मदरसों के कोर्स में बदलाव का स्वागत, पर सुविधाएं और बढ़ें

मदरसों के कोर्स में बदलाव का स्वागत, पर सुविधाएं और बढ़ेंअब मदरसों में पढ़ाई जाएंगी एनसीईआरटी की किताबें।

स्वयं प्रोजेक्ट डेस्क

लखनऊ। मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाए जाने के योगी सरकार के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के मदरसों के मौलवियों ने एक तरफ जहां सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, दूसरी तरफ उनका कहना है कि सरकार मदरसों की सुविधाओं को और बढ़ाए।प्रदेश में सरकार के इस फैसले के बाद ‘गाँव कनेक्शन’ ने छह जिलों में मदरसों के मौलिवियों और अध्यापकों से उनकी राय जानी।

गाजियाबाद के रजापुर ब्लॉक के गाँव ढबारसी मदरसे शिददीकिया-उल-कुरान के मौलाना मोहम्मद करी कहते हैं, “सरकार का जो भी आदेश होगा, हम उसका पालन करेंगे, लेकिन धर्म के मामले में किसी प्रकार के हस्तक्षेप को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।“ आगे कहते हैं, “आज के समय में जब दुनिया कहां से कहां पहुंच रही है, उस दौर में मुस्लिम युवक बहुत पीछे हैं, उनके अच्छी तालीम देने के लिए बहुत काम करने की जरूरत है।“

हम तो शुरू से आधुनिक शिक्षा के पक्ष में हैं, लेकिन कुछ लोग नहीं चाहते कि मुस्लिम समाज के बच्चे आधुनिक शिक्षा लें, मदरसों में आधुनिक शिक्षा पढ़ाई जानी चाहिए। इस फैसले का स्वागत करते हैं।
मौलाना मो. उमर, मदरसा, नेकपुर साबित नगर, गाजियाबाद

इस फैसले पर कासगंज जिले के कस्बा गंजडूण्डवारा स्थित मदरसा जामियातुल बरकात के प्रिंसपल मौलाना जैनुलआबदीन कहते हैं, “यह सरकार का अच्छा प्रयास है कि मदरसा छात्रों को दीनी तालीम के साथ आधुनिक शिक्षा भी मिलेगी, एनसीईआरटी की किताबों के मदरसा में शामिल होने से दीनी तालीम पर कोई फर्क नही पड़ेगा।”प्रदेश में लगभग 19 हजार मदरसे हैं।

योगी सरकार ने सोमवार को नए सत्र में सभी मदरसों में अंग्रेजी, विज्ञान और गणित विषय सहित एनसीईआरटी पाठयक्रम लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। मेरठ के मोदीनगर ब्लॉक के नेकपुर साबित नगर के मदरसे मुफीदे आम उर्दू मीडियम मतकब के मौलाना मोहम्मद उमर ने कहा, “हम सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हैं। आज के दौर में रोजगार परक शिक्षा के लिए आधुनिक शिक्षा पर जोर देना ही होगा।“

मदरसों की आर्थिक हालत पहले से खराब है। ऐसे में सरकार को ही किताबें उपलब्ध करानी होंगी। हमें फैसले से कोई दिक्कत नहीं है।
मुजीबुर्रहमान, अध्यापक, मदरसा, अहमदीटोला कन्नौज

‘सरकार को करनी चाहिए मदद’

कन्नौज के मदरसा अरबिया कासिफ उल उलूम अहमदीटोला कन्नौज के सहायक अध्यापक मुजीबुर्रहमान बताते हैं, “सरकार को ही एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध करानी होंगी। मदरसों की आर्थिक हालत पहले से ही खराब है और खर्च मदरसा वहन नहीं कर पाएगा। अगर सरकार का लिखित में आदेश आता है तो हमको कोई दिक्कत नहीं है।“ मुजीबुर्रहमान आगे बताते हैं, ‘‘जिस तरह सरकार परिषदीय स्कूलों में बच्चों के लिए यूनिफार्म, भोजन और किताबें नि:शुल्क दे रही है, उसी तरह से मदरसों में भी बच्चों को मुफ्त में उपलब्ध कराए। हम लोग पहले से ही आधुनिकरण शिक्षा दे रहे हैं।”

रिपोर्टिंग टीम

कन्नौज से अभिषेक मिश्रा, गाजियाबाद से पंकज त्रिपाठी, इलाहाबाद से ओपी सिंह परिहार, वाराणसी से विनोद शर्मा, मेरठ से सुंदर चंदेल, अलीगढ़ से मो. आमिल।

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