मौरंग के दामों ने तोड़ा ‘घर’ का ख्वाब

मौरंग के दामों ने तोड़ा ‘घर’ का ख्वाबमौरंग की कमी से लोगों को घर बनाना हुआ मुश्किल।

दीप कृष्ण शुक्ला, स्वयं कम्युनिटी जर्नलिस्ट

उन्नाव। मौरंग की अनुपलब्धता ने लोगों के ‘अपने आशियाने’ के सपने में फिलहाल तो ब्रेक लगा दिया है। यही नहीं, भवन निर्माण से जुड़े अन्य व्यवसायों के लोगों के सामने आर्थिक संकट जैसे स्थितियां भी उत्पन्न कर दी हैं। यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में तमाम लोग भुखमरी की कगार पहुंच जाएंगे। जानकारों का मानना है कि जल्द हालात सामान्य होने के आसार भी नहीं दिखायी दे रहे हैं यदि बरसात जल्द शुरू हो गयी तो समस्या और गहरा जाएगी।

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शहर के मोहल्ला लोकनगर में मकान का निर्माण करा रहे जागेश्वर (34) बताते हैं, निर्माण सामग्री इतनी महंगी हो गई है कि उन्हें निर्माण रुकवाना पड़ गया। मौरंग के रेट कई गुना बढ़ गए हैं। मालूम हो कि भवन निर्माण का आवश्यक घटक मौरंग इन दिनों दूर की कौड़ी हो गयी है।

घपलेबाज़ी के चलते प्रदेश में मौरंग के खनन पर बीते लगभग छह माह से अधिक समय से रोक लगी है। जिसके चलते मौरंग के दाम इन दिनों आसमान छू रहे हैं। कभी 2500 से 3हजार रुपये प्रति ट्रॉली की दर से मिलने वाली मौरंग इन दिनों 12 से 14 हजार रुपये प्रति ट्रॉली बिक रही है। जिसका नतीजा यह है कि वर्षों से अपना आशियाना बनाने का ख्वाब संजो रहे लोगों को अन्य संसाधन जुटाने के दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

मौरंग के बढ़ते दामों से हुआ कई दुकानदारों का धंधा चौपट

मौरंग की अनुपलब्धता का सीधा असर भवन निर्माण से जुड़े अन्य व्यवसायों और काम धंधों पर भी पड़ रहा है। मकानों का काम ठप होने से वायरिंग, प्लम्बरिंग, टायल्स फिटिंग, पेंटिंग, दरवाजा खिड़की, ग्रिल बनाने वाले, मकानों के नक्शे बनाने वाले कामगारों के पास रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गयी है।

वहीं इनसे सम्बन्धित उपकरण व सामग्री का व्यापार करने वाले दुकानदारों का धंधा भी चौपट हो रहा है। तमाम लोगों ने दूसरे विकल्प भी तलाशने शुरू कर दिए हैं। जब मकान ही नहीं बन रहे है तो इन सभी सामग्री की बिक्री नगण्य हो गयी है। सटरिंग का काम करने वाले तो भूखों मरने की कगार पहुंच रहे हैं। जिनमें वे लोग सबसे अधिक परेशान है जिन्होंने हाल ही में लाखों रुपये खर्च कर माल जुटा कर यह व्यवसाय शुरू किया था।

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