तहसील दिवस कन्नौज: समस्या का निस्तारण न होने के कारण फरियादी बार-बार आने को मजबूर

तहसील दिवस कन्नौज:  समस्या का निस्तारण न होने के कारण फरियादी  बार-बार आने को मजबूरफरियादी दूसरे, तीसरे और न जाने कितने दिनों तक अफसरों की चौखट पर फरियाद करता रहता है।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

कन्नौज। तहसील दिवसों में फरियादियों के बार-बार आने के पीछे समस्या का निस्तारण न होना मुख्य वजह है। अफसर और कर्मचारी प्रार्थना पत्रों का डिस्पोजल तो कर देते हैं, लेकिन मौके पर समस्या नहीं निपटती है। इस वजह से फरियादी दूसरे, तीसरे और न जाने कितने दिनों तक अफसरों की चौखट पर फरियाद करता रहता है।

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जिला मुख्यालय से करीब 16 किमी दूर बसे तिर्वा के मोहल्ला दुर्गानगर निवासी विजय कुमार (55 वर्ष) ने छह अप्रैल को तिर्वा में डीएम जगदीश की अध्यक्षता में आयोजित तहसील दिवस में समस्या रखी थी। इसमें हवाला दिया था कि कोतवाली के निकट दो तालाब हैं, जो मिलकर एक हो गए हैं।

गर्मी के दिनों में कई घरों में गंदा बदबूदार पानी घुसता है, जिसकी वजह से लोग बीमार पड़ते हैं। आने वाले बरसात के मौसम में समस्या और विकराल हो जाती है। यहां तक की कोतवाली में भी पानी भरता है। इस समस्या से निजात दिलाई जाए। अफसरों ने इस समस्या के निस्तारण के लिए लेखपाल को भेजा।

विजय कुमार बताते हैं, “लेखपाल ने नाला बनाकर और तालाब का पानी का निकास बनाने के प्रार्थना पत्र पर हस्ताक्षर करवा लिए। पूछने पर लेखपाल ने कहा कि अभी समस्या निस्तारित नहीं हुई है। जब उन्होंने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत नंबर डालकर जांचा तो मामला निस्तारित हुआ पाया।” वह आगे बताते हैं, “वेबसाइट पर तो शिकायती पत्र का निस्तारण कर दिया गया। उसमें लेखपाल की आख्या भी लगी है, लेकिन मौके पर समस्या तो जस की तस बनी है।”

यह सिर्फ एक उदाहरण

बताते चलें कि तहसील दिवस में कई विभागों से संबंधित सैकड़ों फरियादी अपनी-अपनी व्यथा बताते हैं, लेकिन अफसर इस पर ध्यान नहीं देते हैं। वह रिपोर्ट लगाकर बिना संतुष्ट किए हुए फरियादी को बार-बार अफसरों के चक्कर काटने पर मजबूर करते हैं। ये तो एक उदाहरण है, न जाने कितनी दूर-दूर से आए लोग परेशान होते हैं।

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