गोरखपुर बीआरडी हॉस्पिटल : नहीं रुक रहा मौत का सिलसिला, 48 घंटों में 42 बच्चों की मौत

गोरखपुर बीआरडी हॉस्पिटल : नहीं रुक रहा मौत का सिलसिला, 48 घंटों में 42 बच्चों की मौतबीआरडी अस्पताल में भर्ती बच्चे के पा बैठी मां। फोटो : विनय गुप्ता 

गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बच्‍चों की मौतों का सि‍लसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऑक्‍सीजन की कमी से दर्जनों बच्‍चों की मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है कि बीते 48 घंटों में 42 बच्‍चों की मौत होने के मामले सामने आया हैं। हालांकि, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. पीके सिंह इसे सामान्‍य मौत बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से सिर्फ 7 बच्चों की मौत इंसेफ्लाइटिस से हुई है।

27 और 28 अगस्त के दौरान 48 घंटे में 42 बच्चों की मौत

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में इलाज़ के लिए आने वाले बच्चों की मौत के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. पीके सिंह खुद बताते हैं, ‘’बीआरडी अस्पताल में 27 और 28 अगस्त के दौरान 48 घंटे में 42 बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें सात बच्चों की मौत इंसेफेलाइटिस यानी दिमागी बुखार से हुई है।’’

अस्पताल में बड़ी संख्या में बीमार बच्चे आ रहे हैं

डॉ. पीके सिंह के मुताबिक, इन दिनों अस्पताल में बड़ी संख्या में बीमार बच्चे आ रहे हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में इस वक्त ऑक्सीजन और दवाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन कई बच्चों की सेहत अस्पताल आने तक इतनी बिगड़ चुकी होती है कि डॉक्टर पूरी कोशिश के बावजूद उन्हें बचा नहीं पा रहे। डॉक्टर पीके सिंह के मुताबिक, गोरखपुर में जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीनों में हर साल हालात इतने ही खराब होते हैं।

देश के लिए चिंता की बात

48 घंटे में 42 बच्चों की मौत अगर किसी अस्पताल के लिए एक सामान्य आंकड़ा बन जाए और वो भी साल-दर साल, तो ये न सिर्फ उस अस्पताल और यूपी सरकार के लिए बल्कि पूरे देश के लिए चिंता की बड़ी वजह होनी चाहिए।

क्या है गोरखपुर ट्रेजडी

बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में 7 अगस्त से लेकर 12 अगस्त तक 30 बच्चों समेत 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। आरोप है कि ये मौतें हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की सप्लाई बंद होने की वजह से हुईं। कहा जा रहा है कि पुष्पा सेल्स नाम की कंपनी ने पेमेंट बकाया होने की वजह से ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई रोक दी थी। कंपनी ने कहा कि हमने 14 रिमांडर भेजे, लेकिन इसके बाद भी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने कोई एक्शन नहीं लिया।

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