लेना नहीं चाहता और कहता है कि यदि कामर्स दी गई तो मैं आगे मन से पढ़ाई नहीं कर सकूंगा। उन्होंने बताया कि सेंट्रल स्कूल में एडमीशन के लिए प्रयास किया लेकिन सब सीटें फुल हैं। यदि कहीं एडमीशन नहीं हुआ तो बच्चे को उस स्कूल में भेजने के सिवा कोई रास्ता नहीं होगा लेकिन यह उसके भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।

कामर्स लेने के लिए दिए जा रहे दबाव से परेशान कक्षा 10 के एक अन्य बच्चे ने बताया कि कक्षा 10 में तीन सेक्शन हैं। इनमें 48, 36 और 52 बच्चे हैं जिनमें से लगभग 25-30 बच्चों को कामर्स लेने पर बाध्य किया जा रहा है। कई बच्चों ने इस बाध्यता के चलते स्कूल से नाम तक कटवा लिया है, तो कई अभी भी स्कूल नहीं आ रहे हैं और किसी न किसी स्कूल में दाखिले के लिए प्रयास कर रहे हैं। इस सम्बन्ध में स्कूल की प्रधानाचार्या सिस्टर विनीता का कहना है कि बच्चों के अंक प्रतिशत को ध्यान में रखकर ही यह फैसला लिया गया है।

रिपोर्टर - मीनल टिंगल

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