बच्चे पुरानी किताबों से पढ़ने को मजबूर, नई किताबों के लिए करना पड़ेगा और इंतजार

बच्चे पुरानी किताबों से पढ़ने को मजबूर, नई किताबों के लिए करना पड़ेगा और इंतजारपरिषदीय स्कूलों में एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। यूपी के 1.96 करोड़ छात्र छात्राओं के प्रति बेसिक परिषदीय और माध्यमिक शिक्षा विभाग की उदासीनता देखिए पिछले वर्ष छात्रों को सरकारी किताबें तब छपकर मिलीं जब टेंडर अनियमिताओं के बीच अर्धवार्षिक परिक्षाएं हो चुकी थीं। इस वर्ष भी सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन अब तक किताबों के लिए लगभग 250 करोड़ की टेंडर तक नहीं हुआ है।

कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को वितरित की जाने वाली किताबों के टेंडर में अपनों को फायदा पहुंचाने के आरोप बेसिक शिक्षा सचिव पर लगे थे, जिसके बाद टेंडर की प्रक्रिया दोबारा से संचालित की गयी थी। यही हाल इस बार भी नजर आ रहा है।

शिक्षा से जुड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करके इंस्टॉल करें गाँव कनेक्शन एप

वहीं, मामपुर बाना निवासी कक्षा सात की छात्रा मधु और सोनम ने बताया, “पहले यह पता चला था कि नई किताबें मिलेंगी, पर मिली नहीं। पुरानी किताबों से पढ़ाई हो रही है। मैडम ने बताया कि अभी नई किताबें नहीं आयी हैं।”

पिछले साल जो कक्षा पांच में था, हम उसकी किताब ले लिए, और उसी से पढ़ते हैं। अभी तक नई किताबें नहीं आई हैं।
कृष्ण कुमार, छात्र, प्राथमिक विद्यालय मझिगवाँ, सीतापुर

परिषदीय स्कूल मामपुर बाना के अनुदेशक मनीष द्विवेदी ने बताया कि सत्र के बाद छात्रों से पुरानी किताबें जमा करा ली गयी थीं। लेकिन नई किताबें न होने के कारण स्कूल ने छात्रों को पुरानी किताबें दे दी हैं। उन्हीं से पढ़ाई हो रही है, हालांकि छात्र नई किताबें मांग रहे हैं,पर नई किताबें अभी स्कूल के पास उपलब्ध नहीं हैं। लंभुआ ब्लॉक के नरेन्द्रपुर के उच्च प्राथमिक विद्यालय के रामसेबक मौर्य ने कहा कि किताब पुरानी जमा करा लिया गया था, उसी से काम चलाया जा रहा है। बच्चे नई किताब मांगते हैं मगर उन्हें समझा दिया जाता है।

बता दें कि परिषदीय स्कूलों में एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है और माध्यमिक स्कूलों में एक जुलाई से शैक्षिक सत्र शुरू हो जायेगा, लेकिन अभी तक किताबों का टेंडर नहीं हो सका है। पिछले वर्ष भी टेंडर में पेंच फंसने के चलते छमाही परीक्षा के बाद बच्चों को स्कूलों में किताबें वितरित की गयी थीं। इस बार बच्चों को कब तक किताबें मिल सकेंगी इस पर अभी कहना संभव नहीं है।

सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 1.98 लाख प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले 1.96 करोड़ बच्चों के लिए इस बार भी लगभग 250 करोड़ रुपए की किताबों की छपाई होनी है, जो बच्चों को सरकार द्वारा मुफ्त दी जाती हैं। लगभग 13 करोड़ किताबों की छपाई इस बार होनी है। किताबों की छपाई के टेंडर के सम्बन्ध में यूपी बेसिक एजूकेशनल प्रिन्टर्स एसोशिएसन ने शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या से मुलाकात की थी। जिसके बाद जांच करवाये जाने का आश्वासन एसोशिएसन को दिया गया था लेकिन अब तक इस विषय में कोई जांच शुरू नहीं हुई।

शिक्षा सत्र 2017-18 में पिछले 15 वर्षों से चली आ रही व्यवस्था को भंग करते हुए शासन की चहेती कम्पनी को कापी-किताबों की आपूर्ति का ठेका दिये जाने की तैयारी है। बुर्दा ड्रक इण्डिया प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा को इससे लाभ पहुंचाने की तैयारी चल रही है।
शैलेन्द्र जैन, अध्यक्ष, यूपी बेसिक एजूकेशनल प्रिन्टर्स एसोशिएसन

भला 13 मुद्रक कैसे पूरा करेंगे

शैलेन्द्र आगे कहते हैं, “पुरानी व्यवस्था को तोड़ते हुए सिक्योरिटी धनराशि को 15 लाख रुपए से बढ़ा कर 2.5 करोड़ रुपए कर दिया गया है। शिक्षा विभाग में पिछले 15 वर्षों से 35-40 मुद्रक कार्य करते आ रहे हैं, लेकिन इस बार मात्र 13 मुद्रकों का कार्टेल बना कर काम किया जा रहा है। जब पिछले वर्ष 23 मुद्रक जुलाई की आपूर्ति को जनवरी तक पूरी न कर पाये थे तो इस बार कैसे 13 मुद्रक इस कार्य को पूरा कर पायेंगे। इन 13 मुद्रकों में 12 फर्में फर्जी है और मुख्य काम बुर्दा कम्पनी ही कर रही है इसलिए सूचना के अनुसार 80 प्रतिशत काम बुर्दा कम्पनी को दे दिया जायेगा।”

तब तक पुरानी किताबों से ही करें पढ़ाई

बेसिक शिक्षा सचिव अजय सिंह जो कि इन दिनों बेसिक शिक्षा निदेशक का अतिरिक्त पद भी संभाल रहे हैं, कहते हैं, “टेंडर में देरी की वजह किसी कंपनी को लाभ पहुंचाने के कारण नहीं हो रही है। टेंडर में देरी का कारण उन प्रिन्टर्स की शिकायतें भी हैं जो इस प्रक्रिया में देर करवा रहे हैं। इस बार निदेशक के पद पर कोई अन्य व्यक्ति कार्यरत नहीं है, इसके चलते कुछ इशू फंस रहे हैं। हमने निदेशक के पद पर किसी को भेजने की सिफारिश शासन से की है, जल्द ही यह पद भर जायेगा। हमारी कोशिश है कि जुलाई के महीने में बच्चों को किताबें मिल जायें। जब तक किताबें बच्चों को नहीं मिल रही हैं वह पुरानी किताबों से पढ़ाई करेंगे।”

ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।

More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top