हमेशा के लिए मौन हो गए साहित्यकार मनु शर्मा

Vinod SharmaVinod Sharma   8 Nov 2017 6:27 PM GMT

हमेशा के लिए मौन हो गए साहित्यकार मनु शर्मामनु शर्मा

साहित्यकार मनु शर्मा का बुधवार सुबह बड़ी पियरी स्थित उनके निवास पर निधन हो गया। पद्मश्री सम्मान से सम्मानित मनु शर्मा के निधन की सूचना से काशी के साहित्य जगत में शोक व्याप्त हो गया। उन्हें यूपी सरकार ने यश भारती से सम्मानित किया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सफाई अभियान कर नवरत्न चुना था।

साहित्यकार मनु शर्मा का जन्म 1928 में फैजाबाद जिले में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विवि से एमए हिंदी व पीएचडी की। वह काफी दिनों से बीमार चल रहे थे। शरद पूर्णिमा के दिन उन्होंने 100वां जन्मदिन मनाया था। उसी दिन उनकी तबीयत खराब होने की वजह से हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य में सुधार होने पर nks दिन बाद घर लाया गया था। उसके बाद उन्होंने भोजन छोड़ दिया था। भतीजे तुषार शर्मा ने बताया कि आज सुबह अचानक तबीयत बिगड़ी। जब तक अस्पताल ले जाने का प्रबंध किया जाता, उनके प्राण प्रखेरू उड़ गये।

आधुनिक हिंदी साहित्य के लेखक मनु शर्मा हिंदी की खेमेबंदी से दूर रहे। उन्होंने साहित्य की हर विधा में लिखा है। बेहद अभाव में पले-बढ़े मनु शर्मा ने बनारस के डीएवी कालेज में आदेश पालक की नौकरी की। उनके गुरु रहे कृष्णदेव प्रसाद गौड़ उर्फ बेढ़ब बनारसी ने उनके पुस्तकालय में काम लिया। पुस्तकालय में पुस्तक उठाते-उठाते उनमें पढऩे की रूचि जगी। उन्होंने अपनी कलम से पौराणिक उपन्यासों को आधुनिक संदर्भ दिया है। मनु शर्मा ने अपनी कार्टून कविता के जरिए हर घर-हर दिल में उस दौरान दस्तक दी। राजकुमार हिरानी ने मनु शर्मा की पुस्तक गांधी लौटे के विचार की चोरी कर इस पर फिल्म का निर्माण किया था। भारतीय भाषाओं में उनकी कृति कृष्णा की आत्मकथा है। 8 खंडों और 3000 पृष्ठ वाले कृष्ण की आत्मकथा एक कालजयी कृति है। मनु शर्मा ने साहित्य की हर विधा में लिखा है। उनके समृद्ध रचना-संसार में आठ खंडों में प्रकाशित कृष्ण की आत्मकथा भारतीय भाषाओं का विशालतम उपन्यास है। ललित निबंधों में अपनी सीमाओं का अतिक्रमण करते हैं तो उनकी कविताएं अपने समय का दस्तावेज है।

ये सम्मान मिला

गोरखपुर विवि से डीलिट की मानद उपाधि। उप्र हिंदी साहित्य संस्थान का लोहिया सम्मान, केंद्रीय हिंदी संस्थान का सुब्रह्मण्यम पुरस्कार, व्यास सम्मान उप्र सरकार का सर्वोच्च सम्मान यश भारती एवं साहित्य के लिए मप्र सरकार का सर्वोच्च मैथिलीशरण गुप्त सम्मान। वर्ष २०१५ में पदमश्री से अलंकृत मनु शर्मा को पीएम मोदी द्वारा स्वच्छ भारत अभियान के नवरत्नों में नामित किया गया।

मनु शर्मा की प्रमुख किताबें

तीन प्रश्न, राणा सांगा, छत्रपति, एकलिंग का दीवान, ऐतिहासिक उपन्यास गुनाहों का देवता, मरीचिका, विवशता, लक्ष्मणरेखा, गांधी लौटे, सामाजिक उपन्यास तथा द्रौपदी की आत्मकथा, द्रोण की आत्मकथा, कर्ण की आत्मकथा, कृष्ण की आत्मकथा, गांधी की आत्मकथा और अभिशप्त कथा पौराणिक उपन्यास हैं। पोस्टर उखड़ गया, मुंशी नवनीत लाल, महात्मा, दीक्षा कहानी संग्रह है। खूंटी पर टंगा बसंत कविता संग्रह है, उस पार का सूरज निबंध संग्रह है।

कल मणिकर्णिका पर होगी अंत्येष्टि

साहित्यकार मनु शर्मा का अंतिम संस्कार गुरुवार दोपहर मणिकर्णिता घाट पर होगा। मुखाग्नि उनके बड़े पुत्र शरद शर्मा देंगे। तुषार ने बताया कि सुबह नौ बजे शवयात्रा बड़ी पियरी से मणिकर्णिका घाट के लिए रवाना होगी।

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